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नीलम चूल्हा तैयार, निवेशक का इंतजार

Sat, 23 Feb 2013 05:30 AM IST
Dehradun
Dehradun Updated Sat, 23 Feb 2013 05:30 AM IST
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देहरादून। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में गैस की अनुपलब्धता व महंगाई के बीच पेट्रोलियम विवि(यूनिवर्सिटी आफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज) ने राहतभरा चूल्हा तैयार किया है। ‘नीलम चूल्हा’ का हाल ही में पेटेंट हो चुका है। चूल्हे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल एलपीजी नहीं बल्कि कई और प्राकृतिक ईंधनों से संचालित हो सकता है।
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आम आदमी की पहुंच में लाने के लिए चूल्हे में मल्टी ईंधन का विकल्प दिया गया है। यह न केवल एलपीजी बल्कि बायोगैस, चीड़ के बने पीरुल व गौबर से बने ब्रीकेट से संचालित हो सकता है। चूल्हे की तमाम खासियतों के बीच गत पांच अक्टूबर 2012 को चूल्हे का पेटेंट इंडियन पेटेंट आफिस के आफिशिय जर्नल में प्रकाशित हो चुका है।
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इनसेट-
कीमत और मेंटिनेंस कम
विवि की रिसर्च टीम ने कई समस्याओं को ध्यान में रखकर इसे तैयार किया है। चूल्हे के घरेलू उपयोग के मद्देनजर विवि ने इसके दामों को भी आम आदमी कह पहुंच में रखा है। तीन से पांच सदस्यीय परिवार के लिए एकल स्टोव वाले चूल्हे की कीमत 900 रुपए, छह से 10 सदस्यों के लिए डबल स्टोव चूल्हे की कीमत 1200 रुपए तय की गई है। 40 से 50 लोगों के लिए तैयार आउटडोर चूल्हे की कीमत 2400 रुपए तय की गई है। पांच किलो वजन के इस चूल्हे की बनावट एक सिलेंडर के आकार की होती है। इसे हिलाने या स्थानांतरित करने पर कोई पुर्जा ढीला नहीं पड़ता है।
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यह भी खासियत
- चूल्हे का बर्नर अगर ढक दिया जाए तो यह पूरी तरह से हीटर का काम करता है। इसकी बॉडी आग से तपने लगी है, लेकिन इसकी संचालन प्रक्रिया पर कोई असर नहीं आता है।
- इसकी एक खासियत यह भी है कि चीड़ का पीरुल या बायोगैस या गोबर ब्रीकेट से संचालित करने पर जरा भी धुआं नहीं निकलता है।
- अगर उपयोगकर्ता न चाहे तो चूल्हे का बाहरी आवरण पूरी तरह से ठंडा ही रहता है।
इनसेट-
निवेशक का इंतजार
चूल्हे को जितनी संजीदगी के साथ आम आदमी के लिए तैयार कर पेटेंट हुआ है, उतना ही मुश्किल इसके लिए निवेशक तलाशने में पेश आ रही है। विवि के मुताबिक इसके कम दाम और स्टील की बॉडी में इतने कम खर्च में चूल्हा तैयार करना थोड़ा मुश्किल है। इसके लिए विवि अब प्रदेश के वैकल्पिक ऊर्जा विभाग से कुछ सहायता मिलने की राह ताक रहा है।

बयान:-
लंबे अनुसंधान के बाद उत्तराखंड के आम आदमी की जरूरतों के मुताबिक यह चूल्हा तैयार किया गया है। हम अपेक्षा करते हैं कि प्रदेश सरकार से चूल्हा आम जनता तक पहुंचाने में कुछ सहायता मिलेगी।- अरुण ढांड, निदेशक, पेट्रोलियम विवि
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