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‘क्षितिज’ में छाई दून की ‘रेसिंग कार’
Dehradun
Updated Tue, 12 Feb 2013 05:31 AM IST
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देहरादून। देश-दुनिया में दून को यूं ही एजुकेशन हब की पदवी नहीं मिली है। राजधानी के छात्र लगातार राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मेधा का लोहा मनवाते रहे हैं। इसी कड़ी में देहरादून इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी (डीआईटी) कालेज के पांच युवाओं की टीम ‘मंथन’ की रेसिंग कार देशभर के सैकड़ों इंजीनियरिंग संस्थानों के बीच छा गई। आईआईटी खड्गपुर में एक से चार फरवरी तक आयोजित तकनीकी महोत्सव ‘क्षितिज 2013’ में इस रेडियो कंट्रोल्ड नाइट्रो कार को ‘मोस्ट रॉबस्ट डिजाइन’ का पहला पुरस्कार मिला।
मंथन टीम के लीडर और डीआईटी में बीटेक इंडस्ट्रियल एंड प्रोडक्शन इंजीनियरिंग चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र सोमनाथ कपूर ने अमर उजाला को बताया कि कार बनाने में एक साल का वक्त लगा। टीम में बीटेक आईपीई के गोविंद तुंबरिया, शिवम मिश्रा, बीटेक मैकेनिकल के तनवीर सिंह और पीयूष सुल्तानिया भी शामिल थे। कपूर ने बताया कि महोत्सव में कार के इंजन का 32 हजार आरपीएम का प्रदर्शन काफी सराहा गया। रेडियो फ्रीक्वेंसी से कंट्रोल होने वाली यह कार महज दस सेकेंड में 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है।
कार की खासियत
-यह कार पूरी तरह से रिमोट सेंसिंग तकनीक पर काम करती है
-कार में नाइट्रो ईंधन का इस्तेमाल होता है, जो काफी शक्तिशाली है
-इस मॉडल को तैयार करने में 71 हजार रुपये का खर्चा आया
-कार का इंजन 4.6 सीसी और 2.9 हॉर्स पावर का है।
-4 व्हील ड्राइव तकनीक से इंजन चारों पहियों को पावर देता है
-इसमें फेल सेफ मैकेनिज्म का प्रयोग किया गया है, यानी रेंज से बाहर जाते ही कार के ब्रेक लग जाते हैं
-कार में दो गियर लगाए गए हैं, जो आटोमेटिक तरीके से काम करते हैं
-कार को बनाने में एल्यूमिनियम 6065 का इस्तेमाल किया गया है
-इस कार को 2.4 गीगा हर्ट्ज फ्रीक्वेंसी पर कंट्रोल किया जाता है
अब बड़े मॉडल पर नजर
छोटे मॉडल की कामयाबी से उत्साहित टीम ने अब इस कार के बड़े रेसिंग मॉडल पर काम शुरू कर दिया है। कालेज के निदेशक डा. कृष्ण कुमार और डीन प्रो. शिशिर कुमार ने छात्रों को पूर्ण सहयोग देने का वादा किया है। टीम लीडर सोमनाथ कपूर के पिता वीके कपूर और मां वीणा कपूर ने खुशी जताई।
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मंथन टीम के लीडर और डीआईटी में बीटेक इंडस्ट्रियल एंड प्रोडक्शन इंजीनियरिंग चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र सोमनाथ कपूर ने अमर उजाला को बताया कि कार बनाने में एक साल का वक्त लगा। टीम में बीटेक आईपीई के गोविंद तुंबरिया, शिवम मिश्रा, बीटेक मैकेनिकल के तनवीर सिंह और पीयूष सुल्तानिया भी शामिल थे। कपूर ने बताया कि महोत्सव में कार के इंजन का 32 हजार आरपीएम का प्रदर्शन काफी सराहा गया। रेडियो फ्रीक्वेंसी से कंट्रोल होने वाली यह कार महज दस सेकेंड में 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है।
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कार की खासियत
-यह कार पूरी तरह से रिमोट सेंसिंग तकनीक पर काम करती है
-कार में नाइट्रो ईंधन का इस्तेमाल होता है, जो काफी शक्तिशाली है
-इस मॉडल को तैयार करने में 71 हजार रुपये का खर्चा आया
-कार का इंजन 4.6 सीसी और 2.9 हॉर्स पावर का है।
-4 व्हील ड्राइव तकनीक से इंजन चारों पहियों को पावर देता है
-इसमें फेल सेफ मैकेनिज्म का प्रयोग किया गया है, यानी रेंज से बाहर जाते ही कार के ब्रेक लग जाते हैं
-कार में दो गियर लगाए गए हैं, जो आटोमेटिक तरीके से काम करते हैं
-कार को बनाने में एल्यूमिनियम 6065 का इस्तेमाल किया गया है
-इस कार को 2.4 गीगा हर्ट्ज फ्रीक्वेंसी पर कंट्रोल किया जाता है
अब बड़े मॉडल पर नजर
छोटे मॉडल की कामयाबी से उत्साहित टीम ने अब इस कार के बड़े रेसिंग मॉडल पर काम शुरू कर दिया है। कालेज के निदेशक डा. कृष्ण कुमार और डीन प्रो. शिशिर कुमार ने छात्रों को पूर्ण सहयोग देने का वादा किया है। टीम लीडर सोमनाथ कपूर के पिता वीके कपूर और मां वीणा कपूर ने खुशी जताई।
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