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सरकार सुरक्षा दे, कदमों को न बांधे
Dehradun
Updated Sat, 12 Jan 2013 05:30 AM IST
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देहरादून। ड्यूटी का समय सात घंटे करने के सरकारी आदेश पर वह युवतियां भी रोष में हैं, जिन्हें सात बजे के बाद किसी-न-किसी वजह से घर से बाहर रहना पड़ता है। इनका कहना है कि जॉब का समय निर्धारित करना सही नहीं, क्योंकि इससे कई प्रतिष्ठान वाले युवतियों को काम पर रखने से हाथ झाड़ लेंगे। उनके मुताबिक प्रतिष्ठान वालों की तरफ से घर भिजवाने की व्यवस्था का फैसला ठीक है, लेकिन सबसे जरूरी है कि पुलिस-कानून व्यवस्था दुरु स्त की जाए। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो फिर महिला घर में भी सुरक्षित नहीं। ड्यूटी का समय शाम सात बजे तक निर्धारित करने का कोई मतलब नहीं। इनकी मांग है कि सरकार सुरक्षा दे, उनके कदमों को न बांधे।
कंपटीशन में पीछे धकेलने की बात
आजकल कंपटीशन का जमाना है। लड़का-लड़की में कोई भेद नहीं किया जा रहा और यहां सरकार सात बजे बाद काम पर रोक लगा रही है। ऐसे में उन लड़कियों का क्या, जिन्हें ट्यूशन या किसी और कारण से घर से बाहर रहना पड़ता है। कल तो वह कहेगी कि वह भी सात बजे बाद बाहर न रहें। यह कंपटीशन में उन्हें पीछे धकेलने की बात है।
-स्वाति नीरज, बीसीए द्वितीय वर्ष, ग्राफिक एरा।
कानून व्यवस्था ठीक करें तो ज्यादा अच्छा
हम तो खुद छह-सात बजे तक बाहर रहते हैं। सुरक्षा को समय से बांधकर नहीं देखा जा सकता। अगर कुछ होना है कभी भी हो सकता है। जरूरी है कि युवतियों, महिलाओं को सुरक्षा प्रदान की जाए। पुलिस बल बढ़ाया जाए। कानून व्यवस्था सख्त की जाए। नियमों का पालन सख्ती से कराया जाए। वरना कल को पांच बजे तक ही काम करने की बात होगी। यह सही नहीं।
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-सुहानी धवन, बीकाम द्वितीय वर्ष, डीएवी पीजी कालेज।
पर इन्हें भाया :
शहर में सुरक्षा कहां, आदेश अच्छा
सात बजे तक ही काम का आदेश अच्छा है। शहर में सुरक्षा नहीं। इसके बाद घर छोड़ने का प्रावधान बेहतर है। अभी ज्यादातर जगह इसकी व्यवस्था नहीं। इससे युवतियों की सुरक्षा पुख्ता होगी।
--प्रिया, ज्वेलरी शोरूम में कार्यरत।
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कंपटीशन में पीछे धकेलने की बात
आजकल कंपटीशन का जमाना है। लड़का-लड़की में कोई भेद नहीं किया जा रहा और यहां सरकार सात बजे बाद काम पर रोक लगा रही है। ऐसे में उन लड़कियों का क्या, जिन्हें ट्यूशन या किसी और कारण से घर से बाहर रहना पड़ता है। कल तो वह कहेगी कि वह भी सात बजे बाद बाहर न रहें। यह कंपटीशन में उन्हें पीछे धकेलने की बात है।
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-स्वाति नीरज, बीसीए द्वितीय वर्ष, ग्राफिक एरा।
कानून व्यवस्था ठीक करें तो ज्यादा अच्छा
हम तो खुद छह-सात बजे तक बाहर रहते हैं। सुरक्षा को समय से बांधकर नहीं देखा जा सकता। अगर कुछ होना है कभी भी हो सकता है। जरूरी है कि युवतियों, महिलाओं को सुरक्षा प्रदान की जाए। पुलिस बल बढ़ाया जाए। कानून व्यवस्था सख्त की जाए। नियमों का पालन सख्ती से कराया जाए। वरना कल को पांच बजे तक ही काम करने की बात होगी। यह सही नहीं।
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-सुहानी धवन, बीकाम द्वितीय वर्ष, डीएवी पीजी कालेज।
पर इन्हें भाया :
शहर में सुरक्षा कहां, आदेश अच्छा
सात बजे तक ही काम का आदेश अच्छा है। शहर में सुरक्षा नहीं। इसके बाद घर छोड़ने का प्रावधान बेहतर है। अभी ज्यादातर जगह इसकी व्यवस्था नहीं। इससे युवतियों की सुरक्षा पुख्ता होगी।
--प्रिया, ज्वेलरी शोरूम में कार्यरत।