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रफ्तार के एक्सप्रेसवे से मंदी के कच्चे रास्ते पर उतरा ऑटो सेक्टर, हर कदम पर खतरा है
Sat, 17 Aug 2019 07:22 PM IST
Prabudhh Jain
डेटा डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
डेटा डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Prabudhh Jain
Updated Sat, 17 Aug 2019 07:22 PM IST
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ऑटो सेक्टर पर मंदी की मार (ग्राफिक्स-रोहित झा)
- फोटो : Amar Ujala
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ऑटो सेक्टर के पहिए, कुछ दिन पहले सुस्त पड़ना शुरू हुए थे और अब जाकर लगता है कि वो रफ्तार के एक्सप्रेसवे से उतरकर पूरी तरह मंदी के कच्चे रास्ते पर निकल गए हैं। खबरें, इंडस्ट्री पर पैनी नजर रखने वाली एजेंसियों के आंकड़ों के जरिए आ रही हों या बड़ी कार कंपनियों के हवाले से...हर खबर बुरी है, डराने वाली है। ये बताने वाली कि मंदासुर ने मुंह खोल दिया है। जिसमें पहली बड़ी बलि ऑटो सेक्टर की ही चढ़ी है। शायद यही वजह है कि अब सरकार ने ऑटोमोबाइल निर्माताओं को भरोसा दिलाया है कि जीएसटी काउंसिल को इस बात पर मनाने की कोशिश होगी कि ऑटो कंपोनेंट्स पर दरें एक समान हो सकें।
कारों की बिक्री में बेतहाशा गिरावट
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटो मैन्यूफैक्चरर यानी SIAM के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से जुलाई के दौरान कारों की बिक्री कहीं नीचे फिसल गई है। बिक्री में गिरावट की मार हर कार निर्माता पर पड़ी है। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति की बिक्री में एक तिहाई का नुकसान देखने को मिला है। जनवरी में जहां कंपनी ने 1.42 लाख कार बेचीं वहीं जुलाई में महज 98 हजार। इसी तरह का असर बाकी कंपनियों की बिक्री पर भी देखने को मिला। होंडा को भी इसका भारी नुकसान हुआ है। जनवरी में जहां कंपनी ने 18,261 गाड़ियों की चाबी ग्राहकों को सौंपी तो वहीं जुलाई में ये आंकड़ा घटकर 10, 250 ही रह गया।
(ग्राफिक्स- रोहित झा)
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कारों की बिक्री में बेतहाशा गिरावट
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटो मैन्यूफैक्चरर यानी SIAM के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से जुलाई के दौरान कारों की बिक्री कहीं नीचे फिसल गई है। बिक्री में गिरावट की मार हर कार निर्माता पर पड़ी है। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति की बिक्री में एक तिहाई का नुकसान देखने को मिला है। जनवरी में जहां कंपनी ने 1.42 लाख कार बेचीं वहीं जुलाई में महज 98 हजार। इसी तरह का असर बाकी कंपनियों की बिक्री पर भी देखने को मिला। होंडा को भी इसका भारी नुकसान हुआ है। जनवरी में जहां कंपनी ने 18,261 गाड़ियों की चाबी ग्राहकों को सौंपी तो वहीं जुलाई में ये आंकड़ा घटकर 10, 250 ही रह गया।
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(ग्राफिक्स- रोहित झा)
दो दशक में सबसे बुरा साल
19 साल पहले ऐसा सिर्फ साल 2000 में हुआ था। उसके बाद फिर कभी नहीं। लेकिन, इस साल हो गया। जुलाई 2019 में ऑटो सेक्टर में बिक्री के आंकड़े 18 लाख 25 हजार वाहनों पर टिके हैं। वहीं जुलाई 2018 में ये आंकड़ा 22 लाख 45 हजार वाहनों का था। यानी सीधे-सीधे 18.71 फीसदी की बड़ी गिरावट। ये बीते दो दशक की सबसे बड़ी गिरावट है। जो बताने के लिए काफी है कि हालात बहुत अच्छे नहीं हैं।
(ग्राफिक्स- रोहित झा)
माना जा रहा है कि अगर मंदी से निपटने के उपाय जल्द नहीं निकाले गए तो अगले तीन महीने में अकेले ऑटो सेक्टर में 7 से 10 लाख लोगों की छंटनी हो सकती है।
(ग्राफिक्स- रोहित झा)
माना जा रहा है कि अगर मंदी से निपटने के उपाय जल्द नहीं निकाले गए तो अगले तीन महीने में अकेले ऑटो सेक्टर में 7 से 10 लाख लोगों की छंटनी हो सकती है।