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बिना रसूख के थानाध्यक्ष नहीं लिखते एफआईआर
अमर उजाला/गोंडा
Updated Wed, 03 Aug 2016 10:46 PM IST
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यूपी पुलिस
- फोटो : pti
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जिले के 18 थानों में आने वाले फरियादियों व पीड़ितों की पुलिस तहरीर तो लेती है, लेकिन जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन देकर उन्हें वापस भेज देती है। कुछेक रसूखदार लोगों के मामलों में पुलिस एफआईआर लिखती है, मगर अधिकांश मामलों को जांच के नाम पर दबाए रहती है। इससे पीड़ित थानों के चक्कर लगा रहे हैं। मगर पुलिस उनकी एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है।
थानों पर आने वाले फरियादियों/पीड़ितों की समस्या को सुनकर उसका त्वरित निस्तारण किया जाए। कुछेक मामलों में मौके पर जाकर जांच करनी चाहिए। इसके बाद एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। मगर अपराध कारित होने पर जैसे लूट, डकैती, चोरी, हमला, छेड़खानी व दुष्कर्म के मामलों में त्वारित एफआईआर दर्ज करनी चाहिए।
पुलिस अधिकारी अधीनस्थों की मीटिंग में कहते हैं थानों पर आने वाले फरियादियों की शत-प्रतिशत एफआईआर दर्ज की जाए। अधीनस्त अधिकारी समेत थानाध्यक्ष आला अधिकारियों से एफआईआर दर्ज करने का कमेंटमेंट भी कर लेते हैँ। मगर थानों पर जब फरियादी पहुंचते हैं तो उन्हें जांच के बहाने टरका देते हैं।
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समस्या या अपराध कारित होने पर पीड़ित/फरियादी को थाने जाने की भी जहमत उठाने की जरुरत नहीं है। वह अपनी शिकायत आनलाइन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें यूपी पुलिस की साइट पर जाना होगा। आनलाइन शिकायतों को पुलिस को 24 घंटे के अंदरन निस्तारण करना होगा।
केस -एक
धानेपुर थाना क्षेत्र के रेतवागाड़ा ग्रामपंचायत के मिश्रनपुरवा गांव में 24 जुलाई की रात ओमप्रकाश मिश्र के यहां चोरी हुई। चोरी करने आए लोगों में एक व्यक्ति का झोला चोरी के दौरान पीड़ित के घर छूट गया। झोला देखकर परिवार वालों ने चोर की पहचान कर ली और आशंका जताते हुए मुकदमा दर्ज कराने के लिए थाने पर तहरीर दी लेकिन पुलिस ने जांच करने का आश्वासन देकर मुकदमा नहीं दर्ज किया। तभी से वह थाने से लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के चक्कर लगा रहा है।
केस-दो
कौड़िया थाना क्षेत्र के छिरास गांव की रहने वाली रंजना देवी पत्नी रंजीत कुमार शुक्ल का गांव के ही एक व्यक्ति से जमीन का विवाद चल रहा था। रंजना ने बताया कि 17 जून को गांव के चार लोग लाठी-डंडा व असलहा लेकर जबरन उसके घर में घुसकर उसके परिवार के लोगों को मारपीट कर घायल कर दिया। बवाल की सूचना पर थाने के एक दरोगा व दो सिपाही मौके पर पहुंचे। मगर पुलिसकर्मियों ने हमलावरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
केस तीन
बस्ती जनपद के पैकोलिया थाना क्षेत्र के लक्ष्मीबाईनगर वार्ड नंबर सात बभनान के रहने वाले सुनील कुमार ने बताया कि 24 जुलाई की सुबह वह बाइक से छपिया के जमुनहा बाजार जा रहा था। तभी जमुनहा बाजार के रहने वाले चार लोग वहां मिल गए और मारा-पीटा और बाइक पर लादकर मटेरिया गांव के पास गन्ने के खेत में ले जाकर बंधक बनाए रहे। मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने थाना छपिया पहुंचा तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की।
गोंडा के पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि जनपद के सभी 18 थानों के थानाध्यक्षों को थाने पर आने वाले फरियादियों/पीड़ितों की एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। महिला अपराध के मामले में तो कोताही बरतने वाले थानाध्यक्षों को कार्रवाई तक की चेतावनी दी गई है।
अगर महिला संबंधी अपराध में किसी भी थानाध्यक्ष ने एफआईआर दर्ज करने में लापरवाही बरती तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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थानों पर आने वाले फरियादियों/पीड़ितों की समस्या को सुनकर उसका त्वरित निस्तारण किया जाए। कुछेक मामलों में मौके पर जाकर जांच करनी चाहिए। इसके बाद एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। मगर अपराध कारित होने पर जैसे लूट, डकैती, चोरी, हमला, छेड़खानी व दुष्कर्म के मामलों में त्वारित एफआईआर दर्ज करनी चाहिए।
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पुलिस अधिकारी अधीनस्थों की मीटिंग में कहते हैं थानों पर आने वाले फरियादियों की शत-प्रतिशत एफआईआर दर्ज की जाए। अधीनस्त अधिकारी समेत थानाध्यक्ष आला अधिकारियों से एफआईआर दर्ज करने का कमेंटमेंट भी कर लेते हैँ। मगर थानों पर जब फरियादी पहुंचते हैं तो उन्हें जांच के बहाने टरका देते हैं।
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समस्या या अपराध कारित होने पर पीड़ित/फरियादी को थाने जाने की भी जहमत उठाने की जरुरत नहीं है। वह अपनी शिकायत आनलाइन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें यूपी पुलिस की साइट पर जाना होगा। आनलाइन शिकायतों को पुलिस को 24 घंटे के अंदरन निस्तारण करना होगा।
केस -एक
धानेपुर थाना क्षेत्र के रेतवागाड़ा ग्रामपंचायत के मिश्रनपुरवा गांव में 24 जुलाई की रात ओमप्रकाश मिश्र के यहां चोरी हुई। चोरी करने आए लोगों में एक व्यक्ति का झोला चोरी के दौरान पीड़ित के घर छूट गया। झोला देखकर परिवार वालों ने चोर की पहचान कर ली और आशंका जताते हुए मुकदमा दर्ज कराने के लिए थाने पर तहरीर दी लेकिन पुलिस ने जांच करने का आश्वासन देकर मुकदमा नहीं दर्ज किया। तभी से वह थाने से लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के चक्कर लगा रहा है।
केस-दो
कौड़िया थाना क्षेत्र के छिरास गांव की रहने वाली रंजना देवी पत्नी रंजीत कुमार शुक्ल का गांव के ही एक व्यक्ति से जमीन का विवाद चल रहा था। रंजना ने बताया कि 17 जून को गांव के चार लोग लाठी-डंडा व असलहा लेकर जबरन उसके घर में घुसकर उसके परिवार के लोगों को मारपीट कर घायल कर दिया। बवाल की सूचना पर थाने के एक दरोगा व दो सिपाही मौके पर पहुंचे। मगर पुलिसकर्मियों ने हमलावरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
केस तीन
बस्ती जनपद के पैकोलिया थाना क्षेत्र के लक्ष्मीबाईनगर वार्ड नंबर सात बभनान के रहने वाले सुनील कुमार ने बताया कि 24 जुलाई की सुबह वह बाइक से छपिया के जमुनहा बाजार जा रहा था। तभी जमुनहा बाजार के रहने वाले चार लोग वहां मिल गए और मारा-पीटा और बाइक पर लादकर मटेरिया गांव के पास गन्ने के खेत में ले जाकर बंधक बनाए रहे। मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने थाना छपिया पहुंचा तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की।
गोंडा के पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि जनपद के सभी 18 थानों के थानाध्यक्षों को थाने पर आने वाले फरियादियों/पीड़ितों की एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। महिला अपराध के मामले में तो कोताही बरतने वाले थानाध्यक्षों को कार्रवाई तक की चेतावनी दी गई है।
अगर महिला संबंधी अपराध में किसी भी थानाध्यक्ष ने एफआईआर दर्ज करने में लापरवाही बरती तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।