Sri Lanka: क्रिकेट की एक किताब क्यों बन गई है श्रीलंका की एक बड़ी उम्मीद?
ब्रुक्स ने अपनी किताब में 1996 के क्रिकेट विश्व कप की खास चर्चा की है, जिसकी मेजबानी भारत ने की थी। ब्रुक्स ने लिखा है- ‘1996 का विश्व कप सिर्फ श्रीलंका के लिए एक एतिहासिक मौका नहीं था, बल्कि कुल मिला कर यह क्रिकेट के लिए एक मोड़ साबित हुआ...
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अपने पर्यटन उद्योग में फिर से जान फूंकने की कोशिश में लगे श्रीलंका की उम्मीदें अब क्रिकेट की एक किताब पर टिक गई हैं। यह किताब ब्रिटिश लेखक निकोलस ब्रुक्स ने लिखी है। किताब ‘आईलैंड्स इलेवनः ए हिस्ट्री ऑफ क्रिकेट इन श्रीलंका’ नाम से लिखी गई है। श्रीलंकाई अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि इस किताब के कारण श्रीलंका में खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
ब्रुक्स ने इस किताब में श्रीलंकाई क्रिकेट का इतिहास लिखा है। इस किताब के प्रकाशन के मौके पर कोलंबो में हुए एक समारोह के दौरान ब्रुक्स ने कहा- ‘यह किताब श्रीलंकाई क्रिकेट की आत्मा की तलाश है। लेकिन मैं यहां सिर्फ क्रिकेट से अपने लगाव की वजह से नहीं आया। मैंने अपने भीतर श्रीलंका से गहरा लगाव महसूस किया है। श्रीलंका ताउम्र मेरी जिंदगी का एक हिस्सा बना रहेगा।’
श्रीलंका को टेस्ट क्रिकेट टीम का दर्जा पहली बार 1981 में मिला था। उसने विदेशी धरती पहली बार न्यूजीलैंड में टेस्ट मैच जीता। तब अर्जुन राणातुंगा श्रीलंकाई टीम के कप्तान थे। राणातुंगा की कप्तानी में ही श्रीलंका ने 1996 में पहली बार क्रिकेट विश्व कप जीता। उसके बाद श्रीलंका की टीम विश्व कप फाइनल में तो पहुंची, लेकिन कभी चैंपियन नहीं बन सकी है।
ब्रुक्स ने अपनी किताब में 1996 के क्रिकेट विश्व कप की खास चर्चा की है, जिसकी मेजबानी भारत ने की थी। ब्रुक्स ने लिखा है- ‘1996 का विश्व कप सिर्फ श्रीलंका के लिए एक एतिहासिक मौका नहीं था, बल्कि कुल मिला कर यह क्रिकेट के लिए एक मोड़ साबित हुआ। विक्टोरियन युग के अवशेष से आगे निकलते हुए यह खेल धन पैदा करने वाला एक बड़ा जरिया बन गया।’ ब्रुक्स ने लिखा है- ‘मेरी राय में श्रीलंका के लोगों में क्रिकेट के लिए जैसा जुनून, गर्व की भावना और खुशी देखने को मिलती है, वैसा दुनिया में कहीं और नहीं होता।’
श्रीलंका के पर्यटन प्रोत्साहन ब्यूरो के सहायक निदेशक सुरेशनी एलेपोला पिलापितिया ने वेबसाइट इकॉनमी नेक्स्ट से कहा- ‘यह किताब लोगों को श्रीलंका आने के लिए प्रेरित करेगी, जिससे हमारे यहां पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। इस किताब के श्रीलंका के क्रिकेट और अन्य खेलों के बारे में जानने में मदद भी मिलेगी।’
ब्रुक्स ने इसी वेबसाइट से कहा कि पर्यटन उद्योग गुजरे कई वर्षों से चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा- ‘इन चुनौतियों के बावजूद पर्यटकों को लुभाने की श्रीलंका की क्षमता में मुझे पूरा भरोसा है।’ श्रीलंका में इस वर्ष अप्रैल तक 4,41,177 विदेशी सैलानी आ चुके थे। पिछले वर्ष की तुलना में यह संख्या 62,980 अधिक रही। श्रीलंका को आशा है कि इस पूरे साल में 15 लाख विदेशी सैलानी श्रीलंका का भ्रमण करेंगे।
विश्लेषकों के मुताबिक अगर श्रीलंका अपने पर्यटन उद्योग को फिर से खड़ा कर पाया, तो आर्थिक संकट से उबरने में उसे बहुत मदद मिलेगी। दरअसल, श्रीलंका के गहरे आर्थिक संकट में फंसने का एक बड़ा कारण कोरोना लॉकडाउन के दौरान पर्यटन उद्योग का पूरी तरह ठप हो जाना था। इस कारण श्रीलंका के लिए विदेशी मुद्रा का एक बड़ा स्रोत सूख गया, जिससे उसके लिए आयात बिल चुकाना मुश्किल हो गया। इससे देश में जरूरी चीजों की कमी हो गई।