WI Inning
52/0 (6.2 ov)
Justin Greaves 33(23)*
John Campbell 15 (16)
IND elected to bowl
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सात पारियों में 383 रन...दो शतक: छा गए झारखंड के कुमार कुशाग्रा! रेड बॉल क्रिकेट में खुद को कैसे निखारा? जानें
Sun, 27 Sep 2026 08:44 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 27 Sep 2026 08:44 AM IST
सार
21 वर्षीय कुमार कुशाग्र ने घरेलू क्रिकेट में अलग-अलग प्रारूपों और परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालकर अपनी दावेदारी मजबूत की है। रणजी में दोहरा शतक, विजय हजारे में तेज पारी, सैयद मुश्ताक अली में नंबर-3 पर सफलता और दलीप ट्रॉफी व इंडिया-ए के लिए लगातार दो शतक उनके सफर की बड़ी उपलब्धियां हैं।
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कुशाग्र
- फोटो : ANI
विस्तार
कुमार कुशाग्र की उम्र अभी सिर्फ 21 साल है, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उन्होंने खुद को अलग-अलग परिस्थितियों और प्रारूपों में साबित करने की क्षमता दिखाई है। हाल ही में उन्होंने दलीप ट्रॉफी फाइनल में शतक लगाया और इसके बाद इंडिया-ए के लिए ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ भी सैकड़ा जड़ दिया। दो मैचों में दो शतक ने एक बार फिर उन्हें चर्चा में ला दिया है।
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कुशाग्र की कहानी सिर्फ इन दो शतकों तक सीमित नहीं है। कम उम्र में रणजी ट्रॉफी में दोहरा शतक लगाने से लेकर विजय हजारे ट्रॉफी में तेज पारी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में नंबर-3 पर बल्लेबाजी करने तक, उन्होंने घरेलू क्रिकेट का इस्तेमाल अपनी बल्लेबाजी को लगातार बेहतर बनाने के लिए किया है। आखिर उन्होंने खुद को कैसे साबित किया है? जानें पांच बड़ी वजहें।
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कुमार कुशाग्र की हालिया पारियों का रिकॉर्ड
| मैच | रन | तारीख | प्रारूप |
|---|---|---|---|
| भारत ए बनाम ऑस्ट्रेलिया ए | 113 और 46* | 22 सितंबर 2026 | प्रथम श्रेणी |
| ईस्ट जोन बनाम साउथ जोन | 101 और 46 | 6 सितंबर 2026 | प्रथम श्रेणी |
| ईस्ट जोन बनाम सेंट्रल जोन | 0 और 22 | 30 अगस्त 2026 | प्रथम श्रेणी |
| ईस्ट जोन बनाम नॉर्थ ईस्ट जोन | 55 | 23 अगस्त 2026 | प्रथम श्रेणी |
कुमार कुशाग्र
- फोटो : Twitter
1. कम उम्र में ही रणजी ट्रॉफी में दोहरा शतक
कुशाग्र ने बहुत कम उम्र में अपनी क्षमता का संकेत दे दिया था। वह सिर्फ 17 साल के थे, जब उन्होंने रणजी ट्रॉफी में दोहरा शतक लगाया। इसके साथ वह इस उपलब्धि तक पहुंचने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में शामिल हो गए। कम उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में बड़ी पारी खेलने से उन्हें लंबी पारियां खेलने और परिस्थितियों के मुताबिक बल्लेबाजी करने का अनुभव मिला।
कुशाग्र ने बहुत कम उम्र में अपनी क्षमता का संकेत दे दिया था। वह सिर्फ 17 साल के थे, जब उन्होंने रणजी ट्रॉफी में दोहरा शतक लगाया। इसके साथ वह इस उपलब्धि तक पहुंचने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में शामिल हो गए। कम उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में बड़ी पारी खेलने से उन्हें लंबी पारियां खेलने और परिस्थितियों के मुताबिक बल्लेबाजी करने का अनुभव मिला।
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कुमार कुशाग्र
- फोटो : Twitter
2. विजय हजारे में तेज बल्लेबाजी से आईपीएल स्काउट्स का ध्यान खींचा
19 साल की उम्र में कुशाग्र ने विजय हजारे ट्रॉफी में महाराष्ट्र के खिलाफ 356 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए नाबाद 67 रन बनाए। उन्होंने यह पारी सिर्फ 36 गेंदों में खेली। इस पारी ने आईपीएल स्काउट्स का ध्यान खींचा और यह दिखाया कि कुशाग्र जरूरत के मुताबिक तेजी से रन बनाने की क्षमता भी रखते हैं।
19 साल की उम्र में कुशाग्र ने विजय हजारे ट्रॉफी में महाराष्ट्र के खिलाफ 356 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए नाबाद 67 रन बनाए। उन्होंने यह पारी सिर्फ 36 गेंदों में खेली। इस पारी ने आईपीएल स्काउट्स का ध्यान खींचा और यह दिखाया कि कुशाग्र जरूरत के मुताबिक तेजी से रन बनाने की क्षमता भी रखते हैं।
कुमार कुशाग्र
- फोटो : Twitter
3. तीनों प्रारूपों में खुद को ढाला
कुशाग्र की सबसे बड़ी खासियतों में से एक अलग-अलग प्रारूपों की जरूरत के मुताबिक अपने बल्लेबाजी टेम्पो को बदलना रही है। पिछले सीजन सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में वह झारखंड के लिए नंबर-3 पर बल्लेबाजी करने आए और ईशान किशन के साथ पावरप्ले का अधिकतम फायदा उठाया। झारखंड ने इस टूर्नामेंट का खिताब भी जीता। दलीप ट्रॉफी फाइनल में भी उन्होंने अलग परिस्थिति में बल्लेबाजी की। चेपॉक की सपाट पिच पर ईशान किशन और शिखर मोहन की मजबूत शुरुआत के बाद उन्हें तेजी से रन बनाने का मौका मिला और उन्होंने शतक जड़ दिया। इसके विपरीत, ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ इंडिया-ए के लिए उन्हें कठिन परिस्थितियों में अपनी पारी को संभालना पड़ा।
कुशाग्र की सबसे बड़ी खासियतों में से एक अलग-अलग प्रारूपों की जरूरत के मुताबिक अपने बल्लेबाजी टेम्पो को बदलना रही है। पिछले सीजन सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में वह झारखंड के लिए नंबर-3 पर बल्लेबाजी करने आए और ईशान किशन के साथ पावरप्ले का अधिकतम फायदा उठाया। झारखंड ने इस टूर्नामेंट का खिताब भी जीता। दलीप ट्रॉफी फाइनल में भी उन्होंने अलग परिस्थिति में बल्लेबाजी की। चेपॉक की सपाट पिच पर ईशान किशन और शिखर मोहन की मजबूत शुरुआत के बाद उन्हें तेजी से रन बनाने का मौका मिला और उन्होंने शतक जड़ दिया। इसके विपरीत, ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ इंडिया-ए के लिए उन्हें कठिन परिस्थितियों में अपनी पारी को संभालना पड़ा।
कुमार कुशाग्र
- फोटो : Twitter
4. मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य दिखाकर बनाया शतक
ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ पुडुचेरी में कुशाग्र के लिए परिस्थितियां आसान नहीं थीं। पहले दिन वह 82 रन पर ऐंठन के कारण रिटायर्ड हर्ट हो गए। उन्हें मैदान पर कई बार उपचार लेना पड़ा और वह इतना ज्यादा क्रैंप कर रहे थे कि बल्ला तक नहीं पकड़ पा रहे थे। दूसरे दिन वह दोबारा बल्लेबाजी के लिए लौटे और अपना शतक पूरा किया।
ऑस्ट्रेलिया-ए के गेंदबाज ब्रेंडन डोगेट और फर्गस ओ'नील पुरानी गेंद को रिवर्स कर रहे थे। पिच पर उछाल भी एक जैसा नहीं था। इसके बावजूद कुशाग्र ने अनावश्यक जोखिम लेने से बचते हुए अपनी पारी को आगे बढ़ाया। उन्होंने अर्धशतक पूरा करने के बाद अपनी गति बढ़ाई और पार्ट-टाइम लेग स्पिनर जेसन सांघा के खिलाफ लगातार बाउंड्री लगाईं। कुल मिलाकर उन्होंने सांघा के खिलाफ 23 गेंदों में 17 रन बनाए। यानी एक ही बल्लेबाज ने परिस्थितियों के हिसाब से अपनी गति बदली और यही उनकी बल्लेबाजी में आए बदलाव को दिखाता है।
ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ पुडुचेरी में कुशाग्र के लिए परिस्थितियां आसान नहीं थीं। पहले दिन वह 82 रन पर ऐंठन के कारण रिटायर्ड हर्ट हो गए। उन्हें मैदान पर कई बार उपचार लेना पड़ा और वह इतना ज्यादा क्रैंप कर रहे थे कि बल्ला तक नहीं पकड़ पा रहे थे। दूसरे दिन वह दोबारा बल्लेबाजी के लिए लौटे और अपना शतक पूरा किया।
ऑस्ट्रेलिया-ए के गेंदबाज ब्रेंडन डोगेट और फर्गस ओ'नील पुरानी गेंद को रिवर्स कर रहे थे। पिच पर उछाल भी एक जैसा नहीं था। इसके बावजूद कुशाग्र ने अनावश्यक जोखिम लेने से बचते हुए अपनी पारी को आगे बढ़ाया। उन्होंने अर्धशतक पूरा करने के बाद अपनी गति बढ़ाई और पार्ट-टाइम लेग स्पिनर जेसन सांघा के खिलाफ लगातार बाउंड्री लगाईं। कुल मिलाकर उन्होंने सांघा के खिलाफ 23 गेंदों में 17 रन बनाए। यानी एक ही बल्लेबाज ने परिस्थितियों के हिसाब से अपनी गति बदली और यही उनकी बल्लेबाजी में आए बदलाव को दिखाता है।
कुमार कुशाग्र
- फोटो : Twitter
5. घरेलू प्रदर्शन को इंडिया-ए के मौके में बदला
घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन का नतीजा उन्हें इंडिया-ए टीम में जगह मिलने के रूप में मिला। दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन के लिए शतक के बाद ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ इंडिया-ए के लिए भी उन्होंने शतक लगाया। झारखंड के मुख्य कोच रतन कुमार ने भी कुशाग्र की प्रगति को करीब से देखा है। उन्होंने बताया कि टीम का लक्ष्य कुशाग्र से तीनों प्रारूपों में रन बनवाना था।
घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन का नतीजा उन्हें इंडिया-ए टीम में जगह मिलने के रूप में मिला। दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन के लिए शतक के बाद ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ इंडिया-ए के लिए भी उन्होंने शतक लगाया। झारखंड के मुख्य कोच रतन कुमार ने भी कुशाग्र की प्रगति को करीब से देखा है। उन्होंने बताया कि टीम का लक्ष्य कुशाग्र से तीनों प्रारूपों में रन बनवाना था।
कुमार कुशाग्र
- फोटो : Twitter
कुमार ने कहा, 'जब मैंने पिछले साल झारखंड की सीनियर टीम के मुख्य कोच का पद संभाला, तो हमारा प्राथमिक लक्ष्य स्पष्ट था: कुशाग्र में प्रतिभा थी, लेकिन हमें तीनों प्रारूपों में उससे रन चाहिए थे। हमने इस पर काफी ध्यान दिया और उसने पिछले सीजन में तीनों प्रारूपों में करीब 1500 रन बनाकर खुद को साबित किया। इसके बाद तो उसके लिए आसमान ही सीमा रहा। उसने इंडिया-ए में जगह बनाई, श्रीलंका का शानदार दौरा किया और हम चाहते हैं कि वह आगे बढ़े और सीनियर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करे।'
कुमार कुशाग्र
- फोटो : Twitter
घरेलू क्रिकेट ने कुशाग्र को क्या दिया?
कुशाग्र के पिछले कुछ वर्षों के सफर को देखें तो घरेलू क्रिकेट उनके लिए सिर्फ रन बनाने का मंच नहीं रहा। रणजी ट्रॉफी में लंबी पारी खेलने की क्षमता, विजय हजारे में तेज बल्लेबाजी, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी और दलीप ट्रॉफी व इंडिया-ए में अलग-अलग परिस्थितियों में शतक, इन सबने उनकी बल्लेबाजी को ज्यादा बहुआयामी बनाया है। वह अभी सीनियर भारतीय टीम से काफी दूर हैं, लेकिन दलीप ट्रॉफी फाइनल और ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ लगातार दो शतक लगाकर उन्होंने अक्टूबर-नवंबर में न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली अनऑफिशियल टेस्ट सीरीज के लिए इंडिया-ए टीम में अपनी दावेदारी जरूर मजबूत की है।
कुशाग्र के पिछले कुछ वर्षों के सफर को देखें तो घरेलू क्रिकेट उनके लिए सिर्फ रन बनाने का मंच नहीं रहा। रणजी ट्रॉफी में लंबी पारी खेलने की क्षमता, विजय हजारे में तेज बल्लेबाजी, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी और दलीप ट्रॉफी व इंडिया-ए में अलग-अलग परिस्थितियों में शतक, इन सबने उनकी बल्लेबाजी को ज्यादा बहुआयामी बनाया है। वह अभी सीनियर भारतीय टीम से काफी दूर हैं, लेकिन दलीप ट्रॉफी फाइनल और ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ लगातार दो शतक लगाकर उन्होंने अक्टूबर-नवंबर में न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली अनऑफिशियल टेस्ट सीरीज के लिए इंडिया-ए टीम में अपनी दावेदारी जरूर मजबूत की है।