...अब गुरु ग्रेग पर भज्जी और जहीर का हमला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर द्वारा अपनी आत्मकथा ‘प्लेइंग इट माइ वे’ मेंभारत के पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कोच ग्रेग चैपल को रिंग मास्टर बताने के बाद अब दिग्गज ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह और तेज गेंदबाज जहीर खान ने भी गुरू ग्रेग पर तीखे हमले किए हैं।
खासतौर पर हरभजन ने चैपल पर कई आरोप लगाए हैं और कहा है कि टीम के उनके ही कुछ साथी खिलाड़ी कोच को गलत जानकारियां देते थे। इससे पहले पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भी सचिन के आरोपों को समर्थन किया था।
2005 से 2007 तक भारतीय टीम के कोच रहने वाले चैपल के खिलाफ आने वाले दिनों में टीम इंडिया के और भी खिलाड़ी चौंकाने वाले खुलासे कर सकते हैं।
हरभजन ने कहा कि उनकी टीम के कुछ साथी खिलाड़ी कोच चैपल को गलत जानकारियां दी थीं, जिसका नतीजा भारतीय क्रिकेट के लिए काफी बुरा रहा था। भज्जी ने कहा, ‘चैपल ने भारतीय क्रिकेट क्रिकेट का इतना नुकसान किया कि उसे वापस पटरी पर आने में करीब तीन साल लग गए। सबसे बुरी बात यह थी कि टीम के कुछ खिलाड़ी ऐसे थे जिन्होंने चैपल को गलत जानकारियां दी जिसने टीम को तोड़ने का काम शुरू किया।’
जब भज्जी से पूछा गया कि चैपल को गलत जानकारियां देने वाले खिलाड़ी कौन थे तो उन्होंने कहा, ‘जब सही समय आएगा तब मैं उन नामों का खुलासा करूंगा। कुछ खिलाड़ियों ने यह सोचा था कि चैपल का साथ देकर उन्हें फायदा मिलेगा लेकिन उन्होंने यह महसूस नहीं किया कि भारतीय क्रिकेट कहां जा रहा है।’
बोर्ड से की थी गांगुली की शिकायत
हरभजन ने कहा कि बुलावायो में जिम्बाब्वे के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान ही कोच चैपल कप्तान सौरव गांगुली की बीसीसीआई के खिलाफ एक ई-मेल के जरिए शिकायत कर रहे थे।
भज्जी ने कहा, ‘सौरव उस समय बल्लेबाजी कर रहे थे और चैपल उनके खिलाफ एक शिकायती ई-मेल करने में व्यस्त थे, वो भी ड्रेसिंगरूम के अंदर। उन्हें टेस्ट मैच में कोई दिलचस्पी नहीं थी। मुझे इस बारे में कैसे पता चला? मैं उनके पास जाकर बैठ गया और मुझे शक भी था। इस दौरान जब वह बॉशरूम गए, तो मैंने उनके खुले हुए लैपटॉप में थोड़ी ताकझांक थी। वह ई-मेल खुला हुआ था और जब मैंने उसे पढ़ा तो मैं हैरान रह गया। जब गांगुली वापस आए तो मैंने उन्हें इस बारे में बताया, तो वह भी हैरान रह गए।’
इस बीच हरभजन ने कहा कि वह कोच चैपल के निशाने पर थे। उनके अलावा सौरव गांगुली, वीरेंद्र सहवाग, आशीष नेहरा, जहीर खान और युवराज सिंह भी उनके निशाने पर थे।
साथ ही उन्होंने कहा कि चैपल के समय में एक ऐसा दौर आया जब हम अंडर-14 टीम की तरह खेल रहे थे। यह वो समय था जब विदेशी दौरों पर खिलाड़ी आपस में एक-दूसरे से अपनी बात साझा करने से डरने लगे थे क्योंकि हमें एक-दूसरे पर भरोसा नहीं था।
मेरा कैरियर बर्बाद करना चाहते थे चैपल : जहीर
तेज गेंदबाज जहीर खान ने भी ग्रैग चैपल के बारे पर अपना कैरियर बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 2005 में जब वह भारतीय टीम के कोच बने तो उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं जब तक कोच हूं तुम भारत के लिए नहीं खेलोगे।
जहीर ने कहा, ‘भारतीय टीम क कोच नियुक्त होने के बाद वह मेरे पास आए बोले, जहीर जब तक मैं कोच हूं तुम भारत के लिए नहीं खेल सकोगे। मैं उस समय कोई प्रतिक्रिया नहीं कर सका। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं और क्या न करूं। वह मेरा कैरियर बर्बाद करना चाहते थे।’
पूर्व भारतीय कोच ग्रेग चैपल ने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर द्वारा अपनी आत्मकथा ‘प्लेइंग इट माइ वे’ में उनपर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
चैपल ने कहा, ‘मैं वाक युद्ध में नहीं पड़ना चाहता। हालांकि मैं यह साफतौर पर कहना चाहता हूं कि भारतीय टीम के कोच के रूप में मेरी भूमिका के दौरान मैंने कभी सचिन को द्रविड़ की जगह कप्तान बनने के लिए नहीं कहा। मैं किताब में किए गए इस तरह के दावे को पढ़कर बेहद हैरान हूं। अपने कार्यकाल के दौरान में सिर्फ एक बार सचिन के घर गया था, जब वह चोट से ठीक हो रहे थे। इस दौरान टीम फिजियो और सहायक कोच मेरे साथ थे। यह घटना किताब में बताई गई घटना से करीब 12 महीने पहले की है। हमने अच्छा समय साथ बिताया और उस दौरान कप्तानी को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी।’
लक्ष्मण को भी सचिन की बातों का भरोसा
पूर्व बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण ने ग्रेग चैपल पर बरसते हुए कहा कि कोच के तौर पर वह भारतीय क्रिकेट को करीब दो साल पीछे ले गए। साथ ही उन्होंने कहा कि सचिन तेंदुलकर ने अपनी आत्मकथा में चैपल के बारे में जो भी लिखा, उन्हें उसपर पूरा विश्वास है।
सचिन ने लिखा कि चैपल ने लक्ष्मण द्वारा टेस्ट मैच में ओपनिंग करने से मना करने पर उनका कैरियर खत्म करने की धमकी दी थी।
लक्ष्मण ने कहा, ‘यह 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ वानखेड़े में हुए टेस्ट मैच की बात है। युवराज सिंह को मेरे ऊपर वरीयता दी गई। इस सीरीज के बाद हमें वेस्टइंडीज में चार टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने के लिए जाना था। चैपल ने मुझसे ओपनिंग करने के लिए कहा। शुरुआती चार सालों में नाकाम रहने के बाद मैंने 2000 में ही फैसला कर लिया था कि मैं कभी ओपनिंग नहीं करूंगा। मैं साल 2000 से ही मध्यक्रम पर अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। चैपल ने मुझसे मेरी उम्र पूछी और कहा कि क्या तुम्हें नहीं लगता कि 31 साल की उम्र घर बैठने के लिए बहुत कम है। यह सुनकर मैं हैरान रह गया।’
‘सचिन ने सच ही कहा होगा। उन्होंने दिल से अपने अनुभव बताए हैं। भारत को इसे सकारात्मकता से लेना चाहिए और यह तय करना चाहिए कि फिर कभी कोच नियुक्त करके हुए वह ऐसी गलती न दोहराए। चैपल अब भारतीय टीम के कोच नहीं हैं। ऐसे में इन बातों को विवाद बनाने का कोई मतलब नहीं है।’, - मुथैया मुरलीधरन, पूर्व स्पिनर, श्रीलंका।