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युवराज की किताब में कैंसर की कहानी

Tue, 19 Mar 2013 06:23 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 19 Mar 2013 06:23 PM IST
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yuvraj singh memoir the test of my life set for online auction

टीम इंडिया के क्रिकेटर युवराज सिंह ने अपनी किताब 'द टेस्ट ऑफ माइ लाइफ' में अपने कैंसर के पलों की कहानी को बयां किया है।

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मंगलवार को लांच हुई इस किताब में युवी ने विस्तार से बताया है कि कैंसर के दौरान उन्हें किन परेशानियों से जूझना पड़ा। साथ ही इस बीमारी से उबरने के बाद उनकी जिंदगी में क्या-क्या बदलाव हुए हैं।
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मालूम हो कि 2012 की शुरुआत में युवराज के कैंसर पता चला था। अमेरिका के बोस्टन शहर में लंबी उपचार प्रक्रिया के बाद युवराज पिछले साल सितंबर में दोबारा मैदान पर लौटे थे।
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बीमारी में सीना ठोक कर खड़े रहें
किताब में युवी ने लिखा है, 'जब आप बीमार होते हैं, जब आप पूरी तरह निराश होने लगते हैं, तो कुछ सवाल एक भयावह सपने की तरह बार बार आपको सता सकते हैं, लेकिन आपको सीना ठोक कर खड़ा होना चाहिए और इन मुश्किल सवालों का सामना करना चाहिए।'

डरें नहीं, लड़ें
युवी लिखते हैं कि इस देश में करीब 50 लाख कैंसर मरीज हैं, लेकिन जहां तक किसी सेलिब्रिटी का सवाल है तो मुझे अभिनेत्री नरगिस का नाम याद आता है।

टीम इंडिया को 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप जिताने में अहम रोल निभाने वाले युवराज लिखते हैं, 'खूबसूरत नरगिस दत्त के कैंसर से ग्रस्त होने के बाद देश में क्या मैं पहला व्यक्ति था जिसे ये बीमारी हुई? मुझे ऐसा नहीं लगता, हो सकता है कि शायद मैं भारत में पहला ऐसा व्यक्ति हूं जिसे कैंसर के साथ जीने और इसके बारे में बात करने, इसे अपनाने, इसकी वजह से बाल चले जाने और इससे लड़ने से डर नहीं लगता है।'

युवी ने किताब में लिखा है 'जब मुझे कैंसर के बारे में पता चला तो मुझे थोड़ी घबराहट हुई। लेकिन मैंने अपने मन को समझाया और हिम्मत के साथ स्वीकारा कि मुझे कैंसर है।'


yuvraj singh आर्मस्ट्रांग की किताब ने दी हिम्मत

किताब में युवराज ने लिखा है, 'जब मैंने कैंसर को जंग में हरा दिया तो मुझे हमेशा इस बात की चिंता सताती थी कि क्या मैं कभी दोबारा क्रिकेट खेल पाउंगा। ऐसे समय में मशहूर साइक्लिस्ट लांस आर्मस्ट्रांग की किताब ‘It’s Not About The Bike’ ने मुझे हिम्मत दी।'

पीड़ितों का बांटे दर्द
कैंसर पीड़ितों के अकेलेपन पर भी युवराज ने किताब में प्रकाश डाला है। वे लिखते हैं, 'जिस तरह हम अपनी जीत और सुख को दूसरों के साथ बांटते हैं, उसी तरह हमें अपना दुख भी साझा चाहिए ताकि जो और लोग दुख झेल रहे हों, वो भी महसूस कर सकें कि वो अकेले नहीं हैं। अगर अपनी कहानी बता कर मैं किसी एक व्यक्ति की भी मदद कर पाऊं, तो मुझे खुशी होगी। ठीक वैसे ही जैसे लांस आर्मस्ट्रांग की कैंसर की कहानी ने मेरी मदद की थी।'

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