कौन हैं 404 रन बनाने वाले प्रखर: मां वैज्ञानिक-पिता सॉफ्टवेयर इंजीनियर, पर क्रिकेट के लिए रोज 160 किमी चलते थे
404 रन की पारी के साथ प्रखर ने युवराज सिंह का 24 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा है। हालांकि, विजय जोल का रिकॉर्ड वह नहीं तोड़ पाए। अब प्रखर को कर्नाटक की सीनियर टीम में मौका मिल सकता है।
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चतुर्वेदी ने फाइनल मैच में पारी की शुरुआत की और अंत तक नाबाद रहे। उन्होंने 638 गेंदों का सामना किया। इसमें 46 चौके लगाए और तीन छक्के भी जड़े। इस पारी के बाद उन्हें सीधे कर्नाटक की रणजी टीम में जगह मिल सकती है। हालांकि, अब तक का सफर उनके लिए इतना भी आसान नहीं रहा है।
बेंगलुरू में रहने वाले प्रखर चतुर्वेदी के पिता सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उनकी मां डीआरडीओ में वैज्ञानिक हैं। ऐसे में उनके ऊपर पढ़ाई में भी अच्छा करने का दबाव था। इस वजह से वह पढ़ाई पर भी उतना ही ध्यान देते हैं, जिनता कि क्रिकेट पर। हालांकि, उनके कोच का मानना है कि यह चीज उनके पक्ष में काम करती है। उनके कोच का कहना है कि वह पर लड़के के माता-पिता से कहते हैं कि क्रिकेट के साथ पढ़ाई भी जारी रखें। पूरे दिन प्रैक्टिस करने का फायदा मिलता है, लेकिन जो लड़के सिर्फ क्रिकेट पर ध्यान लगाते हैं। उनके ऊपर लगातार अच्छा करने का बहुत दबाव होता है।
𝙍𝙀𝘾𝙊𝙍𝘿 𝘼𝙇𝙀𝙍𝙏! 🚨
4⃣0⃣4⃣* runs
6⃣3⃣8⃣ balls
4⃣6⃣ fours
3⃣ sixes
Karnataka's Prakhar Chaturvedi becomes the first player to score 400 in the final of #CoochBehar Trophy with his splendid 404* knock against Mumbai.
Scorecard ▶️ https://t.co/jzFOEZCVRs@kscaofficial1 pic.twitter.com/GMLDxp4MYY— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) January 15, 2024
ऐसे में अगर दो पारियों में रन नहीं बनते या दो टूर्नामेंट खराब हो जाते हैं या फिर अंडर-19 टीम में चयन नहीं होता तो लड़के तनाव झेल नहीं पाते और बिखर जाते हैं। प्रखर के मामले में ऐसा नहीं हुआ। देश की अंडर-19 टीम में उनका चयन नहीं हुआ, लेकिन वह पहले की तरह अभ्यास करते रहे। वह कुछ पारियों में फेल हुए, लेकिन इसका असर उन पर नहीं पड़ा और अब उन्होंने उस मैच में सबसे बड़ी पारी खेली है, जो सबसे अहम था।
वैज्ञानिक मां और इंजीनियर पिता के कारण प्रखर के लिए पढ़ाई करना जरूरी था, लेकिन क्रिकेट खेलना जरूरी नहीं था। हालांकि, यह खेल के प्रति उनका जुनून ही था, जो वह रोज अपने घर से 80 किलोमीटर दूर अभ्यास के लिए आते थे। रोज 160 किलोमीटर चलने के बावजूद वह क्रिकेट के प्रति पूरे जी जान से लगे हुए थे। ऐसे में उनके कोच को कहने पर माता-पिता ने घर में थ्रोडाउन की व्यवस्था कर दी। इससे उनका आने-जाने का समय बचने लगा। वह घर पर अभ्यास करते हैं और छु्ट्टी होने पर एकेडमी आते हैं और यहीं रुककर अभ्यास करते हैं।
2017 में एकेडमी में अपना अभ्यास शुरू करने वाले प्रखर मानसिक रूप से बेहद मजबूत हैं। अंडर-16 और अंडर-19 टीम में चयन नहीं होने के बावजूद उन्होंने जो समझदारी दिखाई। उससे पता चलता है कि वह कितने परिपक्व हैं। उनके कोच ने कहा कि 404 रन की पारी के बाद उनके अंदर यह आत्मविश्वास होगा कि वह इस स्तर पर खेलने के हकदार हैं। उन्होंने आगे बताया कि प्रखर अपना कमाल दिखा चुके हैं, लेकिन अभी ध्रुव प्रभाकर, आदित्य समर्थ, समित द्रविड़, युवराज अरोड़ा जैसे अन्य खिलाड़ी हैं, जो आने वाले समय में कमाल कर सकते हैं। इनके इतर भी एकेडमी में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं।