लॉर्ड्स में जब चंद घंटों में गिर गए कुल 27 विकेट
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क्रिकेट मुकाबलों में आपने ज्यादातर मौकों पर बल्लेबाजों को मैच में हावी होते देखा होगा। लेकिन कभी-कभी हालात इसके उलट हो जाते हैं और गेंदबाज हावी हो जाते हैं बल्लेबाजों पर।
गेंदबाज जब भी हावी होते हैं तो मुकाबला कांटे का हो जाता है क्योंकि मैच में बहुत कम रन बने होते हैं और जिस भी टीम के बल्लेबाज टिककर खेलेंगे उन्हीं की टीम मैच में जीत हासिल करती है।
आपने ताबड़तोड़ अंदाज में विकेटों के गिरने की खबरें कई बार पढ़ी या सुनी होगी। लेकिन क्या आज अंदाजा लगा सकते हैं कि विकेटों के गिरने का सबसे तेज सिलसिला कब हुआ होगा और कितना तेज रहा होगा?
मैदान पर टेस्ट मैच के दौरान महज कुछ घंटों के अंदर 10, 12 या 15 नहीं बल्कि कुल 27 विकेट गिर गए थे। यह कोई साधारण मैच नहीं था, यह टेस्ट मैच था और लॉर्ड्स में इंग्लैंड तथा ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जा रहा था।
नाटकीय मोड़ वाले टेस्ट में 29 बल्लेबाज दहाई भी नहीं कर सके
इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट मैच हो तो क्रिकेट प्रशंसकों में मैच को लेकर उत्साह अचानक बढ़ जाता है। क्रिकेट मैदान पर इन दोनों टीमों के बीच मुकाबले पर सभी की निगाहें होती हैं।
दोनों के बीच प्रतिष्ठित एशेज सीरीज भी खेली जाती है जिसे न सिर्फ इन दोनों टीमों के प्रशंसक चाव से देखते हैं बल्कि दुनियाभर में फैले क्रिकेट के दीवाने भी इस मैच पर नजर रखते हैं।
इन दोनों टीमों के बीच आज से करीब 127 साल पहले ऐतिहासिक लॉर्ड्स के मैदान पर टेस्ट मैच खेला गया जिसमें देखते ही देखते 4 घंटों में कुल 27 विकेट गिर गए।
मैच के पहले दिन के शुरुआत में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। लेकिन इसके बाद विकेट ने अचानक अपना व्यवहार बदला लिया और एक के बाद एक करके विकेट गिरते चले गए।
पहले दिन का खेल बारिश से बाधित होने से पहले 3 घंटे के अंदर 13 विकेट गिर चुके थे लेकिन अगले दिन का खेल जब शुरू हुआ तो इंग्लैंड ने अपनी पारी 3 विकेट पर 18 रन से आगे खेलना शुरू किया तो उसके अंतिम 7 विकेट महज 35 रन ही जोड़कर आउट हो गए। इस तरह से इंग्लैंड पहली पारी में 53 रन ही बना सका। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 116 रन बनाए थे।
फिर ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम 60 रन बनाकर आउट हो गई। इंग्लैंड को जीत के लिए 124 रनों का लक्ष्य मिला लेकिन मेजबान टीम सिर्फ 62 रन बनाकर आउट हो गई और मेहमान टीम ने यह मैच 61 रन से जीत लिया।
पहले दिन के खेल में बारिश के बाधा डालने के बाद पिच को ढका नहीं गया और ऐसे ही छोड़ दिया गया जो अगले दिन बल्लेबाजों के लिए कब्रगाह जैसा बन गया। बल्लेबाज आते और विकेट गंवाकर वापस चले जाते।
इस नाटकीय मोड़ वाले मैच में दोनों टीमों की ओर से 40 में से उतरे 29 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके। जबकि 8 बल्लेबाज अपना खाता भी नहीं खोल सके।