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टीम इंडिया के तेज गेंदबाज ने क्रिकेट को कहा अलविदा, कई साल से थे इस समस्या से परेशान
Thu, 14 Mar 2019 01:18 PM IST
अभिषेक निगम
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: अभिषेक निगम
Updated Thu, 14 Mar 2019 01:18 PM IST
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वीआरवी सिंह
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टीम इंडिया के तेज गेंदबाज वीआरवी सिंह ने आखिरकार क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया है। सिंह का करियर चोटों से प्रभावित रहा। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 2006 में अपना वन-डे करियर का आगाज किया। वीआरवी सिंह ने टीम इंडिया के लिए दो वन-डे खेले। उन्होंने दोनों वन-डे इंग्लैंड के खिलाफ क्रमश: जमशेदपुर और इंदौर में खेले।
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2006 में ही वीआरवी सिंह ने टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ सेंट जोंस में पहला टेस्ट खेला। तेज गेंदबाज ने क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप में चार मुकाबले और खेले। 2007 में बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था। वीआरवी सिंह का करियर चोटों और खराब फॉर्म से प्रभावित रहा।
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याद हो कि वीआरवी सिंह ने 2008 और 2010 में आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने 19 आईपीएल में 12 विकेट झटके। इसके अलावा उन्होंने अपना अंतिम प्रथम श्रेणी मैच 2014 में राज्य टीम पंजाब के लिए खेला। वीआरवी सिंह को भारत का काफी प्रतिभावान क्रिकेटर माना जाता था। वह तेज गेंदें डालते थे और बल्लेबाजी भी करते थे।
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वीआरवी सिंह ने सिर्फ 20 साल की उम्र में पंजाब के लिए प्रथम श्रेणी डेब्यू किया था। हालांकि, वह उच्च स्तर पर मौके का फायदा नहीं उठा सके। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुल 7 मैच खेले, जिसमें आठ विकेट चटकाए।
क्रिकइंफो के हवाले से सिंह ने कहा, 'मैंने वापसी करने की बहुत कोशिश की। मगर मेरी एड़ी नहीं बल्कि पीठ समस्या से ज्यादा परेशान किया। आप अपने शरीर को मूर्ख नहीं बना सकते। मेरी सर्जरी हुई, रिहैब हुए। 2014 के बाद तो मैंने कुछ साल खेला ही नहीं। मगर मैंने ट्रेनिंग की और 2018 में खेलने का प्रयास किया। मगर मैं नहीं खेल पाया, इसलिए अपने भविष्य के बारे में सोचना शुरू किया।'
उन्होंने आगे कहा, 'यह एक रात में लिया गया फैसला नहीं है। युवी ने मुझे काफी प्रोत्साहित किया। पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन ने भी मेरा काफी साथ दिया, मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। मगर दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हुआ। मुझे लगा कि संन्यास ले लेना चाहिए और सोचना चाहिए कि आगे क्या करना है।'