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विराट पर बस यही कहूंगा, जिंदगी का सफर, है ये कैसा सफर, कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं ...

Fri, 19 Jan 2018 08:39 AM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 19 Jan 2018 08:39 AM IST
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Virat Kohli Bags ICC ODI Cricketer of 2017 and Sir Garfield Sobers Trophy
विराट कोहली

टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली के गुरुवार को वर्ष 2017 के आईसीसी के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर चुने पर सर गारफील्ड सोबर्स ट्रॉफी जीतने, आईसीसी का साल का सर्वश्रेष्ठ वन डे क्रिकेटर चुने जाने के साथ आईसीसी की टेस्ट और वन डे टीम का कप्तान चुने को देश के पूर्व टेस्ट स्पिनर मनिंदर सिंह उनकी पिछले साल बतौर बल्लेबाज और कप्तान दिखाई प्रतिबद्धता का इनाम बताते हैं । 

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मनिंदर कहते हैं कि पिछले साल की कामयाबी पर आईसीसी के सम्मान और दक्षिण अफ्रीका में उसके खिलाफ दूसरे टेस्ट में की पहली पारी में सेंचुरी जड़ने के बावजूद टीम इंडिया को हार से बचा पाने की विराट कोहली की नाकामी पर उनके मुंह ये पंक्तियां खुद निकल आती हैं 'जिंदगी का सफर, है ये कैसा सफर, कोई समझा नहीं कोई जाना नहीं...'।
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मनिंदर ने 'अमर उजाला' से बातचीत में कहा, 'विराट कोहली ने बतौर बल्लेबाज और कप्तान जिस प्रतिबद्बता से टीम इंडिया के लिए बल्लेबाजी की और उससे ही वह 2017 के साल आईसीसी के सालाना पुरस्कारों में छा गए। जो लोग 2017 की विराट की इस कामयाबी को कमतर आंक यह कह कर उनकीआलोचना कर रहे हैं कि बीते बरस उन्होंने अपने सबसे ज्यादा रन भारत की पिचों पर ही बटोरे थे तो उनसे मैं यही कहूंगा कि भई टीम में बाकी और दस और खिलाड़ी भी तो फिर उनके बल्ले से इतने रन क्यों नहीं बरसे। 
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मनिंदर ने कहा कि इस साल के शुरू में भारतीय टीम भले ही दक्षिण अफ्रीका से उसकी धरती पर तीन टेस्ट मैचों की सीरीज के शुरू के दो टेस्ट हार कर सीरीज हार गई लेकिन कप्तान विराट कोहली ने सेंचुरियन में दूसरे टेस्ट की पहली पारी में उस पिच पर 153 रन की बेजोड़ पारी खेली जिस पर ऐसी तेज पिचों पर खेलने के माहिर मेजबान टीम के बल्लेबाजों में एक भी सेंचुरी नहीं जड़ पाया। 

Virat Kohli Bags ICC ODI Cricketer of 2017 and Sir Garfield Sobers Trophy
मनिंदर सिंह

टीम इंडिया के पूर्व टेस्ट स्पिनर मनिंदर सिंह ने कहा कि विराट जैसी प्रतिबद्बता बल्ले से यदि दो और बल्लेबाजों ने दिखाई होती तो भारत की टीम दक्षिण अफ्रीका से दोनों टेस्ट हारने की बजाय जीत कर टेस्ट सीरीज 2-0 की बढ़त लेकर अपने नाम कर सकती थी। लोग चेतेश्वर पुजारा को 'दीवार' कह कर उनकी राहुल द्रविड़ से तुलना करते हैं। उछाल वाली पिचों पर पुजारा कमर तक उठती गेंदों पर बगले झांकते नजर आते हैं।

अगर पुजारा को द्रविड़ की तरह वाकई टीम इंडिया की 'दीवार' बनना है तो फिर उनकी तरह विदेशी धरती पर उछाल भरी पिचों पर रन बनाने होंगे। यंग हार्दिक पांडया की अभी से महान आलराउंडर कपिल देव से तुलना बेमानी है। कपिल देव बतौर टेस्ट ऑलराउंडर राजा थे उन जैसा बनने के लिए पांडया को उन जैसी एकाग्रता लानी होगी।

वह कहते है, ‘विराट कोहली के खासतौर पर दूसरे टेस्ट में टीम संयोजन या फिर कहिए अंतिम एकादश के चयन को लेकर बहुत आलोचना हो रही है। खासतौर पर अजिंक्य रहाणे पर रोहित शर्मा को तवज्जो देने पर। टेस्ट के लिए रहाणे निश्चित रूप से रोहित से बेहतर हैं। रहाणे दक्षिण अफ्रीका में कामयाब रहते या नहीं यह तो कोई नहीं कह सकता, लेकिन इसकी संभावना जरूर ज्यादा होती। अतीत में राहुल द्रविड़, सचिन तेंडुलकर, वीरेन्द्र सहवाग और वीवीएस लक्ष्मण ऐसे बल्लेबाज थे जो दुनिया की  किसी भी मुश्किल पिच पर खुद को बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करना जानते थे और ये सभी विदेशी पिचों पर भी कामयाब रहे।'

Virat Kohli Bags ICC ODI Cricketer of 2017 and Sir Garfield Sobers Trophy
विराट कोहली - फोटो : File

उन्होंने कहा, 'भारत की मौजूदा टीम में खुद को विदेश में मुश्किल पिच पर प्रेरित करना केवल कप्तान विराट कोहली जानते हैं। रोहित की बाबत तो मैं यही कहूंगा कि उनके प्रदर्शन से यही लगता है कि  मानों वह यह मानते हैं कि वहतभी रन बनाएंगेजब उन्हें मनमाफिक पिच मिलेगी। रोहित शर्मा विदेश की उछाल लेती पिच पर रन बनाकर मुझे गलत साबित करेंगे तो मुझे खुशी होगी। रोहित पर टीम प्रबंधन यदि भरोसा करता है और यह मानता है कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर उन्हें मालूम है कि उन्हें क्या करना ठीक नहीं है।' 

मनिंदर ने कहा, 'रोहित के दक्षिण अफ्रीका की पिचों पर पांव ही नहीं चल रहे और शाशोपंज में नजर आते हैं बल्लेबाजी करते हुए वह आक्रामक तेवर अपनाएं या रक्षात्मक। रोहित की प्रतिभा से इनकार नहीं है, लेकिन दिक्कत यह है कि वह दक्षिण अफ्रीका की पिचों पर खुद को प्रेरित नहीं कर पा रहे हैं और ऐसे में टीम इंडिया के कोच को उनसे बात कर उन्हें भरोसा दिलाना चाहिए। कोच को यह जानने की कोशिश करनी चाहिए रोहित जिस अंदाज में खुद को सहज महसूस करे उसी के मुताबिक खेलने के लिए उनका हौसला बढ़ाए।  भारत को इस टेस्ट सीरीज में अपना सम्मान बचाना है तो फिर  टीम के बाकी बल्लेबाजों को भी विराट की तरह खुद को प्रेरित कर बेहतर प्रदर्शन करना होगा।'

उन्होंने कहा, 'बेचारे भुवी और शिखर पर तो अच्छे प्रदर्शन के बावजूद बराबर टीम इंडिया से बाहर किए जाने की तलवार लटकती रही है। यदि मौजूदा फॉर्म रोहित के टीम में रहने और रहाणे को बाहर बैठाना का पैमाना है तो भुवी को पहले टेस्ट में छह विकेट लेने और शिखर को मात्र एक टेस्ट की नाकामी के कारण अंतिम एकादश से बाहर बैठाना बेतुका नजर आता है। भुवी को पहले टेस्ट में छह विकेट लेने के बाद दूसरे टेस्ट में बाहर रखने की तुक नजर नहीं आती है। मोहम्मद शमी पर टीम प्रबंधन को बतौर पेसर बहुत भरोसा है और उन्होंने भले ही दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में अच्छी गेंदबाजी कर विकेट भी चटकाए, लेकिन मुझे अभी भी शारीरिक रूप से जकड़े-जकड़े से नजर आते हैं।पूरे फिट होने पर शमी वाकई बहुत बढ़िया गेंदबाज है। तेज गेंदबाज के रूप में भुवनेश्वर  जिस लय में हैं उस लिहाज से उनके साथ जसप्रीत बुमराह तो होने ही चाहिए। तीसरे गेंदबाज के रूप में शमी के पूरी तरह फिट होने पर ही टीम में लिया जाना अन्यथा उनकी जगह इशांत शर्मा को खिलाना चाहिए।'

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