फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Cricket ›   Cricket News ›   virat kohli and ms dhoni think diffrent about DRS

धोनी हुए पुराने, कोहली की स्टाइल ही नहीं सोच भी नई

Tue, 16 Jun 2015 12:30 PM IST
Updated Tue, 16 Jun 2015 12:30 PM IST
विज्ञापन
virat kohli and ms dhoni think diffrent about DRS

भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम के नए कप्तान विराट कोहली स्टाइल ही नहीं सोच भी अलग रखते हैं। बात मैदान के अंदर की हो या बाहर की। अब विराट ने यह कहकर नई चर्चा छेड़ दी है कि अंपायर निर्णय समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) पर साथियों से विचार करने में क्या हर्ज है।

विज्ञापन


इस प्रणाली को लेकर बीसीसीआई और पूर्व टेस्ट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी खुलकर विरोध करते रहे हैं। विराट ने कहा है कि वह विवादास्पद डीआरएस को लागू करने के बारे में साथियों के साथ खुलकर विचार-विमर्श करने को तैयार हैं।
विज्ञापन


वहीं, धोनी का शुरू से ही मानना रहा है कि डीआरएस फुलप्रूफ नहीं है इसको और विकसित किए जाने की जरूरत है। कोहली का मत है कि कम से कम इस पर विचार-विमर्श तो किया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

कोहली का मत, खिलाड़ियों से राय लेने में हर्ज ही क्या है

virat kohli and ms dhoni think diffrent about DRS

डीआरएस पर टीम इंडिया के नए टेस्ट कप्तान विराट कोहली का कहना है कि "हम संग बैठें और गेंदबाजों से पूछे कि भई उनका इस बारे में क्या विचार है। बल्लेबाज इस बारे में क्या नजरिया रखते हैं।"

विराट का विचार बीसीसीआई के अब तक रहे अडिग रवैये से भी मेल नहीं खाता है। पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के कार्यकाल में बीसीसीआई ने इसका कड़ा विरोध किया जबकि इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड इसका इस्तेमाल शुरू कर चुके थे।

आईसीसी का कहना है कि वह चाहती है कि सभी सदस्य देश इस प्रणाली का उपयोग करें लेकिन वह किसी बोर्ड को इसको मानने के लिए विवश नहीं कर सकती।

डीआरएस पर कोहली के साथ आईसीसी

virat kohli and ms dhoni think diffrent about DRS

आईसीसी के सीईओ डेव रिचर्डसन ने हाल ही में कहा था कि हम चाहते कि नियम सभी के लिए एक जैसे हों लेकिन तथ्य यह है कि हमारा एक सदस्य बोर्ड डीआरएस नहीं चाहता क्योंकि उसकी अपनी चिंताएं है।

उन्होंने कहा कि हजार डॉलर प्रति मैच का अनुमानित खर्च और यदि हॉट स्पॉट के चार कैमरे और शामिल कर लिए जाएं तो यही खर्च दस हजार डॉलर प्रति मैच और बढ़ जाता है।

आपको बता दें कि डीआरएस की प्रायोगिक शुरुआत भारत और श्रीलंका के बीच 2008 में हुई टेस्ट सीरीज में हुई थी। वनडे में इसे जनवरी 2011 में लागू किया गया था।

पढ़ें, डीआरएस के फायदें और नुकसान

virat kohli and ms dhoni think diffrent about DRS

डीआरएस को लेकर कुछ अपवादः
• डीआरएस के 100 प्रतिशत सही होने की कोई गारंटी नहीं है।
•अंपायरों के निर्णय पर सवाल उठाना क्रिकेट के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ।
•महंगी प्रणाली है, अनावश्यक खर्च बढ़ाने से कोई फायदा नहीं।
•शुरुआती दौर में भारत के खिलाफ कई निर्णय गए जिससे अनुभव बेहद खराब रहा।

डीआरएस के फायदेः
•प्रणाली से सही फैसलों का प्रतिशत बढ़ा है। अनुमानित तौर पर यह 93 प्रतिशत से बढ़कर 98 प्रतिशत हो गया है।
•बल्ले और गेंद के बीच संतुलन बढ़ता है। अब बैट्समैन पैड से की जगह बल्ले का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं।
•तकनीक से जो खर्च बढृता है वह वहन किया जा सकता है। वैसे भी प्रसारणकर्ता इसे अपने बजट में शामिल करता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें क्रिकेट समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। क्रिकेट जगत की अन्य खबरें जैसे क्रिकेट मैच लाइव स्कोरकार्ड, टीम और प्लेयर्स की आईसीसी रैंकिंग आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed