11 भारतीयों के पास श्रीलंका में टेस्ट खेलने का अनुभव नहीं, अब अभ्यास ही सहारा
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विराट कोहली की अगुवाई में टीम इंडिया दो दिन पहले ही श्रीलंका पहुंच चुकी है। तीन मैचों की टेस्ट सीरीज खेले जाने से पहले भारतीय टीम को एक अभ्यास मैच भी खेलना है। यह तीन दिवसीय अभ्यास मैच भी कल यानी गुरुवार से कोलंबो में शुरू होने जा रहा है।
15 सदस्यीय भारतीय दल में से सिर्फ चार क्रिकेटरों ओपनर मुरली विजय, हरभजन सिंह, अमित मिश्रा और इशांत शर्मा को ही श्रीलंका में टेस्ट खेलने का अनुभव हासिल है। यहां तक की कोहली भी पहली बार श्रीलंका में अपना पहला टेस्ट मैच खेलेंगे।
नए कप्तान विराट कोहली की यह पहली बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। फिलहाल जब से वह टेस्ट टीम के कप्तान बने हैं उनके प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव दिखाई देता रहा है। कोहली की टीम में ज्यादातर युवा खिलाड़ी हैं और 11 क्रिकेटर पहली बार इस पड़ोसी देश में टेस्ट मैच खेलने उतरेंगे।
इस अभ्यास मैच से कोहली के अलावा टीम के अन्य बल्लेबाज मुरली विजय, लोकेश राहुल, शिखर धवन, अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा टेस्ट के पहले श्रीलंका के पिच के मिजाज को समझने की कोशिश करेंगे। इससे पहले टीम इंडिया ने श्रीलंका पहुंचने के 24 घंटे बाद ही अपना नेट अभ्यास शुरू कर दिया। टीम के सभी खिलाड़ी नेट अभ्यास के लिए यहां एक इंडोर अभ्यास सेंटर में पहुंचे, जहां उन्होंने जमकर पसीना बहाया।
श्रीलंका में टीम इंडिया और उसका कोचिंग स्टॉफ अभी तय नहीं
लेकिन दिलचस्प यह है कि टीम डायरेक्टर रवि शास्त्री इस समय टीम इंडिया के साथ नहीं हैं और वह पहला टेस्ट मैच शुरू होने से महज चार दिन पहले ही टीम के साथ जुड़ेंगे। वह इस समय इंग्लैंड में हैं और एशेज सीरीज में बतौर टीवी एक्सपर्ट काम कर रहे हैं।
शास्त्री के अलावा युवा खिलाड़ियों के बीच टीम इंडिया के कोचिंग स्टॉफ को लेकर अभी कुछ भी फैसला नहीं लिया जा सका है। बीसीसीआई को टीम से जुड़े तीन सहायक कोचों के बारे में भी फैसला लेना है। हालांकि बोर्ड पहले शास्त्री के बारे में निर्णय लेना चाहता है।
रवि शास्त्री के अलावा गेंदबाजी कोच बी अरुण, क्षेत्ररक्षण कोच आर श्रीधर और बल्लेबाजी कोच संजय बांगड़ के भविष्य को लेकर अभी कुछ भी तय नहीं है। जून में भारत के बांग्लादेश दौरे के दौरान इन तीनों से कहा गया था कि जिम्बाव्वे दौरे पर टीम के जाने से पहले उनके साथ करार कर लिया जाएगा। लेकिन अभी तक कुछ भी तय नहीं किया जा सका है।
शास्त्री का स्काई स्पोटर्स के साथ करार होने के कारण बीसीसीआई उनके बारे में फैसला नहीं ले पा रही है। अगर ऐसा होता है तो उनके साथ हितों में टकराव का मामला बन सकता है। साथ ही उनकी नियुकि्त होने की सूरत में वह टीम के साथ नहीं होते तो यह गलत संदेश जाता कि वह भारतीय टीम के बजाए मीडिया करार को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं।
भारत की 'विराट सेना' के सामने कड़ा इम्तिहान
नए कप्तान विराट कोहली के नेतृत्व में भारतीय टीम के ज्यादातर खिलाड़ियों के लिए श्रीलंका में टेस्ट सीरीज नया अनुभव होगा। भारत की इस यंग ब्रिगेड के बल्लेबाजों पर बड़ा जिम्मा है क्योंकि कप्तान कोहली पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह पांच गेंदबाजों को लेकर उतरेंगे। जाहिर तौर पर इससे छह विशेषज्ञ बल्लेबाजों को अतिरिक्त प्रयास करने होंगे।
चुनौती यह है कि श्रीलंका में वनडे और टी-20 में खासे मैच खेल चुके कप्तान कोहली और रोहित शर्मा ने भी अभी यहां टेस्ट मैच नहीं खेला है। इसके अलावा चेतेश्वर पुजारा, शिखर धवन, विकेटकीपर बल्लेबाज रिदिमान साहा और लोकेश राहुल भी इसी श्रेणी में हैं।
कप्तान के रूप में अपनी पहली पूर्ण सीरीज खेल रहे कोहली 15 वनडे मैचों में यहां दो शतक लगा चुके हैं। अपने पहले दो टेस्ट मैचों में शतक लगाने वाले रोहित के सामने भी श्रीलंका सीरीज कड़ी चुनौती है। वनडे के बेहतरीन बल्लेबाज रोहित टेस्ट फारमेट में ज्यादा बेहतर नहीं कर पाए हैं। श्रीलंका की पिचें उन्हें ज्यादा रास आती भी नहीं हैं। दाएं हाथ के बल्लेबाज रोहित शर्मा ने श्रीलंका के खिलाफ 18 वनडे मैचों में सिर्फ 255 रन बनाए हैं।
अजिंक्य रहाणे भी श्रीलंका में अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं लेकिन इस देश में खेलने का पर्याप्त अनुभव उनके पास भी नहीं है।
'शीर्ष क्रम पर स्वस्थ प्रतियोगिता अच्छी बात'
बांग्लादेश में मुरली विजय के अलावा अन्य सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने भी शतकीय पारी खेली थी। इसके अलावा लोकेश राहुल भी अंतिम एकादश में शामिल होने की होड़ में हैं। लोकेश राहुल ने भी चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया-ए के खिलाफ अनधिकृत टेस्ट सीरीज में अच्छी फॉर्म दिखाई है। ऐसे में शीर्ष क्रम में स्वस्थ प्रतियोगिता नजर आ रही है।
लेकिन मुरली विजय मानते हैं कि यह स्वस्थ प्रतियोगिता चिंता का नहीं चुनौती का सबब है। उन्होंने कहा कि यह स्वस्थ प्रतियोगिता तो प्रत्येक के लिए चुनौती है। जितना संभव हो सके बेहतर करने का प्रयास करो। एक टीम के लिए यह आदर्श स्थिति है।
मुरली ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्हें श्रीलंका में टेस्ट मैच खेलने का अनुभव है। पांच साल पहले भारतीय टीम के श्रीलंकाई दौरे में वह अंतिम एकादश का हिस्सा थे। दौरे को चुनौतीपूर्ण मानने वाले मुरली विजय का कहना है कि बल्लेबाजों पर कोई अतिरिक्त दबाव नहीं है।
बांग्लादेश के खिलाफ हुए एकमात्र टेस्ट में विजय ने 150 रनों की शानदार पारी खेली थी। वह चाहेंगे कि इस सीरीज में भी बेहतर कर टीम में अपना स्थान पक्का करें। विजय ने कहा कि बेहतर करना हमारा दायित्व है। अगर हम में से कोई भी बड़ी पारी खेलता है तो यह टीम के लिए अच्छा होगा और हम टीम को बेहतर स्थिति में पहुंचा सकेंगे। लिहाजा यह एक अच्छी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि अगर आप टेस्ट मैच में अपना पलड़ा भारी करना चाहते हो तो आपको एक टीम के रूप में अच्छा करना होगा। आपके पास एक योजना होनी चाहिए और आपको उसके अनुसार ही करना होगा। दोनों ही टीमों में युवा खिलाड़ी शामिल हैं।
श्रीलंकाई टीम के बारे में भारतीय ओपनर मुरली कहते हैं, एंजेलो मैथ्यूज अच्छा कर रहे हैं। वहां लाहिरू थिरामाने के अलावा अन्य प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी हैं, इसलिए सीरीज तो चुनौतीपूर्ण रहेगी। कुमार संगकारा के दूसरे टेस्ट में रिटायरमेंट के बाद श्रीलंका के पास दो अनुभवी बल्लेबाज नहीं होंगे। महेला जयवर्द्धने पहले ही संन्यास ले चुके हैं।
इस पर विजय मानते हैं कि श्रीलंका को उनकी कमी खलेगी। दोनों महान बल्लेबाज हैं। उनकी भरपाई करना आसान नहीं होगा लेकिन मैंने हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ उनकी सीरीज देखी है। श्रीलंका की टीम अच्छी है। हम इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। उम्मीद है कि हम उनसे बेहतर करने में सफल रहेंगे।