लगातार 11वीं जीत से टीम इंडिया ने खत्म किया 'मार्च फोबिया'
भारतीय टीम लगातार दूसरा वर्ल्ड कप खिताब जीतने के अपने अभियान में जोरशोर से जुटी हुई है। भारत ने लीग मुकाबले में लगातार सभी 6 मैच जीतकर अजेय रथ पर सवार होकर नॉकआउट दौर प्रवेश किया था। खिताब से महज 3 जीत दूर भारत के सामने अगली चुनौती बांग्लादेश के रूप में थी और आगे के सारे मुकाबले ऐसे थे कि एक भी मैच हारे तो टूर्नामेंट से सफर खत्म। लेकिन बांग्लादेश उलटफेर में माहिर है और वह बड़े टूर्नामेंट्स में शानदार प्रदर्शन कर बड़ी टीमों को खूब परेशान कर चुकी है।
बांग्लादेश ने वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान को पहले भी धूल चटा चुकी है जबकि इस वर्ल्ड कप में उसने इंग्लैंड को पीटरकर पहली बार नॉकआउट दौर में प्रवेश किया था। भारत ने जिस तरह का प्रदर्शन अब तक के अपने सफर में किया है उससे बांग्लादेश ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं लग रहा था। लेकिन टीम इंडिया एक अजीब सी फोबिया से ग्रस्त थी और सभी को यही आशंका थी कि कहीं वह इस बार भी इसी फोबिया का शिकार न बन जाए।
हम यहां जिस फोबिया की बात कर रहे हैं वह है 'मार्च फोबिया'। 2 वर्ल्ड कप जीत चुकी टीम इंडिया वनडे इतिहास में बांग्लादेश से अब तक महज 3 बार हारी है जिसमें उसे लगातार 2 मैचों में जो शिकस्त मिली वह मार्च के महीने में ही मिली। उसे यह हार वर्ल्ड कप और एशिया कप जैसे टूर्नामेंट में मिली। मेलबर्न में मैच की शुरुआत भी जिस अंदाज में हुई तो लगा टीम इंडिया फिर 'मार्च फोबिया' का शिकार होने जा रही है लेकिन रोहित शर्मा के शानदार शतक और गेंदबाजों के कमाल के प्रदर्शन ने वर्ल्ड कप में लगातार 11वीं जीत के साथ इस फोबिया को भी लगभग खत्म कर दिया।
क्या है टीम इंडिया का 'मार्च फोबिया'
क्रिकेट वर्ल्ड में मेमना कहे जाने वाले बांग्लादेश ने भारत को अब तक 3 वनडे में हराया है जिसमें यही एकमात्र मैच द्वीपक्षीय सीरीज के दौरान खेला गया था। इसके बाद उसने भारत से अगले दोनों मुकाबले वर्ल्ड कप और एशिया कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट्स में जीते। भारत की हार इस मायने में दिलचस्प है कि उसे ये शिकस्त मार्च महीने में मिले यानी की एक तरह से टीम इंडिया पर 'मार्च फोबिया' ग्रस्त है। टीम पर यह फोबिया हावी होता गया।
'मार्च फोबिया' का पहला असर भारत पर 2007 में पड़ा जो उस समय वेस्टइंडीज में हुए वर्ल्ड कप के दौरान पोर्ट ऑफ स्पेन में बांग्लादेश ने लीग चरण में भारतीय टीम को 5 विकेट से हराकर न सिर्फ सभी को चौंका दिया बल्कि उसे शुरुआती चरण से बाहर भी कर दिया। यह मैच मार्च महीने की 17 तारीख को खेला गया था।
इसके बाद टीम इंडिया ने 'मार्च फोबिया' का दूसरा प्रहार 16 मार्च, 2012 को झेला जब एशिया कप में बांग्लादेश ने मीरपुर में भारत को 5 विकेट से हरा दिया। यह मैच इस लिहाज से भी यादगार है क्योंकि इसी में सचिन तेंदुलकर ने शानदार शतक लगाते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों का शतक लगाया था। धोनी की अगुवाई वाली टीम इंडिया तेंदुलकर के इस रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन वाले मैच को हर हाल में जीतना चाहती थी लेकिन उसे हार का मुंह देखना पड़ा।
वर्ल्ड कप में 8 साल बाद मार्च महीने में भारत और बांग्लादेश की टीमें फिर एक-दूसरे के आमने-सामने थी जिसमें टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन कर पिछली हार का बदला ले लिया और लगातार दूसरी बार टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की भी कर ली। हालांकि 2011 वर्ल्ड कप में भी दोनों टीमों का सामना हुआ जिसमें भारत 87 रन से मैच जीत गया लेकिन यह मैच फरवरी में 19 तारीख को खेला गया था।
11 साल में 3 हार और एक भारतीय है गवाह, कौन है वो?
बांग्लादेश ने भारत को पहली बार वनडे में दिसंबर, 2004 में हराया था, उस ऐतिहासिक मैच के सिर्फ 2 गवाह ही आज मैदान पर दिखे और दोनों ही टीमों से एक-एक खिलाड़ी आज भी मैदान पर उतरे। सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये वे 2 खिलाड़ी हैं जो उस समय टीम के सदस्य थे लेकिन आज अपनी-अपनी टीमों के कप्तान हैं। जी हां, हम यहां बात कर रहे है महेंद्र सिंह धोनी और मशरफे मुर्तजा की, जो उस समय करियर की शुरुआत में थे और आज अपनी टीमों के कप्तान बन गए हैं।
मशरफे भारत पर मिली ऐतिहासिक जीत में अपनी टीम का हिस्सा थे जबकि धोनी ऐतिहासिक शिकस्त झेलने वाली टीम इंडिया में शामिल थे, इसके बाद भारत को 2 और मैचों में हार मिली जिसमें भी धोनी शामिल रहे हैं वहीं मशरफे भी इन तीनों ही जीत में अपनी टीम का हिस्सा थे।
भारत और बांग्लादेश के बीच इस नॉकआउट मैच से पहले आपस में कुल 28 बार भिड़ंत हुई जिसमें टीम इंडिया ने अपना दबदबा कायम रखते हुए 24 में जीत हासिल की और महज 3 में हार का मुंह भी देखना पड़ा। एक मैच का परिणाम ही नहीं निकला। दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहला वनडे मुकाबला 27 अक्टूबर, 1988 को चटगांव में खेला गया था जिसमें भारत ने 9 विकेट से शानदार जीत हासिल की।
भारत की बांग्लादेश पर लगातार 12 वनडे मैचों में जीत का सिलसिला 2004 में टूटा, जब उसने 26 दिसंबर, 2004 को ढाका में भारतीय टीम को 15 रनों से हरा दिया था। उस समय भारतीय टीम की कमान सौरव गांगुली के हाथों में थी। जबकि विजयी टीम की ओर से आलराउंड प्रदर्शन कर मैन ऑफ द मैच बनने वाले मशरफे मुर्तजा आज इसी टीम की अगुवाई कर रहे हैं।
दोनों टीमों के बीच सबसे ज्यादा 6 वनडे मैच जून महीने में खेले गए जिसमें सभी मैच भारत ने जीते, इसके बाद मई में 5 मैच हुए और ये सभी मैच भी भारत के ही पक्ष में रहा।