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सुशील दोशी की कलम से: दुनिया के तमाम दिग्गज विराट को कर रहे सलाम, भारतीयों ने कीवी बॉलर्स की धज्जियां उड़ाईं
सार
भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर 12 साल बाद वनडे विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई। मशहूर कमेंटेटर सुशील दोशी ने इस मैच को लेकर अपनी राय रखी है। आइए जानते हैं...
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सुशील दोशी की कलम से
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नमस्कार मैं सुशील दोशी एक बार फिर से आपका स्वागत करता हूं। कल वह काम हो गया जिसके लिए तमाम भारतीय काफी प्रार्थना कर रहे थे यानी भारत सेमीफाइनल में पहुंच गया है और सबसे तगड़ी टीम न्यूजीलैंड को उन्होंने बिल्कुल एक तरफा मुकाबले में हरा दिया। ऐसा नहीं कि न्यूजीलैंड ने संघर्ष नहीं किया, लेकिन कल उनकी सभी योजनाएं असफल हो गईं।
न्यूजीलैंड के बॉलर्स को चिथड़ों में उड़ा दिया गया और जिस तरह भारतीय बल्लेबाजों ने उनकी खबर ली, वह इतिहास गवाह है कि शायद यह कभी किसी टीम ने सेमीफाइनल मुकाबले में इस तरह की खबर ली। उनके दुनिया के सबसे तेज आक्रमण जिसको कहा जाता है ट्रेंट बोल्ट, फर्ग्यूसन और तीसरे उनके साउदी, यह तीनों की काफी धुलाई हुई। साउदी ने भले ही विकेट ली, लेकिन शतक यानी 100 रन दे दिए अपनी बॉलिंग पर। उससे अंदाज लगा सकते हैं कि किस तरह भारतीय बल्लेबाजों ने पूरी दादागिरी दिखाकर 398 का पहाड़ जैसा लक्ष्य उनके सामने रखा और इतना बड़ा लक्ष्य प्राप्त करना फ्लड लाइट में बहुत मुश्किल काम होता है।
मैंने पहले भी कहा था कि जो टीम टॉस जीतेगी उसके लिए कम से कम 25 प्रतिशत का ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि शुरू में गेंद बिल्कुल मूवमेंट नहीं होता है। गेंद बल्ले पर अच्छी आती है और बल्लेबाजों की चांदी हो जाती है। भारतीय बल्लेबाज ने इसका पूरा फायदा उठाया। रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने हमेशा की तरह शानदार शुरुआत की और बाद में विराट कोहली ने अपना शतक लगाकर तेंदुलकर के रिकॉर्ड को तेंदुलकर के शहर में ही तोड़ दिया यानी पचास ODI शतक उन्होंने पूरे कर लिए। रनों की भूख उनकी बढ़ती जा रही है।
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लोग कह रहे हैं 35 साल से ज्यादा का हो गया है, लेकिन मैं तो कहता हूं कि कोई एक व्यक्ति जो उम्र के साथ जवान हो रहा हो, वो है विराट कोहली। दुनिया को अचंभित करके रख दिया है। उसका कोई भी पैर गलत पड़ता ही नहीं। सही फुटवर्क, लेंथ और लाइन का सही अंदाज और फिर रन बनाने की वही भूख यह सभी चीजें उनमें दिखाई देती हैं। तो क्रिकेट इतिहास का वो महानतम खिलाड़ियों में शामिल हो गया, न केवल भारत का बल्कि दुनिया के तमाम दिग्गज उनको सलाम कर रहे हैं।
मैच की तरफ बात करें तो फिर न्यूजीलैंड के आक्रमण की पूरी तरह से धज्जियां उड़ा दी गई और बाद में जब न्यूजीलैंड बल्लेबाजी करने आया तो फिर वही कहानी दोहराई गई यानी की शमी, सिराज और बुमराह की कातिलाना अंदाज की बॉलिंग। मैंने अक्सर देखा है कि जब जब बुमराह और सिराज शुरू में विकेट नहीं ले पाते हैं तब तब शमी आते हैं और अपना काम कर दिखाते हैं। यही इस बार भी हुआ सबसे बड़ी बात यह है कि हर भारतीय बॉलर को, हर भारतीय खिलाड़ी को अपनी भूमिका पूरी तरह से पता है कि उन्हें क्या करना है और कब करना है। शमी जैसे ही आए लग रहा था कि कहीं बहुत ज्यादा रन पीट जाएं, लेकिन शमी ने आते ही पहले ही गेंद पर विकेट ले लिया कॉन्वे का। यहां से दबाव पड़ा।
मैंने कल भी कहा था कि पावरप्ले निर्णायक बात बता देगा कि कौन सी टीम जीत रही है। पावरप्ले में भारतीय बल्लेबाजों ने ने धमाकेदार प्रदर्शन किया, लेकिन न्यूजीलैंड के बल्लेबाज पावरप्ले में ही पूरी तरह से बिखरना शुरू हो गई और यही बात इसका जिम्मेदार रहे। भारतीय बॉलर्स और खासकर के शमी ने जिस तरह की बोलिंग कि देखिए शमी जो बॉलिंग करते हैं न वह बहुत ज्यादा कुछ ऐसा नहीं करते कि कोई बहुत अलग तरह की गेंदे करते हैं, कोई नकल बॉल करते हो या फिर कोई यॉर्कर बहुत ज्यादा करते हैं, बस वह बिल्कुल जो उनकी सीम पोजिशन रहती इतनी शानदार रहती है, ऐसा लगता है कि एक ही लाइन में सीम जब वह बॉलिंग कर रहे हैं उनके गेंद जब टप्पा खाती है तो एक लाइन में दिखती है।
उससे पता चलता है कि शमी सीम पर ही टप्पा खिलाते हैं। वहीं से गेंद को ऊंचा उठाते हैं, दाहिने या बाईं तरफ सीम के सहारे कट करते हैं, अचूक निशाने पर गेंद को पिच कराते हैं और फिर बाद में आखिर में जा जाकर कोई धीमी गेंद धीमी अवेकटर या धीमी इन कटर्स पर उन्होंने बहुत विकेट लिए हैं और जब इतना बड़ा लक्ष देते हैं ना तो बल्लेबाज लगातार यह तो है कि वह खतरनाक स्ट्रोक लगाने की कोशिश करता है जोखिम लेता है और जोखिम का अंदाज लगाते ही शमी एकदम प्रफुल्लित हो जाते हैं, उनको मालूम है कि अब बल्लेबाज अपना विकेट फेंक देगा। तो वह बहुत जबरदस्त बॉलर हैं।
मुझे तो यह भी आश्चर्य होता है कि कई दिनों तक उन्हें नहीं खिलाया गया और कहा गया कि यह शायद अब उस काबिल नहीं की भारतीय टीम में शामिल हो, लेकिन थिंकटैंक ने जब एक बार उनके प्रदर्शन को देखा तो वह भी अचंभित रह गया। फिर उन्हें लगातार खिलाया गया और निर्णायक योगदान दिया। मैं तो कहूंगा क्योंकि न्यूजीलैंड की ये टीम अगर शमी ये प्रदर्शन नहीं करते तो न्यूजीलैंड की ये टीम बहुत बढ़िया प्रदर्शन कर रही थी। विलियम्सन, कॉन्वे जैसे खिलाड़ी, रचिन जैसे खिलाड़ी और फिर शतक वीर डेरि मिलेच जैसे खिलाड़ी जिन्होंने शानदार शतक लगाकर विरोधी के पाले में गेम को ले जाने की कोशिश की, वो भी मिलकर ये इतना बड़ा आंकड़ा भी प्राप्त कर सकते थे, क्योंकि स्पिनर्स की थोड़ी धुलाई हो सकती थी, लेकिन यही होता है कि जब तेज गेंदबाज विकेट ले लेते हैं न, तो फिर स्पिनर्स भी चीजों को खामोश रखते हैं क्योंकि बड़े बल्लेबाज तो पहले ही निपटाए जा चुके रहते हैं।
पुछल्ले बल्लेबाजों का विकेट लेने में फिर कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा को कोई मुश्किल नहीं पड़ती है। तो भारत इस तरह 12 वर्ष के बाद फिर फाइनल में पहुंच गया है और उस मुकाम पर जहां से वो जीतने की कल्पना कर सकता है। सबसे खतरनाक मोड़ पर आकर उन्होंने न्यूजीलैंड को पराजित करते भारतीय दिलों को बल्ले बल्ले उछाल दिया है। अब लगता है कि वह घड़ी आ गई जब टूर्नामेंट भारत जीत सकता है। दूसरे सेमीफाइनल का इंतजार रहेगा। दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया का आज मुकाबला है और मैं डीडी स्पोर्ट्स पर फ्री डिश पर मैं कमेंट्री भी कर रहा हूं।
कल भी कमेंट्री की थी बहुत मजा आया और सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय जो खेल रहे हैं ना स्वच्छंद तरीके से खेल रहे हैं। मैंने कल भी कहा था कि ऐसा लगता है कलाकार कोई अपनी कला के प्रतिभा दिखा रहा है लोगों के सामने। इतने प्रसन्नचित्त होकर लगता है जैसे अपनी कला से मुग्ध होकर ईश्वर को प्रसन्न करना चाहते हैं। इस तरह से बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में भारतीय खिलाड़ी प्रदर्शन कर रहे हैं और यह प्रदर्शन जारी रहा तो भारतीय ताकत को कोई रोक नहीं पाएगा। चलिए इसी संभावना के साथ मैं आपको नमस्कार करता हूं प्रणाम। धन्यवाद।
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न्यूजीलैंड के बॉलर्स को चिथड़ों में उड़ा दिया गया और जिस तरह भारतीय बल्लेबाजों ने उनकी खबर ली, वह इतिहास गवाह है कि शायद यह कभी किसी टीम ने सेमीफाइनल मुकाबले में इस तरह की खबर ली। उनके दुनिया के सबसे तेज आक्रमण जिसको कहा जाता है ट्रेंट बोल्ट, फर्ग्यूसन और तीसरे उनके साउदी, यह तीनों की काफी धुलाई हुई। साउदी ने भले ही विकेट ली, लेकिन शतक यानी 100 रन दे दिए अपनी बॉलिंग पर। उससे अंदाज लगा सकते हैं कि किस तरह भारतीय बल्लेबाजों ने पूरी दादागिरी दिखाकर 398 का पहाड़ जैसा लक्ष्य उनके सामने रखा और इतना बड़ा लक्ष्य प्राप्त करना फ्लड लाइट में बहुत मुश्किल काम होता है।
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मैंने पहले भी कहा था कि जो टीम टॉस जीतेगी उसके लिए कम से कम 25 प्रतिशत का ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि शुरू में गेंद बिल्कुल मूवमेंट नहीं होता है। गेंद बल्ले पर अच्छी आती है और बल्लेबाजों की चांदी हो जाती है। भारतीय बल्लेबाज ने इसका पूरा फायदा उठाया। रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने हमेशा की तरह शानदार शुरुआत की और बाद में विराट कोहली ने अपना शतक लगाकर तेंदुलकर के रिकॉर्ड को तेंदुलकर के शहर में ही तोड़ दिया यानी पचास ODI शतक उन्होंने पूरे कर लिए। रनों की भूख उनकी बढ़ती जा रही है।
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लोग कह रहे हैं 35 साल से ज्यादा का हो गया है, लेकिन मैं तो कहता हूं कि कोई एक व्यक्ति जो उम्र के साथ जवान हो रहा हो, वो है विराट कोहली। दुनिया को अचंभित करके रख दिया है। उसका कोई भी पैर गलत पड़ता ही नहीं। सही फुटवर्क, लेंथ और लाइन का सही अंदाज और फिर रन बनाने की वही भूख यह सभी चीजें उनमें दिखाई देती हैं। तो क्रिकेट इतिहास का वो महानतम खिलाड़ियों में शामिल हो गया, न केवल भारत का बल्कि दुनिया के तमाम दिग्गज उनको सलाम कर रहे हैं।
मैच की तरफ बात करें तो फिर न्यूजीलैंड के आक्रमण की पूरी तरह से धज्जियां उड़ा दी गई और बाद में जब न्यूजीलैंड बल्लेबाजी करने आया तो फिर वही कहानी दोहराई गई यानी की शमी, सिराज और बुमराह की कातिलाना अंदाज की बॉलिंग। मैंने अक्सर देखा है कि जब जब बुमराह और सिराज शुरू में विकेट नहीं ले पाते हैं तब तब शमी आते हैं और अपना काम कर दिखाते हैं। यही इस बार भी हुआ सबसे बड़ी बात यह है कि हर भारतीय बॉलर को, हर भारतीय खिलाड़ी को अपनी भूमिका पूरी तरह से पता है कि उन्हें क्या करना है और कब करना है। शमी जैसे ही आए लग रहा था कि कहीं बहुत ज्यादा रन पीट जाएं, लेकिन शमी ने आते ही पहले ही गेंद पर विकेट ले लिया कॉन्वे का। यहां से दबाव पड़ा।
मैंने कल भी कहा था कि पावरप्ले निर्णायक बात बता देगा कि कौन सी टीम जीत रही है। पावरप्ले में भारतीय बल्लेबाजों ने ने धमाकेदार प्रदर्शन किया, लेकिन न्यूजीलैंड के बल्लेबाज पावरप्ले में ही पूरी तरह से बिखरना शुरू हो गई और यही बात इसका जिम्मेदार रहे। भारतीय बॉलर्स और खासकर के शमी ने जिस तरह की बोलिंग कि देखिए शमी जो बॉलिंग करते हैं न वह बहुत ज्यादा कुछ ऐसा नहीं करते कि कोई बहुत अलग तरह की गेंदे करते हैं, कोई नकल बॉल करते हो या फिर कोई यॉर्कर बहुत ज्यादा करते हैं, बस वह बिल्कुल जो उनकी सीम पोजिशन रहती इतनी शानदार रहती है, ऐसा लगता है कि एक ही लाइन में सीम जब वह बॉलिंग कर रहे हैं उनके गेंद जब टप्पा खाती है तो एक लाइन में दिखती है।
उससे पता चलता है कि शमी सीम पर ही टप्पा खिलाते हैं। वहीं से गेंद को ऊंचा उठाते हैं, दाहिने या बाईं तरफ सीम के सहारे कट करते हैं, अचूक निशाने पर गेंद को पिच कराते हैं और फिर बाद में आखिर में जा जाकर कोई धीमी गेंद धीमी अवेकटर या धीमी इन कटर्स पर उन्होंने बहुत विकेट लिए हैं और जब इतना बड़ा लक्ष देते हैं ना तो बल्लेबाज लगातार यह तो है कि वह खतरनाक स्ट्रोक लगाने की कोशिश करता है जोखिम लेता है और जोखिम का अंदाज लगाते ही शमी एकदम प्रफुल्लित हो जाते हैं, उनको मालूम है कि अब बल्लेबाज अपना विकेट फेंक देगा। तो वह बहुत जबरदस्त बॉलर हैं।
मुझे तो यह भी आश्चर्य होता है कि कई दिनों तक उन्हें नहीं खिलाया गया और कहा गया कि यह शायद अब उस काबिल नहीं की भारतीय टीम में शामिल हो, लेकिन थिंकटैंक ने जब एक बार उनके प्रदर्शन को देखा तो वह भी अचंभित रह गया। फिर उन्हें लगातार खिलाया गया और निर्णायक योगदान दिया। मैं तो कहूंगा क्योंकि न्यूजीलैंड की ये टीम अगर शमी ये प्रदर्शन नहीं करते तो न्यूजीलैंड की ये टीम बहुत बढ़िया प्रदर्शन कर रही थी। विलियम्सन, कॉन्वे जैसे खिलाड़ी, रचिन जैसे खिलाड़ी और फिर शतक वीर डेरि मिलेच जैसे खिलाड़ी जिन्होंने शानदार शतक लगाकर विरोधी के पाले में गेम को ले जाने की कोशिश की, वो भी मिलकर ये इतना बड़ा आंकड़ा भी प्राप्त कर सकते थे, क्योंकि स्पिनर्स की थोड़ी धुलाई हो सकती थी, लेकिन यही होता है कि जब तेज गेंदबाज विकेट ले लेते हैं न, तो फिर स्पिनर्स भी चीजों को खामोश रखते हैं क्योंकि बड़े बल्लेबाज तो पहले ही निपटाए जा चुके रहते हैं।
पुछल्ले बल्लेबाजों का विकेट लेने में फिर कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा को कोई मुश्किल नहीं पड़ती है। तो भारत इस तरह 12 वर्ष के बाद फिर फाइनल में पहुंच गया है और उस मुकाम पर जहां से वो जीतने की कल्पना कर सकता है। सबसे खतरनाक मोड़ पर आकर उन्होंने न्यूजीलैंड को पराजित करते भारतीय दिलों को बल्ले बल्ले उछाल दिया है। अब लगता है कि वह घड़ी आ गई जब टूर्नामेंट भारत जीत सकता है। दूसरे सेमीफाइनल का इंतजार रहेगा। दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया का आज मुकाबला है और मैं डीडी स्पोर्ट्स पर फ्री डिश पर मैं कमेंट्री भी कर रहा हूं।
कल भी कमेंट्री की थी बहुत मजा आया और सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय जो खेल रहे हैं ना स्वच्छंद तरीके से खेल रहे हैं। मैंने कल भी कहा था कि ऐसा लगता है कलाकार कोई अपनी कला के प्रतिभा दिखा रहा है लोगों के सामने। इतने प्रसन्नचित्त होकर लगता है जैसे अपनी कला से मुग्ध होकर ईश्वर को प्रसन्न करना चाहते हैं। इस तरह से बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में भारतीय खिलाड़ी प्रदर्शन कर रहे हैं और यह प्रदर्शन जारी रहा तो भारतीय ताकत को कोई रोक नहीं पाएगा। चलिए इसी संभावना के साथ मैं आपको नमस्कार करता हूं प्रणाम। धन्यवाद।