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सुशील दोशी की कलम से: मैक्सवेल ने हमेशा की तरह खेल का नक्शा तो बदला ही, अफगानिस्तान की आशाओं को भी रौंद दिया
सार
मैक्सवेल की धमाकेदार पारी ने ऑस्ट्रेलिया को अफगानिस्तान पर रोमांचक जीत दिलाई। मैक्सवेल की बदौलत 91 पर सात विकेट गंवा चुके ऑस्ट्रेलिया ने 292 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया। उनकी इस पारी पर मशहूर कमेंटेटर सुशील दोशी ने अपनी राय रखी है। आइए जानते हैं...
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सुशील दोशी की कलम से
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नमस्कार! मैं सुशील दोशी एक बार फिर से आपका स्वागत करता हूं। विश्व कप 2023 में ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान का जो मुकाबला हुआ, उसने रोंगटे खड़े कर दिए। हम सभी जानते हैं कि इस मैच के प्रति लोगों की दिलचस्पी भी किस कदर बढ़ी हुई थी, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया अगर यह मैच जीत जाता तो निश्चित रूप से सेमीफाइनल में प्रवेश कर लेता, जो कि उन्होंने कर लिया। वहीं, दूसरी तरफ अफगानिस्तान के लिए भी यह मैच जीतना बहुत जरूरी था। उन्होंने बल्लेबाजी की और बहुत बड़ा लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया के सामने रखा।
जब ऑस्ट्रेलिया के 91 रन पर सात विकेट गिर गए, तब लग रहा था कि हार ऑस्ट्रेलिया पर आवश्य हावी है और कोई भी ताकत शायद उन्हें बचा नहीं सकती थी, लेकिन जो 1983 में जब कपिल देव ने 175 नाबाद रन बनाए थे जिम्बाब्वे के खिलाफ और भारत को बिल्कुल पराजय के कगार से निकालकर विश्व चैंपियन बनाने की राह पर ला दिया था, लगभग वैसा ही प्रदर्शन मैक्सवेल ने किया। ऑस्ट्रेलिया के जो ग्लेन मैक्सवेल हैं न, उन्हें तो मैं 'मैड मैक्स' कहता हूं, क्योंकि वह जिस तरह से बल्लेबाजी करते हैं, खेल का नक्शा ही बदल देते हैं।
बात ही बात में ऐसा लगता है कि तस्वीर का रुख ही पलट गया है और यही बात एक बार फिर से उन्होंने की। जबकि ऐसा लग रहा था कि ऑस्ट्रेलिया पराजित हो गया है और विश्व कप से बाहर जाने की कगार पर है, वहां से मैक्सवेल ने एक तरह से राख के ढेर से उठकर अपनी टीम को फिर से जिंदा कर दिया और सेमीफाइनल में प्रवेश दिला दिया। उन्होंने डबल सेंचुरी बना दी। देखिए मैक्सवेल और पैट कमिंस के बीच 200 से ज्यादा रन की भागीदारी हुई और कमिंस ने इस भागीदारी में केवल 12 रन बनाए।
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इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि मैक्सवेल का अधिकार या यूं कहें वह किस तरह से हावी रहे इस पूरी भागीदारी में और किस तरह से उन्होंने अफगानिस्तान की आशाओं को रौंद दिया। मैं तो समझता हूं कि अफगानिस्तान बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। लग रहा था कि कहीं ऐसा न हो कि वह सेमीफाइनल में पहुंच जाए और बिल्कुल नजदीक पहुंच गया था। लग रहा था कि सात विकेट गिरा दिए हैं 91 रन पर, उनके गेंदबाज बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन तभी एक कैच छूटा।
22वें ओवर में मैक्सवेल का कैच छूटा। मुजीब ने जब वह कैच छोड़ा तो मुझे वह बात याद आ गई- छोड़ो कैच, हारो मैच। ये पकड़ो कैच, जीतो मैच का उल्टा मैं कह रहा हूं। मुजीब के हाथ से वह कैच क्या छूटा, ऐसा लगता है कि विश्व कप के सेमीफाइनल की बागडोर ही हाथ से छूट गई। तो कुल मिलाकर ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर से ये चुनौती भरा संदेश सभी टीमों को दे दिया है कि आप उन्हें हल्के में नहीं ले सकते हैं। वह कभी भी उठकर वापस आ सकते हैं। उनमें से कोई भी खिलाड़ी ऐसा प्रदर्शन कर सकता है, जो चमत्कार करके खेल की दिशा को बदल दे। मैक्सवेल ने एक बार फिर से दिखाया।
अन्य बल्लेबाज असफल रहे। ऑस्ट्रेलिया को सोचना पड़ेगा कि उनके जो गेंदबाज डेथ ओवर्स में गेंदबाजी कर रहे हैं, वह काफी रन लुटा रहे हैं। उन्हें कमर कसनी पड़ेगी अगर ये टूर्नामेंट वह जीतना चाहते हैं और भारत जैसी सशक्त टीम के सामने चुनौती प्रस्तुत करना चाहते हैं तो उन्हें बेहतर बल्लेबाजी और बेहतर गेंदबाजी भी करनी पड़ेगी। फील्डिंग ऑस्ट्रेलिया की बेहतर है, लेकिन कुल मिलाकर अब सेमीफाइनल की तस्वीर बिल्कुल साफ हो गई है।
भारत, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया, ये तीनों तो सेमीफाइनल में पहुंच चुके हैं और चौथे स्थान के लिए अब बहुत ही दिलकश संघर्ष होने वाला है। जहां कि पाकिस्तान भी है, अफगानिस्तान भी है और न्यूजीलैंड भी है। ये तमाम टीमें कोशिश करेंगी कि सेमीफाइनल में किसी तरह पहुंच जाएं। विश्व कप के मुकाबले अब गरमा तो रहे ही हैं, गहरा भी रहे हैं और दिलचस्पी के बिल्कुल तूफान के साथ आगे बढ़ रहे हैं। आइए हम भी देखते हैं इन दिलचस्प मुकाबलों को और आशा करते हैं कि भारत एकबार फिर से ये विश्व कप जीतेगा। आशा करते हैं कि भारत 1983 और 2011 का इतिहास दोहराकर फिर से ये विश्व कप जीतेगा। धन्यवाद।
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जब ऑस्ट्रेलिया के 91 रन पर सात विकेट गिर गए, तब लग रहा था कि हार ऑस्ट्रेलिया पर आवश्य हावी है और कोई भी ताकत शायद उन्हें बचा नहीं सकती थी, लेकिन जो 1983 में जब कपिल देव ने 175 नाबाद रन बनाए थे जिम्बाब्वे के खिलाफ और भारत को बिल्कुल पराजय के कगार से निकालकर विश्व चैंपियन बनाने की राह पर ला दिया था, लगभग वैसा ही प्रदर्शन मैक्सवेल ने किया। ऑस्ट्रेलिया के जो ग्लेन मैक्सवेल हैं न, उन्हें तो मैं 'मैड मैक्स' कहता हूं, क्योंकि वह जिस तरह से बल्लेबाजी करते हैं, खेल का नक्शा ही बदल देते हैं।
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बात ही बात में ऐसा लगता है कि तस्वीर का रुख ही पलट गया है और यही बात एक बार फिर से उन्होंने की। जबकि ऐसा लग रहा था कि ऑस्ट्रेलिया पराजित हो गया है और विश्व कप से बाहर जाने की कगार पर है, वहां से मैक्सवेल ने एक तरह से राख के ढेर से उठकर अपनी टीम को फिर से जिंदा कर दिया और सेमीफाइनल में प्रवेश दिला दिया। उन्होंने डबल सेंचुरी बना दी। देखिए मैक्सवेल और पैट कमिंस के बीच 200 से ज्यादा रन की भागीदारी हुई और कमिंस ने इस भागीदारी में केवल 12 रन बनाए।
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इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि मैक्सवेल का अधिकार या यूं कहें वह किस तरह से हावी रहे इस पूरी भागीदारी में और किस तरह से उन्होंने अफगानिस्तान की आशाओं को रौंद दिया। मैं तो समझता हूं कि अफगानिस्तान बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। लग रहा था कि कहीं ऐसा न हो कि वह सेमीफाइनल में पहुंच जाए और बिल्कुल नजदीक पहुंच गया था। लग रहा था कि सात विकेट गिरा दिए हैं 91 रन पर, उनके गेंदबाज बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन तभी एक कैच छूटा।
22वें ओवर में मैक्सवेल का कैच छूटा। मुजीब ने जब वह कैच छोड़ा तो मुझे वह बात याद आ गई- छोड़ो कैच, हारो मैच। ये पकड़ो कैच, जीतो मैच का उल्टा मैं कह रहा हूं। मुजीब के हाथ से वह कैच क्या छूटा, ऐसा लगता है कि विश्व कप के सेमीफाइनल की बागडोर ही हाथ से छूट गई। तो कुल मिलाकर ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर से ये चुनौती भरा संदेश सभी टीमों को दे दिया है कि आप उन्हें हल्के में नहीं ले सकते हैं। वह कभी भी उठकर वापस आ सकते हैं। उनमें से कोई भी खिलाड़ी ऐसा प्रदर्शन कर सकता है, जो चमत्कार करके खेल की दिशा को बदल दे। मैक्सवेल ने एक बार फिर से दिखाया।
अन्य बल्लेबाज असफल रहे। ऑस्ट्रेलिया को सोचना पड़ेगा कि उनके जो गेंदबाज डेथ ओवर्स में गेंदबाजी कर रहे हैं, वह काफी रन लुटा रहे हैं। उन्हें कमर कसनी पड़ेगी अगर ये टूर्नामेंट वह जीतना चाहते हैं और भारत जैसी सशक्त टीम के सामने चुनौती प्रस्तुत करना चाहते हैं तो उन्हें बेहतर बल्लेबाजी और बेहतर गेंदबाजी भी करनी पड़ेगी। फील्डिंग ऑस्ट्रेलिया की बेहतर है, लेकिन कुल मिलाकर अब सेमीफाइनल की तस्वीर बिल्कुल साफ हो गई है।
भारत, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया, ये तीनों तो सेमीफाइनल में पहुंच चुके हैं और चौथे स्थान के लिए अब बहुत ही दिलकश संघर्ष होने वाला है। जहां कि पाकिस्तान भी है, अफगानिस्तान भी है और न्यूजीलैंड भी है। ये तमाम टीमें कोशिश करेंगी कि सेमीफाइनल में किसी तरह पहुंच जाएं। विश्व कप के मुकाबले अब गरमा तो रहे ही हैं, गहरा भी रहे हैं और दिलचस्पी के बिल्कुल तूफान के साथ आगे बढ़ रहे हैं। आइए हम भी देखते हैं इन दिलचस्प मुकाबलों को और आशा करते हैं कि भारत एकबार फिर से ये विश्व कप जीतेगा। आशा करते हैं कि भारत 1983 और 2011 का इतिहास दोहराकर फिर से ये विश्व कप जीतेगा। धन्यवाद।