लमो की वजह से कप्तान नहीं बन पाए थे सुरेश रैना
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जिम्बाब्वे दौरे में तीन वनडे और दो टी-20 मुकाबलों में भारतीय सलेक्टर्स की पहली पसंद अजिंक्य रहाणे नहीं बल्कि सुरेश रैना थे। लेकिन ललित मोदी की एक ई-मेल के बाद हुए बवाल के बाद रैना से न सिर्फ टीम की कप्तानी छीन ली गई बल्कि टीम में भी जगह नहीं दी गई।
मामला पांच साल पुराना है। 2010 में ललित मोदी ने आईसीसी को ई-मेल भेजा था, जिसमें सुरेश रैना, रविंद्र जडेजा और ड्वेन ब्रावो का भारत रियल इस्टेट में लाभ लेने का आरोप लगाया गया।
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक 29 जून को भारतीय सलेक्टर्स ने दौरे के लिए टीम चुनने के लिए मीटिंग हुई। लेकिन दो दिन बाद मोदी की आईसीसी के सीईओ डेविड रिचर्डसन को भेजी गई एक ई-मेल लीक हो गई।
ई-मेल आने से पहले टीम सेलेक्टर्स टीम इंडिया की कमान सुरेश रैना को सौंपने का विचार कर चुके थे। लेकिन ई-मेल के बाद हुए बवाल के बाद रैना के जगह रहाणे का नाम फाइनल हुआ।
सुरेश रैना को देनी पड़ी थी सफाई
सुरेश रैना के संबंध में मीडिया में हो-हल्ले के बाद बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर को मामले में सामने आना पड़ा। उन्होंने कहा आईसीसी ने स्वयं ही इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और जांच तक की जरुरत नहीं समझी। लिहाजा रैना समेत अन्य तीनों क्रिकेटरों पर लगे आरोप गलत है।
इतना ही नहीं रैना का 2010 में श्रीलंका दौरे के दौरान एक महिला बुकी के साथ देखे जाने का मामला भी गरमाया था।
मीडिया से मिले सवालों के जवाब में रैना ने कहा कि उनका सिर्फ क्रिकेट के प्रति ध्यान और समर्पण है। ऐसा काम करके वह क्रिकेट और अपने फेंस के साथ दगाबाजी नहीं कर सकते। महिला बुकी के साथ देखे जाने के बाद बीसीसीआई इस रिपोर्ट को बेबुनियाद बताकर खारिज कर चुकी है।