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SC ने फ्रीज किए BCCI के खाते, अनुराग ठाकुर को पेश होने का आदेश
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 21 Oct 2016 06:44 PM IST
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बीसीसीआई
- फोटो : getty
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बीसीसीआई में सुधारों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश जारी करते हुए कहा कि बीसीसीआई जल्द से जल्द लोढ़ा समिति की सिफारिशों को मानने का हलफनामा कोर्ट में पेश करे। कोर्ट ने कहा कि लोढा समिति एक स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त करेगा, जो बीसीसीआई के तमाम ठेकों की जांच करेगा।
कोर्ट ने बीसीसीआई द्वारा राज्य क्रिकेट बोर्डों को फंड जारी करने पर भी रोक लगाई और कहा कि तब तक फंड न दिए जाएं जब तक राज्य के बोर्ड भी लोढा समिति की सिफारिशों को लागू करने के संबंध में हलफनामा नहीं दे देते।
कोर्ट में यह भी साफ हो गया कि बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर 3 दिसंबर को कोर्ट में इस संबंध में हलफनामा देंगे। 3 दिसंबर तक बीसीसीआई प्रमुख हलफनामा दाखिल करेंगे और इससे पहले वह लोढा पैनल को बताएंगे कि सुधार कैसे लागू किए जाएंगे। इस मामले में अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।
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कोर्ट ने बीसीसीआई द्वारा राज्य क्रिकेट बोर्डों को फंड जारी करने पर भी रोक लगाई और कहा कि तब तक फंड न दिए जाएं जब तक राज्य के बोर्ड भी लोढा समिति की सिफारिशों को लागू करने के संबंध में हलफनामा नहीं दे देते।
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कोर्ट में यह भी साफ हो गया कि बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर 3 दिसंबर को कोर्ट में इस संबंध में हलफनामा देंगे। 3 दिसंबर तक बीसीसीआई प्रमुख हलफनामा दाखिल करेंगे और इससे पहले वह लोढा पैनल को बताएंगे कि सुधार कैसे लागू किए जाएंगे। इस मामले में अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।
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जानबूझ कर बोर्ड नहीं मान रहा सिफारिशें
अनुराग ठाकुर
- फोटो : getty
कोर्ट ने इसी के साथ लोढ़ा समिति को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए बीसीसीआई के लिए स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त करने के लिए कहा। ऑडिटर का काम बीसीसीआई के सारे कांट्रेक्ट की निगरानी करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों आदेश सुरक्षित रखा था कि बोर्ड में प्रशासक नियुक्त किए जाए या नहीं और बीसीसीआई को और वक्त दिया जाए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि बोर्ड लगातार कोर्ट के आदेशों में रुकावट पैदा कर रहा है। लोढा समिति का भी यही मानना है कि बोर्ड सिफारिशों को लागू नहीं करना चाहता, इसलिए पदाधिकारियों को हटा देना चाहिए।
कोर्ट ने 18 जुलाई को लोढ़ा समिति की सभी सिफारिशों पर मुहर लगा दी थी। इसके बाद बोर्ड को उन्हें लागू करने के लिए 6 महीने का वक्त भी दिया था। मगर समिति ने शिकायत की थी कि बीसीसीआई जानबूझकर सुधार नहीं करना चाहती। मगर अब बीसीसीआई के पास कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों आदेश सुरक्षित रखा था कि बोर्ड में प्रशासक नियुक्त किए जाए या नहीं और बीसीसीआई को और वक्त दिया जाए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि बोर्ड लगातार कोर्ट के आदेशों में रुकावट पैदा कर रहा है। लोढा समिति का भी यही मानना है कि बोर्ड सिफारिशों को लागू नहीं करना चाहता, इसलिए पदाधिकारियों को हटा देना चाहिए।
कोर्ट ने 18 जुलाई को लोढ़ा समिति की सभी सिफारिशों पर मुहर लगा दी थी। इसके बाद बोर्ड को उन्हें लागू करने के लिए 6 महीने का वक्त भी दिया था। मगर समिति ने शिकायत की थी कि बीसीसीआई जानबूझकर सुधार नहीं करना चाहती। मगर अब बीसीसीआई के पास कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आ रहा है।