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BCCI: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बीसीसीआई की गतिविधियों से ‘दुकान’ जैसी होती है कमाई, लागू होगा ESI कानून
Wed, 31 Aug 2022 11:38 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 31 Aug 2022 11:38 PM IST
सार
जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा, ईएसआई कोर्ट या हाईकोर्ट ने बीसीसीआई को दुकान मानने में कोई गलती नहीं की है। बीसीसीआई की गतिविधियों को देखें तो टिकट बेचना, मनोरंजन कराना, कीमत पर सुविधाएं व सेवाएं देना, अंतरराष्ट्रीय टूरों से कमाई करना, आईपीएल से कमाई करना आदि।
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बीसीसीआई
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बोर्ड) की गतिविधियों से कमाई होती है। कर्मचारी राज्य बीमा कानून के प्रावधानों को लागू करने के लिए इसे दुकान माना जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा, ईएसआई अधिनियम केंद्र द्वारा अधिनियमित कल्याणकारी कानून है। इसमें इस्तेमाल शब्दों के साथ कोई संकीर्ण अर्थ नहीं जोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि यह कर्मचारियों के जीवन का बीमा करने का प्रयास करता है और नियोक्ता पर आरोप लगाता है।
बोर्ड के आयस्रोत से उसे दुकान मानना गलती नहीं
जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा, ईएसआई कोर्ट या हाईकोर्ट ने बीसीसीआई को दुकान मानने में कोई गलती नहीं की है। बीसीसीआई की गतिविधियों को देखें तो टिकट बेचना, मनोरंजन कराना, कीमत पर सुविधाएं व सेवाएं देना, अंतरराष्ट्रीय टूरों से कमाई करना, आईपीएल से कमाई करना आदि। ये सभी आय के स्रोत हैं और इसलिए ईएसआई कोर्ट व हाईकोर्ट ने इसे दुकान कहने में कोई गलती नहीं की है। इस पर ईएसआई कानून के प्रावधान लागू होने चाहिए। पीठ इस मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी कि क्या बीसीसीआई को 18 सितंबर 1978 को अधिसूचित ईएसआई कानून के तहत दुकान माना जाना चाहिए या नहीं।
बोर्ड की दलील को ठुकराया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि बीसीसीआई दुकान की परिभाषा के अंदर आता है और इसमें ईएसआई कानून के प्रावधान लागू होते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा, यहां दुकान शब्द की पारंपरिक अर्थों में व्याख्या नहीं की जानी चाहिए। इससे ईएसआई अधिनियम के उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी। पीठ ने कहा, बीसीसीआई की इस दलील में कोई तथ्य नहीं हे कि वह क्रिकेट और खेल को बढ़ावा देने के लिए सारी गतिविधियां करता है इसलिए उसे दुकान के रूप में परिभाषित नहीं करना चाहिए।
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बोर्ड के आयस्रोत से उसे दुकान मानना गलती नहीं
जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा, ईएसआई कोर्ट या हाईकोर्ट ने बीसीसीआई को दुकान मानने में कोई गलती नहीं की है। बीसीसीआई की गतिविधियों को देखें तो टिकट बेचना, मनोरंजन कराना, कीमत पर सुविधाएं व सेवाएं देना, अंतरराष्ट्रीय टूरों से कमाई करना, आईपीएल से कमाई करना आदि। ये सभी आय के स्रोत हैं और इसलिए ईएसआई कोर्ट व हाईकोर्ट ने इसे दुकान कहने में कोई गलती नहीं की है। इस पर ईएसआई कानून के प्रावधान लागू होने चाहिए। पीठ इस मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी कि क्या बीसीसीआई को 18 सितंबर 1978 को अधिसूचित ईएसआई कानून के तहत दुकान माना जाना चाहिए या नहीं।
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बोर्ड की दलील को ठुकराया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि बीसीसीआई दुकान की परिभाषा के अंदर आता है और इसमें ईएसआई कानून के प्रावधान लागू होते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा, यहां दुकान शब्द की पारंपरिक अर्थों में व्याख्या नहीं की जानी चाहिए। इससे ईएसआई अधिनियम के उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी। पीठ ने कहा, बीसीसीआई की इस दलील में कोई तथ्य नहीं हे कि वह क्रिकेट और खेल को बढ़ावा देने के लिए सारी गतिविधियां करता है इसलिए उसे दुकान के रूप में परिभाषित नहीं करना चाहिए।
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