'किस्मत के धनी' स्टुअर्ट बिन्नी को किस्मत ने ही दिया 'दगा'
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गाले टेस्ट में शर्मनाक हार के बाद टीम इंडिया को एक ऑलराउंडर की कमी महसूस हुई। उस कमी को दूर करने के लिए मैनेजमेंट ने स्टुअर्ट बिन्नी को श्रीलंका बुलाया और मैदान में उतारा। टीम को उनसे सिर्फ गेंदबाज ही नहीं बल्लेबाज के तौर पर भी जरुरत है।
बिन्नी को बीच सीरीज में अचानक बुलाना और खिलाना, 30 साल पुराने इतिहास को भी दोहरा गया। आज से 30 साल पहले भी भारतीय क्रिकेट के इतिहास ऐसा ही कुछ अजीबोगरीब ढंग से यह छोटा सा बदलाव हुआ था।
1985 में भारत के श्रीलंका दौरे के दौरान बिन्नी के पिता रोजर को अतिरिक्त खिलाड़ी के रूप में टीम में शामिल किया गया था। उन्हें भी टीम में बतौर ऑलराउंडर शामिल किया था। उस वक्त भी टीम इंडिया को एक ऑलराउंडर की जरुरत थी। दिलचस्प बात यह है कि दोनों मौकों में 'K' फेक्टर है। 1985 में टीम की कमान कपिल देव के पास थी और इस बार कोहली (विराट) के हाथों में है।
लेकिन करियर का चौथा टेस्ट खेल रहे स्टुअर्ट बिन्नी टीम में जगह पाने में सफल तो रहे। उन्हें हम किस्मत का धनी कह सकते है। लेकिन किस्मत ने ही उन्हें दगा दे दिया। आगे जानिए कैसे....
ऐसे दिया स्टुअर्ट बिन्नी को किस्मत ने 'दगा'
"काश वह गेंद नॉ बॉल न होती"। यह बात श्रीलंका और भारत के बीच दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक स्टुअर्ट बिन्नी के दिमाग में जरुर दौड़ रही होगी। दूसरे दिन गेंदबाजी में उतरते ही बिन्नी को श्रीलंकाई बल्लेबाज कौशल सिल्वा को आउट करने का मौका मिला लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।
हुआ यूं कि मैच के नौंवे ओवर में बिन्नी के ओवर में गेंद सिल्वा के बल्ले से लगकर विकेट के पीछे कैच हुई। सिल्वा उस वक्त 14 रन पर थे। लेकिन गेंद नॉ बॉल हो गई और कौशल को जीवनदान मिला। उन्होंने फिफ्टी ठोकी।
दरअसल, 2014 में अपने टेस्ट करियर की शुरुआत करने वाले बिन्नी अब तक 3 टेस्ट मैच खेल चुके हैं। यह उनका चौथा मैच है। वह अभी तक विकेट का खाता खोल पाने में नाकाम रहे हैं। इस बार उन्हें मौका मिला था लेकिन नॉ बॉल ने वह मौका गंवा दिया। हालांकि मैच में वह विकेट का श्रीगणेश करने का पूरा प्रयास करेंगे।