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खेतों में दौड़ लगाने से लेकर बिरयानी छोड़ने तक, टीम इंडिया में वापसी के लिए शमी ने किया कड़ा संघर्ष

Sat, 22 Jun 2019 06:06 AM IST
Rajeev Rai हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Sat, 22 Jun 2019 06:06 AM IST
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struggle and hard work is the key of indian pacer mohammad shami fitness and performance
मोहम्मद शमी

सब कुछ ठीक रहा तो मोहम्मद शमी शनिवार को अफगानिस्तान के खिलाफ अपने विश्व कप अभियान का आगाज करेंगे। यह किसी से छुपा नहीं है कि शमी ने किन पारिवारिक परेशानियों के बीच भारतीय टीम में वापसी की है। उनके कोच बदरुद्दीन-सिद्दीकी की माने तो शमी के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानसिक और शारीरिक रूप दोनों तरीके से फिट होना था। शमी ने जहां शारीरिक रूप से फिट होने के लिए ट्रैक्टर से खेत की मिट्टी को खुदवा कर सुबह और शाम नंगे पैर दौड़ लगाई तो अपनी मनपसंद बिरयानी का भी त्याग कर दिया। वहीं मानसिक रूप से फिट होने में उनके परिवार, पुराने साथियों के अलावा अकादमी ने उनका बखूबी साथ दिया।

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छह किलो कम किया वजन

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मोहम्मद शमी - फोटो : BCCI

पारिवारिक परेशानियों के बीच शमी ने कोलकाता को छोड़ अमरोहा स्थित गांव सहसपुर को ठिकाना बनाया। उनका वजन बढ़ गया था। उन्होंने देसी तरीकों को आजमाया। अपने खेत में ट्रैक्टर चलवाकर उन्होंने मिट्टी को मुलायम करा लिया। सुबह डेढ़ से दो घंटे और शाम को एक घंटा 400 और 50-50 मीटर की स्प्रिंट लगाते थे। फिट होने के लिए उन्होंने बिरयानी और वजन बढ़ाने वाले व्यंजन की तिलांजलि दे दी।

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पुराने शमी को देखा

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shami

बदरुद्दीन के मुताबिक उन्होंने इस दौरान उस शमी को देखा जब वह शुरुआत में उनके पास आते थे। पहले वह बहुत परेशान थे, लेकिन वह मानसिक रूप से बहुत मजबूत हैं। एक बार वह ठान लें कि उसे कुछ करके दिखाना है तो वह कर डालता है। बीच में उन्होंने यहां आना बंद कर दिया था, लेकिन इस बार जब आए तो बदले हुए थे। जिस तरह वह पहले मैदान पर बच्चों से घुलते मिलते थे। इस बार भी उनका सहारा बच्चे थे। वह उनके साथ खूब समय बिताते थे। उन्हें लगता था कि शमी इस हादसे से जल्द नहीं उबर पाएंगे पर उसने जबरदस्त वापसी की।

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