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उन्होंने अपमान सहा, प्रताड़ना झेली, पर लड़े और जीते

Tue, 19 Jan 2021 03:11 PM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Tue, 19 Jan 2021 03:11 PM IST
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Story of Indian Cricket Team Broken, Bruised, Battered Racially abused but captured Gaba and conquered border gavaskar trophy
ऑस्ट्रेलिया में सीरीज जीत के बाद भारत - फोटो : ट्विटर @BCCI

किसी शायर ने क्या खूब कहा है, 'बहुत गुरूर है तुझ को ऐ सर-फिरे तूफां मुझे भी जिद है कि दरिया को पार करना है'। हम बात कर रहे हैं उस ऑस्ट्रेलियाई तूफान की जिससे लड़ते-टकराते-जख्मी होते भारतीय टीम ने दरिया पार कर ली। जी हां भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया के सबसे अभेद्द किले गाबा को फतह कर कंगारुओं के गुरूर को चकनाचूर कर दिया है। आज टीम इंडिया के इस ऐतिहासिक विजय पर चारों तरफ जश्न का माहौल है और हो भी क्यों ना, जिस तरह से चोट खाने के बाद हर बार टीम ने खुद को खड़ा किया और सफलता हासिल की है वो भारतीय क्रिकेट इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गई है। 

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ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जिस तरह से भारतीय टीम ने टेस्ट सीरीज का आगाज किया और फिर आज जिस अंदाज में उसका अंत किया, वो हमेशा दुनिया के लिए एक मिसाल रहेगी। शायर मिर्जा अजीम बेग ने क्या खूब ही कहा, 'गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में वो तिफ़्ल क्या गिरेगा जो घुटनों के बल चले।' मतलब ये है कि सफलता में तो हर कोई जश्न मनाता है लेकिन तारीफ तो तब है, जबकि हम खुद को मिली नाकामी को ही अपनी कामयाबी की कुंजी मान लें। यह कठिन तो जरूर है, पर असंभव हरगिज नहीं और कुछ यही कहानी है भारतीय क्रिकेट टीम की। 

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एडिलेड में शर्मसार हुई टीम इंडिया 

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ऑस्ट्रेलियाई टीम - फोटो : सोशल मीडिया

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एडिलेड से टेस्ट सीरीज का आगाज हुआ। विराट कोहली की अगुवाई में टीम इंडिया ने पहली पारी में 53 रनों की बढ़त हासिल की और मैच में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। हालांकि यहां से शुरू हुई भारत के पतन की कहानी। बढ़त के बावजूद पूरी भारतीय टीम दूसरी पारी में अपने टेस्ट इतिहास के सबसे कम स्कोर 36 रन पर सिमट गई। हलात यह थी कि विराट, पुजारा, रहाणे जैसे दिग्गजों समेत कोई भी खिलाड़ी दोहरे अंक के स्कोर में नहीं पहुंच पाया। भारत की इस दुर्गति की सजा उसे ढाई दिन में ही आठ विकेटों से हार के रूप में मिली।

मेलबर्न से पहले कप्तान कोहली और शमी टीम से अलग हुए

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विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे - फोटो : ट्विटर

एडिलेड में शर्मनाक हार के बाद टीम इंडिया के सामने अचानक से कई चुनौतियां खड़ी हो गईं। विराट कोहली पितृत्व अवकाश लेकर भारत लौट आए तो मुख्य गेंदबाज मोहम्मद शमी चोटिल होकर सीरीज से बाहर हो गए। अब टीम की कमान अजिंक्य रहाणे के हाथों में सौंपी गई। यहां भारतीय टीम की वापसी की किसी को कोई उम्मीद नहीं थी और सभी ऑस्ट्रेलिया के क्लीन स्वीप की बात करने लगे। विराट और शमी की गैरमौजूदगी में टीम को संभालना और फिर से खड़ा करना रहाणे के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी।

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मेलबर्न में जोरदार वापसी के साथ किया फतह

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अजिंक्य रहाणे - फोटो : twitter@BCCI

भारतीय टीम ने मेलबर्न टेस्ट के लिए चार बदलाव किए। विराट की जगह जहां शुभमन गिल को लाया गया वहीं शमी की जगह मोहम्मद सिराज को मौका दिया गया। यही नहीं पृथ्वी की जगह रविंद्र जडेजा और ऋद्धिमान साहा की जगह पर ऋषभ पंत को शामिल किया गया। अब बारी थी खुद को खड़ाकर जीत हासिल करते हुए सीरीज में वापसी करने की और भारतीय टीम ने यही किया। रहाणे ने जहां आगे बढ़कर टीम का नेतृत्व किया तो वहीं बुमराह और जडेजा ने पूरी जान झोंक दी। शमी की गैरमौजूदगी में बुमराह ने गेंदबाजी आक्रमण का नेतृत्व किया और भारतीय टीम ऑस्ट्रलियाई टीम को पहली पारी में 195 और दूसरी पारी में 200 पर समेटने में सफल रही। हालांकि एक बार फिर से यहां भारतीय बल्लेबाजी लड़खड़ाती दिखी और उसने 173 रनों के स्कोर पर अपने पांच विकेट गंवा दिए। लेकिन इसके बाद रहाणे (112) और रविंद्र जडेजा (57) ने जबरदस्त बल्लेबाजी की और 121 रनों की साझेदारी कर मुश्किल में फंसी टीम को ना सिर्फ उबारा बल्कि मैच भी अपने नाम कर लिया।

सिडनी में खाई चोटें, सुनी गालियां लेकिन हार नहीं मानी

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हनुमा और अश्विन - फोटो : ट्विटर

मेलबर्न जीतने के बाद भारतीय टीम के हौसले बुलंद हो चुके थे। दोनों टीमें यहां सीरीज में बराबरी पर खड़ी हो चुकी थीं। लेकिन भारतीय टीम के लिए अभी चुनौतियां खत्म नहीं हुई थीं। सिडनी में तीसरे टेस्ट में भी टीम को उमेश यादव की चोट का सामना करना पड़ा और प्लेइंग इलेवन में बदलाव करने पड़े। हालांकि टीम को अब रोहित शर्मा का साथ जरूर मिला। 

  • स्मिथ का शतक 

अब बारी थी मैदान में उतरकर एक और जंग की, लेकिन इस बार ऑस्ट्रेलिया डेविड वार्नर और विल पुकोवस्की के आने से अधिक खतरनाक हो गई थी। हुआ भी यही मेजबान टीम ने स्टीव स्मिथ (131) के शतक, मार्नस लाबुशेन (91) और पुकोवस्की (62) की अर्धशतकीय पारियों के दम पर 338 रन बनाए। जवाब में टीम इंडिया 244 रन पर ही सिमट गई, जिसकी वजह से कंगारुओं को 94 रन की बढ़त मिल गई। दोबारा बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर से स्मिथ (81), लाबुशेन (73) और ग्रीन (84) के दम पर 300 से अधिक का स्कोर बनाया और भारत के सामने 406 रनों का विशाल लक्ष्य रख दिया। 

  • सिराज पर नस्लीय टिप्पणी 

मैच के दौरान ही भारतीय टीम को अपमान भी सहना पड़ा। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में ऑस्ट्रेलियाई दर्शकों ने मोहम्मद सिराज को अपशब्द कहे और उनपर नस्लीय टिप्पणियां भी की। इसकी वजह से मैच को भी रोकना पड़ा और बाद में छह दर्शकों को स्टेडियम से बाहर किया गया। 

  • पंत की आतिशी पारी

इन सबके बीच आखिरी दिन का खेल शुरू हुआ और भारत ने लक्ष्य का पीछा करना शुरू किया लेकिन 92 रन पर ही उसके दोनों सलामी बल्लेबाज पवेलियन लौट गए। हालांकि इसके बाद पंत को ऊपर के क्रम में भेजा गया और उन्होंने 118 गेंदों में 97 रनों की पारी खेलकर मैच का रुख बदल दिया। उन्होंने पुजारा के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 148 रन जोड़े। एक समय ऐसा लग रहा था कि मैच भारत की मुट्ठी में आ जाएगा लेकिन खेल यहां खत्म नहीं हुआ था। 

  • अश्विन-विहारी की 258 गेंदों की साझेदारी 

पंत और पुजारा दोनों 272 रन के स्कोर तक पवेलियन लौट गए थे, वहीं अंगूठे में फ्रैक्चर की वजह से जडेजा पवेलियन में ही बैठे रहे। अब भारत की तरफ से चोटिल हनुमा विहारी और रविचंद्रन अश्विन बल्लेबाजी करने उतरे। यहां टीम इंडिया के सामने अब मैच बचाने की चुनौती थी क्योंकि भारत के पास इसके बाद कोई अन्य बल्लेबाज नहीं बचा था। लेकिन यहां से दुनिया को दोनों खिलाड़ियों की जीवटता और जुझारूपन देखने को मिला। अश्विन और विहारी ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के आगे टिककर खड़े हो गए और एक भी विकेट नहीं गिरने दिया। दोनों ने पूरे दिन बल्लेबाजी की और गेंदों की अद्भुत साझेदारी की। चोट के बावजूद दोनों खिलाड़ियों ने कुल 258 गेंदें खेल डाली और मैच ड्रॉ करवा ले गए। 

गाबा में रचा इतिहास

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भारतीय क्रिकेट टीम - फोटो : twitter@BCCI

चुनौतियों से भरी टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई थी। ब्रिस्बेन में निर्णायक टेस्ट में उतरने से पहले टीम के चार प्रमुख खिलाड़ी हनुमा विहारी, जसप्रीत बुमराह, रविंद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन चोटिल होकर बाहर हो गए थे। अब रहाणे और टीम प्रबंधन के आगे सबसे बड़ी चुनौती थी बचे हुए खिलाड़ियों में से प्लेइंग इलेवन का चुनाव करना। टीम ने मैच के दिन आखिरकार चार बदलावों के साथ अपने 11 खिलाड़ियों को मैदान पर उतार दिया। इसमें नेट बॉलर वाशिंगटन सुंदर और टी नटराजन को डेब्यू का मौका दिया गया जबकि सिराज को तीसरे ही टेस्ट में गेंदबाजी आक्रमण की कमान सौंपी गई। इनके अलावा शार्दुल ठाकुर को भी मौका मिला और मयंक अग्रवाल की वापसी हुई।  

  • सुंदर और शार्दुल की रिकॉर्ड साझेदारी

बात करें मैच की तो ऑस्ट्रेलिया ने भारत के अनुभवहीन गेंदबाजों का सामना करते हुए लाबुशेन (108) की शतकीय पारी और टिम पेन के अर्धशतक की मदद से पहली पारी में 369 रन बना डाले। जवाब में भारतीय टीम एक बार फिर से लडख़ड़ा गई और 186 रन पर अपने छह विकेट गंवा दिए। इस वक्त ऐसा लग रहा था कि टीम इंडिया 200 के अंदर ही ढेर हो जाएगी और ऑस्ट्रेलिया बड़ी बढ़त हासिल कर लेगा। लेकिन तब डेब्यूटेंट वाशिंगटन सुंदर और अपना दूसरा मैच खेल रहे शार्दुल ठाकुर ने सभी को चौंका दिया। दोनों ने अपना पहला अर्धशतक लगाने के साथ 123 रनों की मजबूत साझेदारी की और टीम के स्कोर को 300 के पार ले गए और ऑस्ट्रेलिया के साथ अंतर को 33 रनों का कर दिया। 

  • सिराज के पांच विकेट 

अब दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने शुरुआत शानदार की लेकिन सिराज और शार्दुल की खतरनाक गेंदबाजी के आगे पूरी टीम 294 रन पर सिमट गई और भारत को 328 रनों का लक्ष्य दे दिया। सिराज ने तीसरी पारी में पांच तो शार्दुल ने चार विकेट चटकाए।  

  • पंत-गिल की आतिशी पारी और पुजारा का मजबूत डिफेंस 

आखिरी दिन भारत ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 18 रन पर रोहित का विकेट गंवा दिया। लेकिन इसके बाद शुभमन (91) और पुजारा (56) ने पारी को संभाला। दोनों ने मिलकर 114 रन जोड़े। इसके बाद अंत में ऋषभ पंत ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की और 138 गेंदों में नाबाद रहते हुए 89 रन बनाए और मैच भारत की झोली में डाल गए। 

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