कंगारू टीम के लिए विलन बना 'स्पाइडर कैमरा'
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आजकल मैच के दौरान स्पाइडर कैमरा अब आम बात है। सीमारेखा के बाहर फोटोग्रॉफर तस्वीरें खींचते हैं और जिन तस्वीरों को वहां से कैद करना मुश्किल होता है, उसेके लिए स्पाइडर कैमरा काम आता है।
इस तरह पूरे मैच के दौरान यह कैमरा तार की मदद से पूरे मैदान में घूमता रहता है, जिसका नियंत्रण रिमोट द्वारा संचालित होता है। लेकिन लगता है कि दर्शकों की सुविधा और मैदान के हर एक पल को तस्वीरों में कैद करने की यह जरूरत खिलाड़ियों के लिए मुश्किल पैदा करने लगी है।
2003 में इस मॉर्डन कैमरे को पहली मर्तबा प्रयोग में लाया गया था। इसके बाद टी-20 हो या वनडे या फिर टेस्ट सभी में इन्हें प्रयोग किया जाने लगा है। लेकिन अब इस कैमरे से खिलाड़ियों हो रही दिक्कतों के बाद इसके प्रयोग पर ही सवालिया निशान किया जाने लगा है। ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट (सीए) ने भी इसके प्रयोग से खिलाड़ियों को परेशानी होने की बात कही है। आइए जानते हैं कि आखिर सीए को ऐसा क्यों कहना पड़ा।
जब 'शर्मिंदा' हुए कप्तान स्टीवन स्मिथ
सिडनी मैच के दौरान स्पाइडर कैमरे से एक परेशानी देखने को मिली। इस परेशानी के चलते ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीवन स्मिथ को शर्मिंदा तक होना पड़ा। हालांकि इससे टीम इंडिया को फायदा भी पहुंचा।
दरअसल हुआ यूं कि मैच के तीसरे दिन टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज लोकेश राहुल बल्लेबाजी कर रहे थे। उनका एक कैच स्मिथ की ओर आया। गेंद हवा में काफी ऊंची थी और इत्तेफाक से स्पाइडर कैमरा भी उसी ओर घूम रहा था।
स्मिथ जैसे ही गेंद को पकड़ने के लिए तैयार हुए, स्पाइडर कैमरे के तार से उनका ध्यान भटक गया और उनके हाथ से कैच छूट गया। कैच पकड़ने की उन्होंने पूरी कोशिश की और जमीन पर भी गिर गए लेकिन कैच नहीं लपक पाए। आखिरकार उन्हें शर्मिंदा होना पड़ा। उन्होंने अंपायर से गेंद के कैमरे पर लगने की शिकायत करते हुए रिव्यू की मांग भी की लेकिन लोकेश राहुल नॉट आउट दिए गए।
इसके बाद राहुल ने अपने करियर का पहला शतक जमाया। तीसरे दिन का मैच खत्म होने के बाद ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर इस बारे में जानकारी दी। बोर्ड ने कहा कि स्मिथ हवा में लहरा रहे स्पाइडर कैमरे के कारण असहज हो गए थे और कैच नहीं लपक सके।