हार के बाद कप्तान धोनी ने बयां की अपनी लाचारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वर्ल्ड कप से करीब ढाई महीने पहले ही टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया की ओर कूच कर दिया था। क्रिकेट के महाकुंभ से पहले 4 मैचों की टेस्ट सीरीज और फिर इसके बाद टीम को त्रिकोणीय सीरीज खेलनी थी जो किसी भी विदेशी टीम के लिए स्थानीय माहौल को परखने के वास्ते काफी समय माना जा सकता है। लेकिन टेस्ट सीरीज के बाद टीम इंडिया की लय बिगड़ चुकी है और एक भी मैच अभी तक जीत नहीं सकी है।
त्रिकोणीय सीरीज में भारत को मेजबान ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड से 2-2 मैच खेलने थे जिसमें 3 में उसे हार मिली और एक मैच बारिश के कारण रद्द कर दिया गया। रद्द हुए मैच में भी खेल रोके जाने के समय तक भारतीय टीम का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा था।
सीरीज में एक भी मैच जीते बगैर ही अपना अभियान खत्म करने वाली टीम इंडिया को वर्ल्ड कप से पहले 2 वॉर्मअप मैच खेलने थे जिसमें उसे उम्मीद थी कि खिलाड़ी उम्दा प्रदर्शन कर लय हासिल करने की कोशिश करेंगे लेकिन पहले ही अभ्यास मैच में टीम की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों खराब रही। 106 रनों के अंतर से मिली हार के बाद बेबस कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के पास भी कहने या बचाव के लिए शब्द ही नहीं थे।
हालांकि धोनी की टीम को एक और अभ्यास मैच खेलना है और इस बार एक कमजोर टीम अफगानिस्तान की होगी। और उन्हें उम्मीद होगी कि कम से कम इस उभरती टीम को हराकर वर्ल्ड कप में खेलने उतरा जाए।
बेबस कप्तान धोनी ने हार पर जताई लाचारी
टेस्ट सीरीज जैसा भी प्रदर्शन भारतीय टीम नहीं कर पा रही है। एकदिवसीय प्रारूप में भारतीय क्रिकेटर अब तक नाकाम रहे हैं। बल्लेबाज तो बल्लेबाज गेंदबाज भी लय हासिल नहीं कर सके हैं।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वॉर्मअप मैच में पहले भारतीय गेंदबाजों ने 371 रन दे डाले, हालांकि वे कंगारू टीम को 50 ओवर से पहले ऑलआउट करने में जरूर कामयाब हो गए। इसके बाद बल्लेबाजों को अपना जलवा दिखाना था लेकिन बल्लेबाज भी कंगारू आक्रमण का सामना डटकर नहीं कर सके। हालांकि अंजिक्य रहाणे, शिखर धवन और अंबाती रायडु ने अर्धशतकीय पारियां जरूर खेली।
गेंदबाजी के बाद बल्लेबाजों की नाकामी की वजह से एक और हार का मुंह देखने को मजबूर हुई टीम इंडिया और उसके कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के बाद कहने को कुछ भी नहीं बचा था।
मैच के बाद कप्तान धोनी ने कहा, "जब बल्लेबाज लय में लौटते हैं तो गेंदबाज फ्लॉप हो जाते हैं और जब गेंदबाज अच्छा करते हैं तो बल्लेबाजी नहीं चल पाती। यह बेहद मुश्किल वक्त है। हमें इस समस्या का हल निकालना होगा।
उन्होंने आगे कहा, "अब हमारे पास एक और वॉर्मअप मैच है और पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले से पहले हमें अपनी अंतिम एकादश का चयन करना ही होगा। हालांकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले से हमें कई सकारात्मक बातें हासिल हुईं। अगर पिचें इसी तरह की रहती हैं तो हमें स्पिनरों की जरूरत होगी ताकि वो पिच से उछाल हासिल कर सकें।"
तब धोनी ने दोस्त के साथ TV को लेकर किया था झगड़ा
महेंद्र सिंह धोनी भले ही लगातार हार से निःशब्द हों लेकिन एक बेटी के पापा के बनने के बाद अब उनके संघर्ष पर एक किताब बाजार में आने वाली है जिसमें उनके बारे में कई खास बातें बताई गई हैं। पत्रकार और लेखक विश्वदीप घोष ने अपनी किताब ‘एमएसडी, द मैन, द लीडर’ में रांची के इस खिलाड़ी की भारत के सबसे सफल कप्तान बनने की यात्रा का जिक्र किया है।
धोनी की चार साल पहले वानखेड़े स्टेडियम में वर्ल्ड कप ट्रॉफी थामकर खुशी जताने की तस्वीर सभी को याद होगी लेकिन यह बहुत कम लोग यह जानते हैं कि यह स्टार खिलाड़ी कभी खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर टिकट कलेक्टर हुआ करता था। पान सिंह और देवकी देवी के बेटे धोनी मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखते थे और उन्हें अपने क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने के लिए नौकरी करनी पड़ी थी।
बिहार की तरफ से कूच बिहार ट्रॉफी में अंडर-19 क्रिकेट खेल चुके धोनी नौकरी की खातिर पश्चिम बंगाल के खड़गपुर चले गए जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और सबसे लंबे प्लेटफार्म के लिए मशहूर था। दक्षिण पूर्वोत्तर रेलवे (एसईआर) के तत्कालीन मंडल रेल प्रबंधक और क्रिकेट प्रेमी स्वर्गीय अनिमेश गांगुली को तब ऐसे ट्रेन टिकट निरीक्षक (जिसे अमूमन टीटीई या टिकट कलेक्टर कहा जाता है) की तलाश थी जो क्रिकेटर हो और एसईआर की टीम से भी खेल सके।
धोनी ने न सिर्फ टीटीई की परीक्षा उत्तीर्ण की बल्कि वह एसईआर टीम का अहम हिस्सा भी बन गए। यह कल्पना करना मुश्किल है कि कभी भारतीय कप्तान ने टिकटों की जांच की होगी लेकिन किताब के अनुसार यह विकेटकीपर बल्लेबाज न सिर्फ पूरी ईमानदारी से अपना काम करता था बल्कि उन्होंने टेनिस बाल क्रिकेट खेलकर खड़गपुर में अपनी पहचान भी बना दी थी।
स्टेशन में कई घंटे बिताने के बाद धोनी टेनिस बाल क्रिकेट खेला करते थे जिसे इस क्षेत्र में ‘खेप’ कहा जाता है। धोनी कुछ चोटी के क्लबों से खेला करते थे और रिपोर्टों के अनुसार वह प्रत्येक मैच के लिए 2000 रुपये लिया करते थे लेकिन लेखक का कहना है कि यह स्टार खिलाड़ी आयोजकों के साथ सौदेबाजी नहीं करता था।
अमूमन शांत और एकाग्रचित रहने वाले धोनी के बारे किताब में लिखा गया है कि टीवी चैनल बदलने को लेकर एक बार धोनी की अपने साथी (रूममेट) दीपक के साथ झगड़ा हो गया था। झगड़ा इतना बढ़ गया था कि टेलीविजन को नुकसान पहुंच गया और धोनी को नौकरी दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले और उस कमरे में रहने वाले उनके एक अन्य साथी सत्यप्रकाश कृष्णा ने बीच बचाव किया। धोनी तब शारजाह कप मैच देखना चाह रहे थे जबकि दीपक अमिताभ बच्चन की ‘मुकद्दर का सिकंदर’ देखने में व्यस्त था।
लगता है कि खड़गपुर में चार साल के प्रवास के दौरान धोनी की मैदान से बाहर की यह एकमात्र ऐसी घटना थी जब वह गुस्सा गए थे। इसके अलावा उनकी क्रिकेट के चर्चे ही यहां अधिक होते हैं।