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टीम इंडिया ने तो बटोरे 100 में से 100 लेकिन एक खिलाड़ी के हाथ लगा जीरो

Shivendra Kumar Singh शिवेंद्र कुमार सिंह
Updated Mon, 03 Feb 2020 10:09 AM IST
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Sanju Samson could not utilize the golden opportunity on T20I series vs New Zealand
संजू सैमसन - फोटो : ट्विटर

अमूमन जब टीम ने 5-0 से सीरीज जीती हो तो छोटे-मोटे नकारात्मक पहलुओं को नजरअंदाज किया जाता है। इसलिए कल शाम मिली जीत के बाद से आज तक हर तरफ इस बात की चर्चा है कि टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड में इतिहास रच दिया। इस चर्चा में कोई बुराई नहीं। ये वाकई टीम इंडिया की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन आदर्श स्थिति तब होगी जब सीरीज के दौरान दिखी कमियों पर भी चर्चा कर ली जाए।

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न्यूजीलैंड में भारतीय टीम की इस ऐतिहासिक जीत में भी एक कमी दिखाई दी। विराट कोहली ने प्रतिभाशाली विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन को दो मौके दिए। दोनों बार संजू सैमसन हाथ आए मौके को भुनाने में नाकाम रहे।
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टी-20 सीरीज के चौथे मैच में विराट कोहली ने रोहित शर्मा को आराम देकर संजू सैमसन को प्लेइंग 11 में मौका दिया था। आखिरी मैच में तो वो खुद प्लेइंग 11 से बाहर बैठे जिससे संजू सैमसन के लिए जगह बनी रहे।
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खास बात ये भी है कि दोनों ही मैचों में संजू सैमसन को टीम में बतौर ओपनर जगह दी गई थी। उन्हें विकेटकीपिंग करने को नहीं कहा गया क्योंकि ये जिम्मेदारी केएल राहुल बखूबी निभाना शुरू कर चुके हैं।

विराट कोहली बतौर कप्तान इस बात का आंकलन करना चाहते थे कि संजू सैमसन की आक्रामक ओपनर बल्लेबाज की जो छवि है वो उस पर कितने खरे उतरते हैं. लेकिन संजू सैमसन किसी को प्रभावित नहीं कर पाए।

चौथे टी-20 में उन्होंने 8 रन बनाए थे और पांचवें टी-20 में तो वो 2 रन बनाकर ही पवेलियन लौट गए। कई बार ऐसा होता है कि बड़े प्रतिभाशाली खिलाड़ी को भी कुछ ही पारियों के आधार पर आंका जाता है। टीम इंडिया का समीकरण इन दिनों जिस तरह का है उसमें संजू सैमसन के साथ भी अगर ऐसा ही हो तो चौंकने की जरूरत नहीं है।

संजू सैमसन से कहां हुई गलती       

Sanju Samson could not utilize the golden opportunity on T20I series vs New Zealand
संजू सैमसन - फोटो : बीसीसीआई

ये ठीक है कि टी-20 फॉर्मेट में आक्रामक बल्लेबाजी करनी होती है। बेहतर स्ट्राइक रेट वाले बल्लेबाजों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन इन दोनों बातों का ये मतलब कतई नहीं कि क्रीज पर वक्त ना बिताया जाए। बेवजह शॉट्स खेले जाएं। पहले मैच में संजू सैमसन ने यही गलती की। वो केएल राहुल के साथ सलामी बल्लेबाजी करने उतरे, उन्होंने 1 छक्का लगाया। इसके तुरंत बाद सीधे शॉट न खेलने की गलती उन्हें भारी पड़ी।

‘एक्रॉस बैट’ खेला गया उनका शॉट टॉप एज था जो सीधे सैंटनर के हाथों में गया। टीम मैनेजमेंट ने उनके इस गैर जिम्मेदार शॉट को इसलिए नजरअंदाज किया क्योंकि उन्हें और मौका देना जरूरी था। पांचवें मैच में इसलिए उन्हें दोबारा सलामी बल्लेबाज के तौर पर भेजा गया कि वो अपना समय लेने के बाद मनमाफिक शॉट्स खेलेंगे। इस बार फिर स्कॉट कुग्गेलैन ने उन्हें पवेलियन भेजा। एक बार फिर कैच मिचेल सेंटनर ने लपका। ऐसा लगा कि पिछले मैच का एक्शन रीप्ले देखने को मिला है।

दूसरे मैच में संजू सैमसन ने शरीर और बल्ले में अच्छी खासी दूरी रखते हुए गेंद को ड्राइव करने की कोशिश की थी। ये शॉट देखकर उनकी घरेलू टीम से लेकर उनकी आईपीएल टीम के कोचों को भी अफसोस हुआ होगा क्योंकि ये कहीं से भी अच्छा शॉट नहीं था। नतीजा शॉर्ट कवर पर मिचेल सैंटनर के एक आसान कैच लपका। लगातार दूसरे मैच में गलती के बाद संजू सैमसन पर फिर से टीम मैनेजमेंट भरोसा करेगा इसकी उम्मीद कम ही दिखती है।

अब संजू सैमसन को कैसे फिट करेंगे 

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भारत बनाम न्यूजीलैंड - फोटो : पीटीआई

संजू सैमसन के लिए आने वाली दिक्कत अभी से ही इसलिए दिखाई देने लगी है क्योंकि टीम इंडिया मैनेजमेंट उन्हें रिजर्व विकेटकीपर के तौर पर देख रही थी। उन्हें ऋषभ पंत के लगातार फेल होने के बाद ये जिम्मेदारी देने की बात चल रही थी। मकसद ये था कि आने वाले मैचों में कहीं अगर जरूरत पड़ जाए तो रिजर्व विकेटकीपर टीम के पास रहे और कीपिंग का जिम्मा संभाले।

फुलटाइम विकेटकीपर के तौर पर संजू के नाम पर चर्चा का प्रश्न नहीं उठता क्योंकि बतौर विकेटकीपर अभी टीम इंडिया केएल राहुल के साथ ही जाएगी। इस बात का एलान खुद कप्तान कर चुके हैं। इन परिस्थितियों के मद्देनजर अब संजू सैमसन की स्थिति को समझिए तो मामला पेचीदा हो जाता है। अब से लेकर टी-20 विश्व कप तक जिस एक रिजर्व विकेटकीपर की तलाश टीम को थी वो पूरी नहीं हुई है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें  blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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