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क्या है सचिन की आगे की प्लानिंग?

Mon, 18 Nov 2013 12:34 PM IST
एंडयू नॉर्थ
एंडयू नॉर्थ Updated Mon, 18 Nov 2013 12:34 PM IST
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सचिन तेंदुलकर ने रिटायरमेंट के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में कुछ नहीं कहा, प्रश्न को टाल गए। ख़ास बातचीत में उन्होंने बताया कि वो भारत के गांवों में फैले अंधेरे को सौर ऊर्जा के जरिए मिटाने के लिए प्रयास करेंगे।

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सचिन आपने संन्यास क्यों लिया?

मुझे लगता है कि 24 साल बाद आपका शरीर भी शिक़ायत करने लगता है। हर सुबह उठकर ये महसूस करना आसान नहीं होता कि आपका शरीर चुस्त-दुरुस्त हैं।

एक समय आता है जब शरीर कहता है कि अब बस, बहुत हो गया, अब आराम की ज़रूरत है।

आप क्रिकेट में इतनी बड़ी शख़्सियत आख़िर कैसे बन गए?

इसकी वजह मुझे भी नहीं पता। शायद लोगों को तरीक़ा पसंद आता है।

सुनील गावस्कर और विवियन रिचर्ड्स मेरे हीरो रहे हैं। इन्हीं की वजह से मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया था। मैं उन्हीं की तरह बनना चाहता था।

मुझे छह-सात साल की उम्र में ही क्रिकेट से मोहब्बत हो गई थी। फिर मैंने 11 साल की उम्र में तय किया कि मैं बढ़िया क्रिकेट खेलूंगा।

जब भारत ने पहली बार विश्वकप जीता तो लगा कि मुझे भी ऐसा ही करना है। क्रिकेट का मेरा सफ़र यहीं से शुरू हुआ। इसके बाद मैंने कुछ और नहीं सोचा।

लेकिन जो लोग आपको देखते हैं, वो कुछ और ही सोचते हैं, आपकी पूजा करते हैं। कैसा महसूस करते हैं आप?
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जब मैंने क्रिकेट से संन्यास लेने का फ़ैसला किया, मुझे नहीं पता था कि लोग इस तरह प्रतिक्रिया देंगे।

सच तो ये है कि यह सब मैंने तय नहीं किया, इसकी पटकथा ऊपर वाले ने लिखी थी। मैंने कोई योजना नहीं बनाई, बस सब होता चला गया। लोगों ने मेरा सफ़र ख़ास बना दिया।
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आपके चाहने वाले आपके लिए जिस तरह से उत्तेजित होते हैं, आपको क्या लगता है, ये बड़ा ख़तरनाक है?

मुझे नहीं लगता कि लोग आपके लिए शुभकामनाएं दें, ये कोई ख़तरनाक बात है। इससे मुझे मैदान में हर बार बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलती है।

करोड़ों लोग मुझे चाहते हैं, मुझे लगता है कि मैं बड़ा ख़ुशनसीब हूं।

आपको शॉपिंग करने का बड़ा शौक है?

नहीं ऐसी भी बात नहीं है। मैं जानता हूं कि एक आम आदमी यहां भारत में जो कुछ कर सकता है, वो सब मैं नहीं कर सकता हूं।

दूसरा पहलू ये है कि इसकी वजह से मुझे कुछ विशेषाधिकार हासिल हैं।

भारत में आप सबसे मशहूर हैं, दुनिया में भी आपका नाम है। आप इस मंच का इस्तेमाल करते हुए क्या करना चाहेंगे?

एक काम मैंने शुरू भी कर दिया है जो मेरे दिल के बड़े क़रीब है। मैं पूरे देश में रोशनी पहुंचाना चाहता हूं।

भारत में ऐसे कई दूर-दराज के इलाके हैं जहां सूरज डूबने के बाद रोशनी का इंतज़ाम नहीं है। मैं इन इलाकों में सौर प्रकाश पहुंचाना चाहता हूं।

हम वहां स्कूल भी बनाना चाहते हैं। इसके पीछे विचार ये है कि ख़ुशी को इन लोगों तक पहुंचाया जा सके।

आपको चाहने वालों की कमी नहीं है, इस चाहत के प्रति आप कुछ ज़िम्मेदारी महसूस करते हैं?

जब तक मैं क्रिकेट खेल रहा था, मेरे पास अधिक समय नहीं था। अब मेरे पास समय है और मैं पक्के तौर पर कुछ चीजें करना चाहूंगा। रोशनी पहुंचाना उनमें से एक काम है।


ये सिर्फ मुझ तक सीमित नहीं है, पूरा देश इसमें शामिल हो सकता है। ये बुनियादी ज़रूरत है ताकि बच्चे रात में पढ़ सकें।

मैं ये नहीं कह रहा कि सरकार ये नहीं कर सकती, ये हम सबकी पहल होनी चाहिए।

आप राज्यसभा के सदस्य हैं। क्या कहेंगे इस बारे में?

ये मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है। मेरा निर्वाचन नहीं हुआ था, मुझे नामित किया गया था। इसके पीछे की बात मुझे नहीं पता।

जिस पहल का मैंने अभी ज़िक्र किया वो सांसद होने के नाते नहीं है।

सांसद के नाते मैंने सरकार को अपनी राय से अवगत कराया है कि हम खेलों के क्षेत्र में अगले 20 साल में क्या कर सकते हैं। इस पर अमल होने में वक्त लगेगा, धैर्य रखने की ज़रूरत है।

भारत आमतौर पर खेलों में बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं करता है। इसमें आप क्या मदद करेंगे?

भारत में प्रतिभाएं हैं, इस बात पर मुझे पूरा भरोसा है। भारत खेलों में अच्छा प्रदर्शन नहीं करता है, ये ग़लत धारणा है क्योंकि हम पदक जीत रहे हैं।

ये पदक हवा में उड़कर तो आते नहीं है, इसके लिए कड़ी मेहनत और समर्पण की ज़रूरत होती है।

भारतीय खिलाड़ियों को मेरा सलाम जो कई कुर्बानियां देकर इन पदकों को देश में लाते हैं। इन सभी खिलाड़ियों पर मुझे गर्व है।

जहां तक और पदक जीतने की, लोगों को और ख़ुश बनाने की बात है, इसके लिए ठोस बुनियाद की ज़रूरत है, इसके लिए जिस दृष्टि की ज़रूरत है, वो 20 साल के लिए नहीं बल्कि इससे आगे की होनी चाहिए।

क्रिकेट की छवि उतनी अच्छी नहीं है, क्या इस से आपको दुख पहुंचता है और इसे साफ़ करने के लिए क्या किया जाना चाहिए?

खेल में जब कुछ अवांछित होता है तो दुख तो होता ही है। ये व्यक्तिगत है कि आप कैसे सोचते हैं।

इसे रोकने के लिए आप कुछ क़दम उठा सकते हैं, लेकिन क़दम भी व्यक्तिगत ही हो सकते हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि टीम इस मामले में काम कर रही है।

मैं कोई विशेषज्ञ नहीं हूं उन्हें सलाह देने के लिए कि क्या करना चाहिए। आईसीसी हर संभव क़दम उठा रही है ताकि खेल साफ-सुथरा बना रहे और दर्शकों को वाकई ये लगे कि कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है।

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