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Temba Bavuma: जिस देश में अश्वेत क्रिकेटर गेंदबाज बनते हैं, वहां बैटर कैसे बने बावुमा? दादी ने दिया तेम्बा नाम

Sat, 14 Jun 2025 05:17 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: स्वप्निल शशांक Updated Sat, 14 Jun 2025 05:17 PM IST
सार

दक्षिण अफ्रीका की टीम पहली बार किसी प्रारूप की चैंपियन बनी और वह भी एक अश्वेत कप्तान के रहते। एक अश्वेत कप्तान जो कि दक्षिण अफ्रीका की बल्लेबाजी का रीढ़ भी है। 35 साल के बावुमा ने इतिहास रच दिया है, लेकिन इसके लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। आइए उनकी कहानी जानते हैं...

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SA vs AUS WTC Final 2025 South Africa Captain Temba Bavuma Life Story Name Meaning Journey to Cricketer
तेंबा बावुमा - फोटो : PTI

विस्तार

दक्षिण अफ्रीका की टीम ने विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2023-25 का खिताब जीत लिया है। फाइनल में दक्षिण अफ्रीका ने गत विजेता ऑस्ट्रेलिया को पांच विकेट से हरा दिया। 282 रन के लक्ष्य को दक्षिण अफ्रीका ने पांच विकेट गंवाकर हासिल कर लिया। दक्षिण अफ्रीका की जीत में एडेन मार्करम और कप्तान तेम्बा बावुमा ने अहम भूमिका निभाई। मार्करम ने शतक लगाया, जबकि बावुमा ने अर्धशतक जड़ा और 134 गेंद में पांच चौके की मदद से 66 रन की पारी खेली। दक्षिण अफ्रीका की टीम पहली बार किसी प्रारूप में विश्व चैंपियन बनी है और इसके कप्तान रहे बावुमा। इससे पहले 1998 में हैंसी क्रोन्ये की कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका की टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी।
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विश्व क्रिकेट में एक मजबूत कप्तान बनकर उभरे बावुमा
बावुमा विश्व क्रिकेट में एक मजबूत कप्तान बनकर उभरे हैं। टीम ने पिछले तीन साल में चार में से चार आईसीसी टूर्नामेंट्स में अच्छा प्रदर्शन किया और इनमें से तीन में बावुमा कप्तान रहे। इनमें 2023 वनडे विश्व कप (सेमीफाइनल), 2025 चैंपियंस ट्रॉफी (सेमीफाइनल) और 2025 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल (चैंपियन) शामिल है। बावुमा ने मार्करम के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 250 गेंद में 147 रन की साझेदारी निभाई। उन्हें हैमस्ट्रिंग में चोट लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और खेलते रहे और अपनी टीम को मजबूत स्थिति में ले जाकर छोड़ा। 
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अश्वेत कप्तान के रहते पहली बार चैंपियन बनी दक्षिण अफ्रीका की टीम
दक्षिण अफ्रीका की टीम पहली बार किसी प्रारूप की चैंपियन बनी और वह भी एक अश्वेत कप्तान के रहते। एक अश्वेत कप्तान जो कि दक्षिण अफ्रीका की बल्लेबाजी का रीढ़ भी है। 35 साल के बावुमा का प्रदर्शन बल्ले से पिछले कुछ आईसीसी टूर्नामेंट्स में अच्छा नहीं रहा था और उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, लेकिन यहां डब्ल्यूटीसी फाइनल में उन्होंने आलोचकों को करारा जवाब दिया।

एक ऐसा देश जहां अश्वेत क्रिकेटर को सिर्फ एक गेंदबाज के तौर पर देखा जाता है, वहां बावुमा को एक बल्लेबाज बनने के लिए काफी कठिनाइयां उठानी पड़ीं। उनके जज्बे ने उन्हें हार नहीं मानने दिया। इसका जिक्र खुद टीम के पूर्व ओपनर और दक्षिण अफ्रीकी टीम के मौजूदा बल्लेबाजी कोच एश्वेल प्रिंस ने किया। उन्होंने कहा कि बावुमा ने अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में कप्तान बनने तक के लिए काफी चुनौतियों का सामना किया है। आइए उनके संघर्ष की कहानी जानते हैं...
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दादी ने नाम दिया-तेम्बा, इसका मतलब 'उम्मीद'
बावुमा के ही मुताबिक तेम्बा नाम उन्हें अपनी दादी से से मिला है। उनकी दादी ने उन्हें ये नाम दिया है और इसका एक खास मतलब होता है। उन्होंने बताया कि तेम्बा का मतलब होता है उम्मीद। इस मतलब के चलते ही दादी ने उनका ये नाम भी रखा था। तेम्बा ने दादी के दिए नाम को सही साबित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी और वह वाकई दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेट के लिए उम्मीद की किरण बने।

छठी कक्षा में ही बता दिया था बड़े होकर क्या बनेंगे!
साल 2001 में केपटाउन स्थित प्रतिष्ठित दक्षिण अफ्रीकी कॉलेज स्कूल (एसएसीएस) के छठी कक्षा के विद्यार्थियों को एक प्रोजेक्ट दिया गया। उन्हें बताना था कि वह अपने आप को 15 वर्षों में कहां देखते हैं? तब एक 11 साल के लड़के ने एक ऐसा निबंध लिखा, जिसे स्कूल के मैगजीन ें जगह मिली। तब छठी कक्षा में रहे बावुमा ने अपने निबंध में लिखा, 'मैं खुद को 15 साल बाद एक बढ़िया से सूट में देखता हूं और (तत्कालीन दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति थाबो) खुद को मबेकी से हाथ मिलाता हुआ देखता हूं। वह मुझे दक्षिण अफ्रीकी टीम में शामिल होने के लिए बधाई दे रहे हैं। यदि मैं ऐसा करने में कामयाब रहता हूं तो मैं निश्चित रूप से अपने प्रशिक्षकों और माता-पिता को धन्यवाद देना चाहूंगा जिन्होंने मुझे हर तरह से सहयोग दिया और विशेष रूप से अपने दो अंकल को धन्यवाद देना चाहूंगा, जिन्होंने मुझे क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए हिम्मत दी।'

15 साल बाद अपने सपने को पूरा किया और जड़ दिया शतक
कई लोगों के लिए यह निबंध एक किशोर की महज कल्पना दिखी, जिसने भावुक होकर निबंध लिखा, लेकिन ठीक 15 साल बाद जब 2016 में बावुमा टेस्ट क्रिकेट में शतक बनाने वाले पहले अश्वेत दक्षिण अफ्रीकी बने, तो सब हैरान रह गए। तब मबेकी राष्ट्रपति पद से हट चुके थे, लेकिन पांच फुट दो इंच लंबे बावुमा ने अपने सपनों को सच करके दिखाया और उन्होंने जो कहा वो करके दिखाया। उन्होंने इस सपने को पूरा करने के लिए काफी मेहनत की। खेलों से रंगभेद की समाप्ति के तीन दशक बाद भी उन्हें कई बार मैदान पर नस्लीय टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। जाने-अनजाने में बावुमा, जो कि दक्षिण अफ्रीका के पहले स्थायी अश्वेत कप्तान हैं, राष्ट्रीय टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वह न केवल अपनी टीम और युवाओं के लिए आइकन हैं, बल्कि एक ऐसे समाज के लिए आशा की किरण हैं जो शोषितों के लिए अधिक समावेशी बनने की कोशिश कर रहा है।

द. अफ्रीकी टीम पहले भी मजबूत रही, लेकिन अब हटा चोकर्स का टैग
दक्षिण अफ्रीका की टीम इतनी मजबूत स्थिति में पहली बार नहीं है। 1990 के दशक के अंत में दक्षिण अफ्रीका की 'गोल्डन जेनरेशन' ने चैंपियंस ट्रॉफी अपने नाम किया और राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक जीता, लेकिन इन दोनों से ज्यादा चर्चा दक्षिण अफ्रीकी टीम के 1996 और 1999 विश्व कप से बाहर निकलने की हुई। इतना काफी नहीं था तो 1992 और 2003 में बारिश से की वजह से दिल तोड़ देने वाली हार ने दक्षिण अफ्रीका को खूब सुर्खियां दिलाईं। फिर 2011, 2015...2024...यह एक नया नॉर्मल बन गया। कारण कई रहे। इनमें डकवर्थ लुईस नियम, चोकर्स का टैग, ग्रांट इलियट की बल्लेबाजी और सूर्यकुमार यादव का कैच जैसे कई कारण शामिल हैं। हालांकि, अब यह टीम बावुमा के नेतृत्व में इन सभी बीती बातों और बुरी यादों को भुलाने को तैयार है। अब यह टीम चोकर्स नहीं टेस्ट में विश्व चैंपियन बन गई है।

तेम्बा ने इस तरह बदला दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट को
1992 के बाद से, जिस वर्ष दक्षिण अफ्रीका की टीम ने टेस्ट क्रिकेट में वापसी की, वे किसी भी अन्य टीम की तरह अच्छे रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका सभी प्रारूपों में एक असाधारण और अविश्वसनय क्रिकेट टीम रही है। हालांकि, रंगभेद की वजह से यह टीम काफी चर्चा में रही। दक्षिण अफ्रीका में अश्वेतों की बहुलता होने के बावजूद, 1991 से 2020 तक दक्षिण अफ्रीका की टीम ने सभी प्रारूपों में 335 कैप बांटी हैं, जिनमें से दो तिहाई से ज्यादा (225) श्वेत खिलाड़ियों को और 10% से ज्यादा (38) अश्वेत अफ्रीकी खिलाड़ियों को मिली हैं। रंगीन खिलाड़ी कुल का 16% (54) हैं और भारतीय विरासत (इंडियन हैरिटेज जैसे हाशिम अमला) के खिलाड़ी 5% से थोड़ा ज्यादा (18) बनाते हैं। हालांकि, डीन एल्गर और फिर बावुमा के कप्तान बनने के बाद रंगभेद लगभग खत्म हो चुका है। इन दोनों ने खिलाड़ियों को एकजुट होकर रहने और सिर्फ एक मकसद...देश के लिए खेलने को लेकर जोर दिया।

अश्वेत क्रिकेटरों को गेंदबाज के तौर पर देखा जाता है
बावुमा अश्वेत दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेटरों के लिए पहले रोल मॉडल नहीं हैं। उनसे पहले मखाया नतिनी, वर्नोन फिलेंडर और एश्वेल प्रिंस भी टीम में रह चुके हैं। इसके अलावा मौजूदा टीम में कगिसो रबाडा और लुंगी एनगिडी भी अश्वेत खिलाड़ी हैं। हालांकि, बावुमा और प्रिंस को छोड़कर बाकी के सभी क्रिकेटर गेंदबाज रहे हैं। प्रिंस का करियर शानदार रहा, लेकिन वह लंबे समय या फिर यूं कहें स्थायी कप्तान नहीं बन सके। हालांकि, बावुमा को स्थायी कप्तान बनाया गया। ऐसा कहा जाता है कि दक्षिण अफ्रीका के अश्वेत क्रिकेटरों से बल्लेबाजी नहीं बल्कि गेंदबाजी की उम्मीद की जाती है। वहां के लोग ऐसा कहते हैं कि अश्वेत क्रिकेटर यानी वह खिलाड़ी गेंदबाज ही होगा और इस धारणा को बावुमा ने तोड़ा है।

अश्वेत क्रिकेटरों को बल्लेबाजी नहीं सिखाई जाती है
दक्षिण अफ्रीका के ही एक अश्वेत बल्लेबाज सिनेथेम्बा केशिले ने क्रिकेट के बाइबल कहे जाने वाले मैगजीन 'विजडन' को बताया, 'एक स्टीरियोटाइप है कि अश्वेत खिलाड़ियों को गेंदबाज होना चाहिए।' सिनेथेम्बा 2019 में दक्षिण अफ्रीका के लिए खेले थे और अभी भी दक्षिण अफ्रीका-ए के लिए खेलते हैं। बहुत से अश्वेत क्रिकेटरों को काफी समय तक यह तक नहीं सिखाया जाता है कि बल्लेबाजी कैसे करनी है। बावुमा को जब यह बताया गया कि वह दक्षिण अफ्रीका के लिए टेस्ट में शतक लगाने वाले पहले अश्वेत क्रिकेटर हैं तो उन्हें पहले कुछ समय नहीं आया था। हालांकि, जब उन्हें यह बात बाद में समझ आई और उन्होंने कहा, 'आप अतीत में कुछ लोगों द्वारा किए गए त्याग को अनदेखा नहीं कर सकते ताकि मेरे जैसे लोगों को वह अवसर मिले जिनके हम हकदार हैं।'

बावुमा का अंतरराष्ट्रीय करियर
बावुमा ने अब तक दक्षिण अफ्रीका के लिए 64 टेस्ट, 48 वनडे और 36 टी20 खेले हैं। टेस्ट में उनके नाम 38.23 की औसत से 3708 रन, वनडे में 41.98 की औसत से 1847 रन और टी20 में 118.17 के स्ट्राइक रेट से 670 रन हैं। टेस्ट में बावुमा ने चार शतक और 25 अर्धशतक लगाए हैं, जबकि वनडे में पांच शतक और सात अर्धशतक लगाए हैं। बावुमा एक बेहतर टेस्ट बल्लेबाज के रूप में विकसित हुए हैं और इसमें कोई दो राय नहीं है। हालांकि, अन्य भूमिकाओं में भी वह शानदार रहे हैं। बावुमा न केवल दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत टेस्ट कप्तान हैं, बल्कि उन्होंने अभी तक अपनी कप्तानी में एक भी टेस्ट मैच नहीं गंवाया है। उनकी कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका ने 10 टेस्ट में से नौ में जीत हासिल की है, जबकि एक मैच ड्रॉ रहा।

लैंगा के बावुमा ने इस तरह अपने समुदाय को बनाया सशक्त
तेम्बा का घर केप टाउन के पास एक छोटे से शहर लैंगा में है। इस शहर और यहां के अश्वेत दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ियों ने रंगभेद के दिनों में काफी कुछ झेला है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। 1927 के 'अर्बन सीलिंग एक्ट' के मुताबिक, यह एक ऐसा इलाका था जो गरीब अश्वेत दक्षिण अफ्रीकी के रहने के लिए था। इसका अपना सामाजिक-राजनीतिक इतिहास है और वहां तेम्बा के पिता वुयो एक पत्रकार थे। तेम्बा की मां ने उनका हमेशा समर्थन किया। स्थानीय भाषा में लैंगा का अर्थ है 'सूर्य' और बावुमा के जीवन में सूर्य की तरह ही चमकना लिखा था। बावुमा से पहले भी लैंगा ने कई खिलाड़ी दिए, लेकिन देश का नेतृत्व किसी ने नहीं किया। एक प्रमुख खिलाड़ी और कप्तान के रूप में बावुमा के उभरने ने अश्वेत समुदाय को सशक्त बनाया है। बावुमा अपनी सामाजिक स्थिति से पूरी तरह वाकिफ भी हैं।

घुटने के बल नहीं बैठने वाले डिकॉक का इस तरह किया था समर्थन
हालांकि, बावुमा ने बतौर कप्तान कभी किसी पर अश्वेत का सम्मान करने के लिए दबाव नहीं डाला। 2021 में टी20 विश्व कप के दौरान जब क्विंटन डिकॉक ने 'ब्लैक लाइव्स मैटर' के समर्थन में अश्वेत क्रिकेटरों के लिए घुटने के बल बैठने से इनकार कर दिया था। तब बावुमा ही थे जिन्होंने उनका खूब समर्थन किया था। बावुमा ने तब कहा था, 'आपको क्विंटन द्वारा लिए गए निर्णय का सम्मान करना होगा, चाहे आप उससे सहमत हों या नहीं।' डिकॉक अपने कप्तान के ऐसा कहने से इतना प्रभावित हुए कि इसी टूर्नामेंट में श्रीलंका के खिलाफ शारजाह में मुकाबले के दौरान वह घुटने के बल बैठे और गलती स्वीकार की।

'दक्षिण अफ्रीका के कप्तान...'
पूरे देश को एकजुट करने वाले पिछले दक्षिण अफ्रीकी कप्तान रग्बी के फ्रेंकोइस पीनार थे, जो एक श्वेत व्यक्ति थे। उन्होंने स्प्रिंगबोक्स को 1995 के प्रसिद्ध रग्बी विश्व कप में खिताब दिलाया था। तब राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला ने पुरस्कार वितरण समारोह में पीनार की जर्सी नंबर की पहनी थी। दक्षिण अफ्रीकी अब सपना देख रहे हैं कि बावुमा भी देश के लिए कुछ ऐसा ही करेंगे। चोकर्स का टैग हटाकर बावुमा ने पहला कदम बढ़ा भी दिया है। वह एक भावुकऔर स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि वह सिर्फ पहले अश्वेत दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट कप्तान के रूप में नहीं जाने जाना चाहते, वह दक्षिण अफ्रीका के कप्तान के रूप में जाने जाना चाहते हैं।

साल 2025 नए चैंपियंस का साल
साल 2025 कई मायनों में शानदार रहा है। इस साल कई टीमों का सूखा समाप्त हुआ। होबार्ट हरिकेंस ने बीबीएल और आरसीबी ने आईपीएल में खिताबी सूखा खत्म किया। बोलोग्ना ने कोप्पा इटालिया, क्रिस्टल पैलेस ने एफए कप, पेरिस सेंट-जर्मेन ने UEFA चैंपियंस लीग और टोटेनहम ने यूरोपा लीग का खिताब पहली बार जीता। एनबीए के पास भी ओक्लाहोमा सिटी के रूप में नया चैंपियन है। अब इस फहरिस्त में दक्षिण अफ्रीका और तेम्बा बावुमा भी शामिल हो चुके हैं।
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