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इनसे मिलिए, ये हैं टीम इंडिया के घर के 'शेर'
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 22 Dec 2014 06:54 PM IST
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हम आपको टीम इंडिया के उस बल्लेबाज से मिलाते हैं जो घर में तो 'शेर' होता है लेकिन बाहर जाते ही वह 'भीगी बिल्ली' बन जाता है। आलोचक यहां तक कहते हैं कि इस बल्लेबाज को चयनकर्ताओं ने जितने मौके दिए उतने मौके अन्य किसी युवा क्रिकेटर को मिले होते तो वह एक महान क्रिकेटर बन चुका होता।
उस बल्लेबाज ने अपने घरेलू मैदान पर टेस्ट और वनडे क्रिकेट में जमकर रन बनाए हैं, जिसमें 50-50 ओवर के खेल में उनके नाम 2 दोहरा शतक भी है। यह एक ऐसी उपलब्धि है जिसके करीब दुनिया का कोई भी अन्य क्रिकेटर नहीं पहुंच सका है। साथ ही उसने जब टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया तो उसने पहले ही मैच में 177 रनों की पारी खेल डाली। उनकी यह पारी देखकर उनके कई प्रशंसक मुखर हो गए और कहने लगे कि इस बल्लेबाज को और पहले टेस्ट क्रिकेट में शामिल करना चाहिए था।
ऊपर जिन शानदार पारियों की चर्चा की गई है उसे पढ़कर आपने यह आइडिया तो लगा ही लिया होगा कि किसकी बात हो रही है। यहां चर्चा हो रही है दाएं हाथ के बल्लेबाज रोहित शर्मा की। रोहित ने पहले टेस्ट में 177 रन और वनडे में 2 दोहरे शतक लगाए हैं लेकिन उनके ये सभी रिकॉर्ड घरेलू मैदान पर ही बने हैं। विदेशी सरजमीं पर उनके बल्ले से रन ही नहीं निकलते हैं।
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उस बल्लेबाज ने अपने घरेलू मैदान पर टेस्ट और वनडे क्रिकेट में जमकर रन बनाए हैं, जिसमें 50-50 ओवर के खेल में उनके नाम 2 दोहरा शतक भी है। यह एक ऐसी उपलब्धि है जिसके करीब दुनिया का कोई भी अन्य क्रिकेटर नहीं पहुंच सका है। साथ ही उसने जब टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया तो उसने पहले ही मैच में 177 रनों की पारी खेल डाली। उनकी यह पारी देखकर उनके कई प्रशंसक मुखर हो गए और कहने लगे कि इस बल्लेबाज को और पहले टेस्ट क्रिकेट में शामिल करना चाहिए था।
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ऊपर जिन शानदार पारियों की चर्चा की गई है उसे पढ़कर आपने यह आइडिया तो लगा ही लिया होगा कि किसकी बात हो रही है। यहां चर्चा हो रही है दाएं हाथ के बल्लेबाज रोहित शर्मा की। रोहित ने पहले टेस्ट में 177 रन और वनडे में 2 दोहरे शतक लगाए हैं लेकिन उनके ये सभी रिकॉर्ड घरेलू मैदान पर ही बने हैं। विदेशी सरजमीं पर उनके बल्ले से रन ही नहीं निकलते हैं।
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विदेशी धरती पर वनडे में नहीं दिखा पाए कमाल
यूं तो रोहित शर्मा को प्रतिभाशाली बल्लेबाजों में गिना जाता है, लेकिन उनकी बल्लेबाजी में कभी भी निरंतरता नहीं रही है। वह कभी भी टीम को संकट में बाहर निकालने में कामयाब नहीं रहे हैं। उन्होंने 23 जून, 2007 को बेल्फास्ट में आयरलैंड के खिलाफ अपना पहला वनडे मैच खेला जो उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत थी। हालांकि इस मैच में उन्हें बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिला था।
2007 से लेकर वह कई बार भारत की वनडे टीम से अंदर-बाहर होते रहे। अब तक वह 126 वनडे मैच खेल चुके हैं जिसमें उन्होंने 5 शतक लगाए जिसमें 2 शतक ही बाहर लगे हैं और वह भी बुलवायो में जिंबाब्वे के खिलाफ। उनको पहला शतक लगाने में 43 वनडे मैचों का लंबा इंतजार करना पड़ा।
इन 5 शतकों में 3 शतक भारत में लगे हैं जिसमें उन्होंने 209 रनों की पारी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बंगलुरू में नंवबर 2013 में और 264 रनों की पारी श्रीलंका के खिलाफ कोलकाता में इसी साल 13 नवंबर को खेली थी। विदेश में वह जब भी खेलने जाते हैं उनकी बल्लेबाजी कुंद पड़ जाती है और रन बनाने के लिए खासा संघर्ष करना पड़ता है।
2007 से लेकर वह कई बार भारत की वनडे टीम से अंदर-बाहर होते रहे। अब तक वह 126 वनडे मैच खेल चुके हैं जिसमें उन्होंने 5 शतक लगाए जिसमें 2 शतक ही बाहर लगे हैं और वह भी बुलवायो में जिंबाब्वे के खिलाफ। उनको पहला शतक लगाने में 43 वनडे मैचों का लंबा इंतजार करना पड़ा।
इन 5 शतकों में 3 शतक भारत में लगे हैं जिसमें उन्होंने 209 रनों की पारी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बंगलुरू में नंवबर 2013 में और 264 रनों की पारी श्रीलंका के खिलाफ कोलकाता में इसी साल 13 नवंबर को खेली थी। विदेश में वह जब भी खेलने जाते हैं उनकी बल्लेबाजी कुंद पड़ जाती है और रन बनाने के लिए खासा संघर्ष करना पड़ता है।
पहले ही विदेशी दौरे में हो गए थे असफल
रोहित शर्मा वनडे में जिस तरह से उतार-चढ़ाव भरी बल्लेबाजी कर रहे थे उससे उन्हें टेस्ट टीम में शामिल होने में लंबा वक्त लग गया। घरेलू मैदान पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें पहला टेस्ट मैच खेलने के लिए 6 साल से ज्यादा का लंबा इंतजार करना पड़ा। उन्होंने अपना पहला वनडे 2007 में खेला था और तब से लेकर वह 100 से ज्यादा वनडे खेल चुके थे लेकिन उन्हें टेस्ट में मौका नहीं मिला।
लेकिन पिछले साल 2013 में राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गज बल्लेबाजों के क्रिकेट से संन्यास लेने और सचिन तेंदुलकर की आखिरी सीरीज होने के बाद टीम में हुई खाली जगह को भरने के लिए चयनकर्ताओं ने सौ से ज्यादा वनडे खेल चुके रोहित को मौका देने का फैसला लिया और उन्होंने उसे पहले ही मैच में सही भी साबित कर दिया।
पिछले साल 6 नवंबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में एंट्री करते हुए रोहित ने कोलकाता टेस्ट में धमाकेदार सेंचुरी लगाई और पहली ही पारी में 177 रनों की पारी खेल डाली। यह मैच तेंदुलकर के टेस्ट करियर का 199वां मैच था जिसे उन्होंने अपनी शतकीय पारी से यादगार बना दिया। इसके बाद तेंदुलकर के रिकॉर्ड 200वें टेस्ट और आखिरी मैच में भी उन्होंने शतक लगाते हुए 111 रनों की नाबाद पारी खेली। उन्होंने लगातार 2 मैचों में जिस अंदाज में शतक लगाए उससे लगा कि मुंबई का यह बल्लेबाज टीम इंडिया का नया तेंदुलकर बनेगा।
हालांकि इस बल्लेबाज की असली परीक्षा विदेशी सरजमीं खासकर भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर थी जिसमें वह पहले ही मैच में नाकाम हो गए। विंडीज के खिलाफ घरेलू सीरीज के बाद टीम इंडिया को दक्षिण अफ्रीका का दौरा करना पड़ा जिसमें रोहित ने 2 मैचों की टेस्ट सीरीज में 14, 6, 0 और 25 रन बनाए।
पहले विदेशी दौरे में नाकाम होने के बाद उन्हें इस साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड दौरे के लिए भी शामिल किया गया जिसमें वह एक अर्धशतक ही लगा पाए और इसके बाद फिर संघर्ष शुरू हो गया। किवी दौरे में उनके बल्ले से 72, 19, 0 और नाबाद 31 रन निकले और लगा कि इस बल्लेबाज को कुछ और मौके दिए जाने चाहिए।
साल के मध्य में इंग्लैंड दौरे के लिए उनका चयन किया गया। 4 मैचों की टेस्ट सीरीज में उन्हें सिर्फ एक मैच खेलने का मौका साउथम्प्टन में मिला, जिसमें भी वह संघर्ष करते दिखे और 28 और 6 रन बना पाए।
लेकिन पिछले साल 2013 में राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गज बल्लेबाजों के क्रिकेट से संन्यास लेने और सचिन तेंदुलकर की आखिरी सीरीज होने के बाद टीम में हुई खाली जगह को भरने के लिए चयनकर्ताओं ने सौ से ज्यादा वनडे खेल चुके रोहित को मौका देने का फैसला लिया और उन्होंने उसे पहले ही मैच में सही भी साबित कर दिया।
पिछले साल 6 नवंबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में एंट्री करते हुए रोहित ने कोलकाता टेस्ट में धमाकेदार सेंचुरी लगाई और पहली ही पारी में 177 रनों की पारी खेल डाली। यह मैच तेंदुलकर के टेस्ट करियर का 199वां मैच था जिसे उन्होंने अपनी शतकीय पारी से यादगार बना दिया। इसके बाद तेंदुलकर के रिकॉर्ड 200वें टेस्ट और आखिरी मैच में भी उन्होंने शतक लगाते हुए 111 रनों की नाबाद पारी खेली। उन्होंने लगातार 2 मैचों में जिस अंदाज में शतक लगाए उससे लगा कि मुंबई का यह बल्लेबाज टीम इंडिया का नया तेंदुलकर बनेगा।
हालांकि इस बल्लेबाज की असली परीक्षा विदेशी सरजमीं खासकर भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर थी जिसमें वह पहले ही मैच में नाकाम हो गए। विंडीज के खिलाफ घरेलू सीरीज के बाद टीम इंडिया को दक्षिण अफ्रीका का दौरा करना पड़ा जिसमें रोहित ने 2 मैचों की टेस्ट सीरीज में 14, 6, 0 और 25 रन बनाए।
पहले विदेशी दौरे में नाकाम होने के बाद उन्हें इस साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड दौरे के लिए भी शामिल किया गया जिसमें वह एक अर्धशतक ही लगा पाए और इसके बाद फिर संघर्ष शुरू हो गया। किवी दौरे में उनके बल्ले से 72, 19, 0 और नाबाद 31 रन निकले और लगा कि इस बल्लेबाज को कुछ और मौके दिए जाने चाहिए।
साल के मध्य में इंग्लैंड दौरे के लिए उनका चयन किया गया। 4 मैचों की टेस्ट सीरीज में उन्हें सिर्फ एक मैच खेलने का मौका साउथम्प्टन में मिला, जिसमें भी वह संघर्ष करते दिखे और 28 और 6 रन बना पाए।
विदेश में लगातार चौथी बार रहे नाकाम
टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण के बाद लगातार 2 टेस्ट मैचों में शतक लगाने वाले रोहित शर्मा पिछली 3 विदेशी सीरीज में बुरी तरह से नाकाम रहे। प्रशंसकों को घरेलू सीरीज में मिली सफलता के बाद उनसे विदेशी धरती पर भी यही पारी खेलने की आस थी लेकिन वह दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड में बल्ले से बुरी तरह से नाकाम रहे और सिर्फ एक अर्धशतक ही लगा सके।
फिलहाल, टीम इंडिया इस समय ऑस्ट्रेलिया में है, 4 मैचों की सीरीज के 2 मैच खेल चुकी है और दोनों में ही उसे हार मिली है, भारत की सीरीज में वापसी की उम्मीदें अब बेहद कम है। वहीं रोहित शर्मा की नाकामी का सिलसिला यहां भी जारी है। एडिलेड टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 43 रन बनाए तो लगा कि वह आगे अच्छा खेलेंगे लेकिन दूसरी पारी में 6 रन पर आउट हो गए। इसके बाद ब्रिसबेन टेस्ट में 32 और शून्य पर आउट हो गए। विदेश में उनकी सबसे बड़ी टेस्ट पारी 72 रनों की है। उनके टेस्ट करियर में 2 शतक के अलावा यही एक अर्धशतक भी है।
रोहित मध्य क्रम में बल्लेबाजी करने आते हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दोनों ही मैचों में शीर्ष क्रम ने टीम के लिए उपयोगी योगदान दिया लेकिन मध्य क्रम की नाकामी ने भारत के हार के कगार पर पहुंचा दिया। वह विदेशी धरती पर जिस तरह से लगातार असफल हो रहे हैं उससे उन्हें घर का 'शेर' कहा जाने लगा है। उम्मीद है कि अब इस घर के 'शेर' को ऑस्ट्रेलिया के शेष मैचों के लिए टीम में शामिल नहीं किया जाएगा और उसकी जगह किसी नए बल्लेबाज को मौका दिया जाए।
फिलहाल, टीम इंडिया इस समय ऑस्ट्रेलिया में है, 4 मैचों की सीरीज के 2 मैच खेल चुकी है और दोनों में ही उसे हार मिली है, भारत की सीरीज में वापसी की उम्मीदें अब बेहद कम है। वहीं रोहित शर्मा की नाकामी का सिलसिला यहां भी जारी है। एडिलेड टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 43 रन बनाए तो लगा कि वह आगे अच्छा खेलेंगे लेकिन दूसरी पारी में 6 रन पर आउट हो गए। इसके बाद ब्रिसबेन टेस्ट में 32 और शून्य पर आउट हो गए। विदेश में उनकी सबसे बड़ी टेस्ट पारी 72 रनों की है। उनके टेस्ट करियर में 2 शतक के अलावा यही एक अर्धशतक भी है।
रोहित मध्य क्रम में बल्लेबाजी करने आते हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दोनों ही मैचों में शीर्ष क्रम ने टीम के लिए उपयोगी योगदान दिया लेकिन मध्य क्रम की नाकामी ने भारत के हार के कगार पर पहुंचा दिया। वह विदेशी धरती पर जिस तरह से लगातार असफल हो रहे हैं उससे उन्हें घर का 'शेर' कहा जाने लगा है। उम्मीद है कि अब इस घर के 'शेर' को ऑस्ट्रेलिया के शेष मैचों के लिए टीम में शामिल नहीं किया जाएगा और उसकी जगह किसी नए बल्लेबाज को मौका दिया जाए।