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रवि शास्त्री का बेतुका बयान, 'भीख मांगने जैसा है DRS'

Tue, 23 Dec 2014 12:37 PM IST
Updated Tue, 23 Dec 2014 12:37 PM IST
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ravi shastri says DRS is like begging for cricketers.

पहले एडिलेड फिर ब्रिसबेन दोनों टेस्ट मैचों में भारतीय टीम की शर्मनाक हार के बाद पूर्व भारतीय दिग्गज भले ही डीआरएस मामले में बीसीसीआई को आड़े हाथों ले रहे हों लेकिन भारतीय टीम के मौजूदा डायरेक्टर रवि शास्त्री अलग ही राय रखते हैं।

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ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मौजूदा सीरीज के दो मैचों में कई फैसले खिलाफ जाने के बाद पूर्व भारतीय दिग्गज डीआरएस को उचित ठहरा रहे हों लेकिन टीम डायरेक्टर रवि शास्त्री का कहना है कि बड़ी भूल होने की स्थिति में ही इसका इस्तेमाल होना चाहिए।
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 शास्त्री ने कहा कि आईसीसी में तकनीकी समिति का सदस्य होने के नाते उन्होंने विश्व संस्था से कई बार कहा है कि उनके देश को इसमें कुछ संशोधित कर इसे स्वीकारने में कोई परहेज नहीं है।
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उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा कहा है कि एक खिलाड़ी को रिव्यू के लिए भीख नहीं मांगनी चाहिए। हमें बस एक ही चीज पर आपत्ति है कि इसका इस्तेमाल कब और किसके द्वारा होगा।’ इसके साथ ही अंपायर के एलबीडब्लू पर दिए फैसले को भी चुनौती देना उन्हें स्वीकार नहीं है।

धोनी भी शास्‍त्री की बातों से सहमत

ravi shastri says DRS is like begging for cricketers.

दो टेस्ट मैचों में अंपायर के पांच गलत फैसले टीम इंडिया के खिलाफ गए। ये निर्णय ऐसे थे जो इस सीरीज में भारतीय टीम को इतिहास रचने में मदद कर सकते थे। मगर चार टेस्ट की मौजूदा सीरीज के लिए निर्णय समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) को स्वीकार न कर टीम इंडिया ने खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।

हालांकि ब्रिसबेन टेस्ट में हार के बाद भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने भी डीआरएस की अहमियत को नजरअंदाज ही किया है। इस मामले में वे भी टीम के डायरेक्टर रवि शास्‍त्री की बातों से सहमत हैं।

क्रिकेटर बीसीसीआई को दे चुके हैं धमकी

ravi shastri says DRS is like begging for cricketers.

बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी सीरीज के दौरान डीआरएस मामला निरंतर तूल पकड़ता जा  रहा है। मौजूदा और पूर्व क्रिकेटरों का कहना है कि यदि बीसीसीआई ने डीआरएस को स्वीकार नहीं किया तो उसे परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए, क्योंकि मेजबान ऑस्ट्रेलिया टीम भी इसे लागू करने के पक्ष में है।

टीम इंडिया के वरिष्ठ ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का मानना है कि भारत को डीआरएस मौजूदा स्वरूप में ही स्वीकार कर लेना चाहिए क्योंकि इससे करीबी टेस्ट मैचों में काफी मदद मिल सकती है।

वहीं पूर्व बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण कहते हैं कि अगर हॉटस्पॉट और हॉकआई तकनीक में सुधार कर लिया जाए तो फिर डीआरएस को अपनाने के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।

पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन भी डीआरएस को गलत नहीं ठहराते हैं, उनका मानना है कि ने अगर आईसीसी ने इसे मान्यता दे दी है तो बीसीसीआई इसे लागू करने में आना-कानी क्यों कर रहा है।


पूर्व कप्तान ‌दिलीप वेंगसरकर, महान स्पिनर ईरापल्ली प्रसन्ना, पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान भी डीआरएस को अपनाने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि खेल में एक खराब फैसला मैच का रुख मोड़ देता है। इसलिए ऐसी स्थिति में डीआरएस काफी अहम बन जाता है।

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