फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Cricket ›   Cricket News ›   prithvi shaw and father sacrifices to make dream come true playing for india

अपनी लगन और पिता के त्याग से तैयार हुए हैं पृथ्वी शॉ, देखिए संघर्ष का पूरा सफर

Sat, 06 Oct 2018 08:51 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 06 Oct 2018 08:51 AM IST
विज्ञापन
prithvi shaw and father sacrifices to make dream come true playing for india
पृथ्वी शॉ

पृथ्वी शॉ के बारे में काफी पहले से बहुत चर्चा थी और आखिरकार युवा बल्लेबाज को टेस्ट में डेब्यू करने का मौका वेस्टइंडीज के खिलाफ मिल ही गया। 18 वर्षीय बल्लेबाज ने अपने डेब्यू टेस्ट में शतक जमाकर कीर्तिमानों की झड़ी लगा दी। 

विज्ञापन


सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज बल्लेबाज इस युवा के कायल हो गए। मगर मुंबई के बल्लेबाज के लिए टीम इंडिया तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। उन्होंने कई समझौते किए और परेशानियों का सामना किया, जिसमे बाद उन्हें भारतीय टीम की कैप पहनने का मौका मिला।
विज्ञापन


चलिए आपको 5 वाकये बताते हैं, जो दर्शाता है कि पृथ्वी ने टीम इंडिया तक पहुंचने से पहले कितना संघर्ष किया है:

4 साल में मां को खोने के बाद भी करते रहे मेहनत

prithvi shaw and father sacrifices to make dream come true playing for india
पृथ्वी शॉ - फोटो : self

पृथ्वी शॉ सिर्फ चार साल के थे, जब उन्होंने अपनी मां को खो दिया। पृथ्वी के पिता पंकज के लिए यह बड़ा झटका था क्योंकि वह अपनी पत्नी से बहुत मोहब्बत करते थे। हालांकि, पंकज ने अपनी पूरी उर्जा पृथ्वी और क्रिकेट में झोंक दी।

पंकज ने अपनी पत्नी के गुजर जाने के बाद जल्द ही पृथ्वी को क्रिकेट एकेडमी में डाला और अपनी पूरी जिंदगी बेटे के सपने को पूरा करने के नाम कर दी। पृथ्वी बचपन से ही सपना देखते थे कि एक दिन टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व करेंगे। पृथ्वी ने कड़ी मेहनत की, जिसमें उन्हें पिता पंकज का साथ मिला और अब दोनों का सपना पूरा हुआ।

विरार से बांद्रा तक का सफर

prithvi shaw and father sacrifices to make dream come true playing for india
पृथ्वी शॉ

पृथ्वी के पिता सुबह साढ़े तीन बजे उठकर बेटे के लिए नाश्ता बनाते थे। सुबह साढ़े चार बजे पिता और बेटे विरार से बांद्रा के एमआईजी ग्राउंड जाते थे, जहां पृथ्वी अभ्यास करते थे। इस दौरान पृथ्वी अपने पिता के कंधें पर बैठते थे।

पृथ्वी जहां पूरे दिन अभ्यास करते थे, वहीं उनके पिता पेड़ की छांव में बेटे के खेल पर नजर रखते थे। इसके अलावा कभी उनके पिता स्थानीय बाजार भी जाते थे ताकि बेटे के लिए अच्छे क्रिकेट उपकरण ले सकें। पूरे दिन अभ्यास करने के बाद पृथ्वी और उनके पिता शाम को घर पहुंचते थे।

डिनर करने के बाद दोनों शाम साढ़े 9 बजे तक सो जाते थे। यह पृथ्वी शॉ का रूटीन बन चुका था और कड़ी मेहनत का फल उन्हें 4 अक्टूबर 2018 को मिला।

विज्ञापन

बेटे के सपने के लिए पिता ने बेच दी अपनी दुकान

prithvi shaw and father sacrifices to make dream come true playing for india
पृथ्वी शॉ

पृथ्वी के पिता ने कपड़ो की दुकान खोली थी, जो सूरत और बड़ौदा तक लोकप्रिय भी हो चुकी थी। हालांकि, पृथ्वी के क्रिकेट खेलने के सपने को सच करने के लिए पंकज ने अपनी दुकान बेच दी। इसकी वजह से वह पृथ्वी को ट्रेनिंग दिलाने में सक्षम हुए और उनके साथ पूरे समय रह भी सके।

एक तरह से देखा जाए तो पंकज ने अपनी पूरी जिंदगी पृथ्वी के नाम कर दी। पिता ने अपने करियर और निजी जिंदगी से समझौता किया ताकि बेटे के सपने को पूरा होते देख सकें। 

पिता-बेटे के पास पैसों की कमी रही, लेकिन दोनों ने शांति बनाए रखी और उम्मीद जताई कि क्रिकेट एक दिन उनकी कड़ी मेहनत को सार्थक करेगा। पृथ्वी और उनके पिता मुंबई की एक छोटी सी चौल में रहते थे।

कभी नहीं ली छुट्टी

prithvi shaw and father sacrifices to make dream come true playing for india
पृथ्वी शॉ

पृथ्वी शॉ ने बचपन से कभी छुट्टी नहीं ली। उनका हर एक दिन क्रिकेट के लिए समर्पित रहा। पृथ्वी और उनके पिता ने कभी परिवार से मिलने के लिए छुट्टी नहीं ली।

जब पृथ्वी का जन्मदिन हो या फिर पृथ्वी ने बेहतरीन पारी खेली हो तो वो अपने पिता के साथ बाहर जाकर चाइनीस फूड खाते थे। पृथ्वी और उनके पिता ने अपनी सभी छुट्टियों से समझौता किया। इनकी तपस्या अब पूरी हुई।

पूरे दिन नेट्स पर बल्लेबाजी का अभ्यास करना

prithvi shaw and father sacrifices to make dream come true playing for india
पृथ्वी शॉ - फोटो : CricTracker

भले ही पंकज के परिवार का बैकग्राउंड क्रिकेट का नहीं रहा हो, लेकिन उन्होंने गेंदबाजी करना सीखा था ताकि बेटे को ज्यादा से ज्यादा बल्लेबाजी का अभ्यास करा सके। गर्मी के दिनों में जब गेंदबाज थक जाते थे तो पंकज अपने पिता को गेंदबाजी करते थे।

पिता बेटे ने पूरा समय अपनी मेहनत में लगाया, जिससे पृथ्वी बेहतर क्रिकेटर बनकर उभरे और देश के लिए खेलने के अपने को पूरा कर सके।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें क्रिकेट समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। क्रिकेट जगत की अन्य खबरें जैसे क्रिकेट मैच लाइव स्कोरकार्ड, टीम और प्लेयर्स की आईसीसी रैंकिंग आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed