पहला सेमीफाइनलः जीते कोई भी टीम, इतिहास बनेगा जरूर
वर्ल्ड कप 2015 अब अपने अंतिम पड़ाव की ओर तेजी से बढ़ रहा है और अब सिर्फ सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले ही शेष रह गए हैं। सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की टीमें पहुंच चुकी हैं जिसमें दो मेजबान भी शामिल हैं।
टूर्नामेंट का पहला सेमीफाइनल ऑकलैंड में मेजबान न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला जाना है। यह रोमांचक मुकाबला भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े छह बजे से शुरू होगा। न्यूजीलैंड टूर्नामेंट में अब अजेय होने के साथ-साथ सबसे लकी टीम भी बनी हुई है। उसने अपने अभी तक के सभी मुकाबले अपने ही मैदान पर खेले हैं और हर मैच में जीत हासिल की है। लगातार 6 मैच जीतकर अपने ग्रुप में शीर्ष पर रहने के कारण क्वार्टर फाइनल अपने ही घर पर खेलना पड़ा। और अब वह सेमीफाइनल भी अपनी ही धरती पर खेलेगी। उसके बारे में कहा जाता है कि इस किवी टीम को उसके घर पर हराना विपक्षी टीम के लिए आसान नहीं होता।
न्यूजीलैंड में क्रिकेट मैदान बेहद छोटे होते हैं जहां हवाई शॉट लगाना बेहद आसान होता है। ऐसे में किवी बल्लेबाजों के लिए यह बेहद शानदार मौका होगा कि वह खुद को खिताबी रेस में शामिल करा ले। किवी टीम को उसी के छोटे मैदान पर दक्षिण अफ्रीका चुनौती देगा, यह देखना दिलचस्प होगा कि एबी डीबिलियर्स की टीम इस बार क्या कमाल दिखा पाती है।
इतिहास तो बनकर रहेगा वर्ल्ड कप में
वर्ल्ड कप का पहला सेमीफाइनल मेजबान न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला जाना है। इन दोनों टीमों के प्रदर्शन को मिलाकर देखा जाए तो दोनों अब तक कुल 9 बार सेमीफाइनल में पहुंच चुकी हैं लेकिन एक बार भी कोई टीम फाइनल का मुंह नहीं सकी है। ऐसे में जीते कोई भी इतिहास बनना तय है क्योंकि दोनों में से एक टीम का पहली बार फाइनल में पहुंचना तय है।
इतिहास पर नजर डाला जाए तो न्यूजीलैंड टूर्नामेंट में अब तक सबसे अनलकी टीम है क्योंकि वह अब तक 6 बार सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है लेकिन एक बार भी फाइनल में नहीं पहुंची। वहीं 1991 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करने वाली अफ्रीकी टीम इससे पहले 3 बार अंतिम चार में शामिल हुई लेकिन इससे आगे नहीं बढ़ सकी। इस मुकाबले की विजेता एक अन्य सेमीफाइनल में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मुकाबले की विजेता से 29 मार्च को मेलबर्न में भिड़ेगा।
टूर्नामेंट में अपने सभी मुकाबले घर में ही खेलने वाली किस्मत की धनी कही जाने वाली किवी टीम के बारे में बात की जाए तो उसे हर मैच में एक नया हीरो यानी मैच जीताऊ खिलाड़ी मिला ही है। कप्तान ब्रैंडन मैकुलम, कोरी एंडरसन, टीम साउदी, केन विलियम्सन, डेनिएल विटोरी, ट्रेंट बोल्ट और अब मार्टिन गुप्टिल ने अपने-अपने प्रदर्शन के दम पर न्यूजीलैंड को अंतिम 2 की रेस में लाकर खड़ा कर दिया है। किवी टीम अपने इन 7 मैच जीताऊ खिलाड़ियों के भरोसे दक्षिण अफ्रीकी चुनौती से मुकाबला करेगी।
वहीं न्यजीलैंड ने चोटिल तेज गेंदबाज एडम मिलने के टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद मैट हेनरी को शामिल किया था। अब उनके टीम के साथ जुड़ने की सारी बाधाएं भी खत्म हो गई क्योंकि आईसीसी ने उनके चयन पर हरी झंडी दिखा दी है। वेस्टइंडीज के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मिलने की बाएं एड़ी में चोट लग गई थी।
'चोकर्स' पर होगा दोहरी चुनौती का दबाव
जहां तक दक्षिण अफ्रीका की बात है तो उसके प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव नजर आया। लीग चरण में भारत और पाकिस्तान के हाथों उसे करारी हार का सामना करना पड़ा। हालांकि उसने क्वार्टर फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ जिस तरह का प्रदर्शन किया और एकतरफा मुकाबले में जीत हासिल कर सेमीफाइनल का टिकट कटाया उससे लगता है कि वह अपने ऊपर लगे चोकर्स के धब्बे को जीत के साथ मिटाने को उतावले होंगे। श्रीलंका पर उसकी यह पहली जीत है वर्ल्ड कप के नॉकआउट मुकाबलों में।
दक्षिण अफ्रीका दोहरे चुनौती के साथ मैदान पर उतरेगा। फाइनल का टिकट हासिल करने के साथ-साथ वह पिछली बार 2011 वर्ल्ड कप में ढाका में खेले गए क्वार्टर फाइनल में न्यूजीलैंड के हाथों 49 रनों से मिली हार का बदला लेने पर भी होगा।
अफ्रीकी टीम भी अपने विस्फोटक कप्तान एबी डीविलियर्स के आलराउंड प्रदर्शन के अलावा ओपनर बल्ल्ेबाज हाशिम अमला, फैफ डु प्लेसिस, जेपी डुमिनी, मोर्ने मोर्कल, डेल स्टेन और डेविड मिलर के भरोसे होगी।
दक्षिण अफ्रीका के पास 'चोकर्स' का दाग हटाने का यह सबसे बेहतरीन मौका है।