अब रत्नाकर शेट्टी पर लगा पांच साल का प्रतिबंध
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लगता है दुनिया के सबसे अमीर खेल संस्था बीसीसीआई को किसी की नजर लग गई है। तभी तो बोर्ड हर दिन एक नए विवादों में फंसता जा रहा है।
बोर्ड अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की मुश्किलें अभी कम भी नहीं हुई थीं कि बीसीसीआई के एक और वरिष्ठ अधिकारी विवादों में फंस गए हैं। इस ताजा विवाद में प्रोफेसर रत्नाकर शेट्टी फंसे हैं।
शेट्टी ने अहमदाबाद में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए टी-20 मैच के दौरान मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के सहायक जनरल मैनेजर और कुछ स्टाफों पर गलत तरीके से टिकट बेचने का आरोप लगाया था जिस कारण मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने उन्हें मंगलवार को पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया।
एमसीए के अध्यक्ष रवि सावंत ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, ‘हां, हमने शेट्टी पर एमसीए के किसी भी बैठक या गतिविधियों में हिस्सा पर पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि हम उन्हें एमसीए में आने से नहीं रोकेंगे और ना ही उनकी रोजी-रोटी में बाधक बनेंगे।’
शेट्टी पर यह प्रतिबंध दो जून 2018 तक प्रभावी रहेगा।
'मैंने एसोसिएशन की वार्षिक आम बैठक में एमसीए के फंड का गलत इस्तेमाल होने की बात कही थी। ऐसा कर मैंने कोई गलती नहीं की। यह कुछ खास आदमियों द्वारा मेरे खिलाफ व्यक्तिगत हमला है क्योंकि वह नहीं चाहते कि मैं अगला चुनाव लड़ूं।' - रत्नाकर शेट्टी
डालमिया नहीं, शशांक मनोहर थे मेरी पहली पसंद : जेटली
बीसीसीआई के उपाध्यक्ष अरुण जेटली ने कहा कि वह चेन्नई में हुई वर्किंग कमेटी की बैठक से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि चार सदस्यीय अंतरिम व्यवस्था के प्रमुख के रूम में जगमोहन डालमिया के स्थान पर शशांक मनोहर उनकी पहली पसंद थे।
जेटली ने कहा, ‘मैं काफी खुश होता यदि यह व्यवस्था 08 या 09 दिन के बजाय पहले ही दिन निर्धारित की गई होती। मैं व्यक्तिगत रूप से शशांक मनोहर को देखना पसंद करता और उनकी सहमति के बगैर उनके नाम का सुझाव दिया होता। शशांक की साफसुथरी छवि है।’