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वर्ल्ड कप फाइनल में 28 साल बाद होगी ये खास बात

Sun, 29 Mar 2015 09:23 AM IST
Updated Sun, 29 Mar 2015 09:23 AM IST
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No Asian Team In world Cup final after 28 years

14 फरवरी से शुरू हुआ वर्ल्ड कप अब अपने अंजाम की ओर है और सिर्फ एक मैच शेष रह गया है। इसी मैच से क्रिकेट जगत को एक नया वर्ल्ड चैंपियन मिलेगा। पिछली बार की वर्ल्ड चैंपियन टीम इंडिया के सिडनी में हुए दूसरे सेमीफाइल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार जाने के बाद उसकी खिताब बचाने का अभियान वहीं पर खत्म हो गया था।

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इस बार रविवार को मेलबर्न क्रिकेट ग्रांउड में मेजबान ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खिताबी मुकाबला खेला जाना है। दोनों ही टीमों का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। लगातार 8 मैच जीतकर पहली बार फाइनल में पहुंची कीवी टीम अपने पहले ही प्रयास में वर्ल्ड चैंपियन बनना चाहेगी।
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जबकि वर्ल्ड नंबर वन ऑस्ट्रेलिया रिकॉर्ड सातवीं बार खिताब की रेस में है और पिछले 6 मौकों में से 4 बार खिताब पर कब्जा भी जमा चुका है। फिलहाल 2011 के बाद ऐसा दूसरी बार हुआ है कि वर्ल्ड कप फाइनल में दो मेजबान टीमें खिताब के लिए आमने-सामने होंगी।
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2011 के वर्ल्ड कप में भारत ने श्रीलंका को हराकर 28 साल वर्ल्ड कप पर कब्जा जमाया था तो इस बार भी 28 साल बाद वर्ल्ड कप के फाइनल में एक खास बात होने जा रही है।

1987 वर्ल्ड कप में हुआ था आखिरी बार

No Asian Team In world Cup final after 28 years

1983 में टीम इंडिया के वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारतीय उपमहाद्वीप में क्रिकेट का तेजी से प्रसार हुआ। न सिर्फ भारत बल्कि पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश अगले 10 सालों में क्रिकेट जगत में वनडे में अपनी पहचान बनाने में कामयाब भी रहे। 1983 के बाद 1992 के वर्ल्ड कप में एशिया से एक और टीम वर्ल्ड चैंपियन बन गई। यह टीम थी पाकिस्तान की। चार साल बाद श्रीलंका भी वर्ल्ड चैंपियन टीम की सूची में नाम लिखवाने में कामयाब रहा और इसके बाद एशियाई टीमों ने क्रिकेट में लगातार अपनी छाप छोड़ने का जलवा दिखाया।

2011 में 28 साल बाद टीम इंडिया ने दूसरी बार खिताब जीता ‌था, तो इस बार भी 28 साल एक ऐसा फाइनल होने जा रहा है जो इससे पहले 1987 में हुआ था। 1987 के बाद पहली बार फाइनल में कोई एशियाई टीम नहीं दिखाई देगी। उस समय भारत और पाकिस्तान की संयुक्त मेजबानी में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच फाइनल खेला गया था जिसमें कंगारुओं ने बाजी मारी और पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बने थे।

1987 के बाद से हर बार कोई न कोई एशियाई टीम फाइनल में पहुंचती रही। 1992 में पाकिस्तान, 1996 में श्रीलंका तो वर्ल्ड चैंपियन ही बन गए। 1999 में फिर पाकिस्तान फाइनल में पहुंचा और ऑस्ट्रेलिया से हार गया। 2003 में टीम इंडिया फाइनल में पह़ुंची लेकिन वह भी कंगारुओं के हाथों हारकर उपविजेता बनने को मजबूर होना पड़ा। 2007 में भी यही परिणाम रहा लेकिन श्रीलंका फाइनल में हारी। फिर 2011 में पहली बार दो एशियाई टीम फाइनल में पहुंची और भारत श्रीलंका को हराकर 28 साल बाद वर्ल्ड चैंपियन बन गया।

वर्ल्ड कप पिछले 10 संस्करण में यह चौथी बार है जब कोई ‌एशियाई टीम वर्ल्ड कप के फाइनल में नहीं दिख रही है। 1987 के अलावा 1975 और 1979 के बाद अब 2015 का वर्ल्ड कप।

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