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Kumar Kartikeya: 15 साल की उम्र में घर छोड़ा, मजदूरी की, नौ साल बाद परिवार से मिला मुंबई इंडियंस का क्रिकेटर
Thu, 04 Aug 2022 07:23 PM IST
रोहित राज
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रोहित राज
Updated Thu, 04 Aug 2022 07:23 PM IST
सार
कार्तिकेय के लिए मुंबई इंडियंस की टीम में शामिल होने तक का सफर काफी कठिन रहा है। नौ साल पहले जब कार्तियेक 15 साल के थे तब उन्होंने कानपुर छोड़कर दिल्ली जाने का फैसला किया था।
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मां-पिता के साथ कुमार कार्तिकेय
- फोटो : Kumar Kartikeya/Twitter
विस्तार
मुंबई इंडियंस के क्रिकेटर कुमार कार्तिकेय ने नौ साल बाद अपने परिवारों से मुलाकात की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर मां के साथ फोटो शेयर कर इस बारे में बताया। कार्तिकेय को 20 लाख रुपये में मुंबई की टीम ने मोहम्मद अरशद खान के चोटिल होने के बाद टीम में शामिल किया था। आईपीएल के अपने पहले ही ओवर में संजू सैमसन को आउट कर वह चर्चा में आए थे।
24 वर्षीय कार्तिकेय ने फोटो शेयर करते हुए कहा, ''9 साल 3 महीने बाद अपने परिवार और मां से मिला। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में असमर्थ हूं।'' इसके बाद एक फोटो उन्होंने पिता के साथ शेयर की। कार्तिकेय को आईपीएल में चार मैचों में खेलने का मौका मिला। इस दौरान उन्होंने पांच विकेट लिए। कार्तिकेय के नाम प्रथम श्रेणी में 12 मैचों में 55 विकेट हैं। वहीं, 19 लिस्ट ए मैचों में 18 और 12 टी20 मैचों में 14 विकेट हासिल किए।
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24 वर्षीय कार्तिकेय ने फोटो शेयर करते हुए कहा, ''9 साल 3 महीने बाद अपने परिवार और मां से मिला। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में असमर्थ हूं।'' इसके बाद एक फोटो उन्होंने पिता के साथ शेयर की। कार्तिकेय को आईपीएल में चार मैचों में खेलने का मौका मिला। इस दौरान उन्होंने पांच विकेट लिए। कार्तिकेय के नाम प्रथम श्रेणी में 12 मैचों में 55 विकेट हैं। वहीं, 19 लिस्ट ए मैचों में 18 और 12 टी20 मैचों में 14 विकेट हासिल किए।
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क्रिकेटर कुमार कार्तिकेय
- फोटो : सोशल मीडिया
दिल्ली में दोस्त ने दिया था सहारा
कार्तिकेय के लिए मुंबई इंडियंस की टीम में शामिल होने तक का सफर काफी कठिन रहा है। नौ साल पहले जब कार्तिकेय 15 साल के थे तब उन्होंने कानपुर छोड़कर दिल्ली जाने का फैसला किया। उन्होंने घरवालों से वादा किया था कि अपने क्रिकेट के कारण कभी भी परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं डालेंगे। कार्तिकेय को दिल्ली में उनके दोस्त राधेश्याम के अलावा कोई नहीं जानता था। राधेश्याम लीग क्रिकेट में खेलते थे। उन्होंने कार्तिकेय की मदद की। दोनों कई क्रिकेट एकेडमी में गए, लेकिन सभी ज्यादा पैसे मांग रहे थे।
तब दोनों क्रिकेट कोच संजय भारद्वाज के पास गए। वहां राधेश्याम ने कहा कि कार्तिकेय के पास उन्हें देने के लिए पैसे नहीं हैं। इसके बावजूद भारद्वाज ने दोनों की मदद की। उन्होंने कार्तिकेय को ट्रायल देने के लिए कहा। नेट पर एक गेंद देखने के बाद भारद्वाज ने उनका चयन कर दिया।
कार्तिकेय के लिए मुंबई इंडियंस की टीम में शामिल होने तक का सफर काफी कठिन रहा है। नौ साल पहले जब कार्तिकेय 15 साल के थे तब उन्होंने कानपुर छोड़कर दिल्ली जाने का फैसला किया। उन्होंने घरवालों से वादा किया था कि अपने क्रिकेट के कारण कभी भी परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं डालेंगे। कार्तिकेय को दिल्ली में उनके दोस्त राधेश्याम के अलावा कोई नहीं जानता था। राधेश्याम लीग क्रिकेट में खेलते थे। उन्होंने कार्तिकेय की मदद की। दोनों कई क्रिकेट एकेडमी में गए, लेकिन सभी ज्यादा पैसे मांग रहे थे।
तब दोनों क्रिकेट कोच संजय भारद्वाज के पास गए। वहां राधेश्याम ने कहा कि कार्तिकेय के पास उन्हें देने के लिए पैसे नहीं हैं। इसके बावजूद भारद्वाज ने दोनों की मदद की। उन्होंने कार्तिकेय को ट्रायल देने के लिए कहा। नेट पर एक गेंद देखने के बाद भारद्वाज ने उनका चयन कर दिया।
कुमार कार्तिकेय विकेट लेने के बाद
- फोटो : IPL/BCCI
गाजियाबाद के पास गांव में की मजदूरी
अब कोचिंग तो कार्तिकेय को मिल गई थी, लेकिन उसे रहने और खाने का प्रबंध करना था। इसके लिए वह गाजियाबाद के पास मसूरी गांव में मजदूरी करने लगे। वह उनके एकेडमी से 80 किलोमीटर दूर था। फैक्टरी के नजदीक रहने के लिए उन्हें जगह मिल गई थी। वह रात में फैक्ट्री में काम करते थे और दिन में एकेडमी जाते थे। कई किलोमीटर पैदल चलते थे ताकि बिस्किट के लिए 10 रूपये बच सके।
डीडीसीए ने किया नजरअंदाज
इसके बाद भारद्वाज ने कार्तिकेय का एक स्कूल में दाखिला करा दिया। कार्तिकेय स्कूल की ओर से खेलने लगे और डीडीसीए लीग में 45 विकेट लिए। वह दिल्ली में प्रतिष्ठित ओम नाथ सूद टूर्नामेंट सहित तीन टूर्नामेंटों में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट थे। इतने बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद कार्तिकेय का सिलेक्शन डीडीसीए ने टॉप-200 में नहीं किया था।
अब कोचिंग तो कार्तिकेय को मिल गई थी, लेकिन उसे रहने और खाने का प्रबंध करना था। इसके लिए वह गाजियाबाद के पास मसूरी गांव में मजदूरी करने लगे। वह उनके एकेडमी से 80 किलोमीटर दूर था। फैक्टरी के नजदीक रहने के लिए उन्हें जगह मिल गई थी। वह रात में फैक्ट्री में काम करते थे और दिन में एकेडमी जाते थे। कई किलोमीटर पैदल चलते थे ताकि बिस्किट के लिए 10 रूपये बच सके।
डीडीसीए ने किया नजरअंदाज
इसके बाद भारद्वाज ने कार्तिकेय का एक स्कूल में दाखिला करा दिया। कार्तिकेय स्कूल की ओर से खेलने लगे और डीडीसीए लीग में 45 विकेट लिए। वह दिल्ली में प्रतिष्ठित ओम नाथ सूद टूर्नामेंट सहित तीन टूर्नामेंटों में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट थे। इतने बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद कार्तिकेय का सिलेक्शन डीडीसीए ने टॉप-200 में नहीं किया था।
कुमार कार्तिकेय
- फोटो : IPL/BCCI
दिल्ली से मध्य प्रदेश पहुंचे
भारद्वाज ने पहले भी इन मुद्दों को निपटाया था। गौतम गंभीर के बचपन के कोच के रूप में प्रसिद्ध भारद्वाज ने अमित मिश्रा के साथ ऐसा ही देखा था। तब उन्होंने मिश्रा को हरियाणा जाने के लिए कहा था। अब कार्तिकेय को उन्होंने मध्य प्रदेश भेज दिया। राज्य के ट्रायल मैचों में कार्तिकेय ने हर मुकाबले में पांच-पांच विकेट लिए। जल्द ही उन्होंने रणजी ट्रॉफी क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया। उन्हें मध्य प्रदेश अंडर-23 में भी खेलने का मौका मिला। जब कार्तिकेय ने 2018 में डेब्यू किया तो कार्तिकेय ने भारद्वाज को अपने पिता से बात करवाई। इसके चार साल बाद कार्तिकेय को आईपीएल में खेलने का मौका मिला।
भारद्वाज ने पहले भी इन मुद्दों को निपटाया था। गौतम गंभीर के बचपन के कोच के रूप में प्रसिद्ध भारद्वाज ने अमित मिश्रा के साथ ऐसा ही देखा था। तब उन्होंने मिश्रा को हरियाणा जाने के लिए कहा था। अब कार्तिकेय को उन्होंने मध्य प्रदेश भेज दिया। राज्य के ट्रायल मैचों में कार्तिकेय ने हर मुकाबले में पांच-पांच विकेट लिए। जल्द ही उन्होंने रणजी ट्रॉफी क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया। उन्हें मध्य प्रदेश अंडर-23 में भी खेलने का मौका मिला। जब कार्तिकेय ने 2018 में डेब्यू किया तो कार्तिकेय ने भारद्वाज को अपने पिता से बात करवाई। इसके चार साल बाद कार्तिकेय को आईपीएल में खेलने का मौका मिला।