IPL स्पॉट फिक्सिंग: सुप्रीम कोर्ट में जमा हुई अंतिम रिपोर्ट
जस्टिस मुकुल मुदगल समिति ने आईपीएल सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग मामले में एन श्रीनिवासन और 12 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के खिलाफ अपनी आखिरी जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है।
जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि रिपोर्ट पर 10 नवंबर को सुनवाई की जाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अदालत को बताया कि समिति की अंतिम रिपोर्ट तैयार हो गई है और उसे जमा कर दिया गया है।
इस बीच, जस्टिस मुदगल ने समिति के काम पर संतोष व्यक्त किया। लेकिन उन्होंने रिपोर्ट के बारे में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस मुकुल मुदगल ने पत्रकारों को बताया कि अब यह सुप्रीम कोर्ट को तय करना है कि हमारा काम संतोषजनक रहा या नहीं। हमने आदेश का पालन किया और अच्छा काम किया। रिपोर्ट अब अदालत के पास है और उसे भावी कार्रवाई पर फैसला करना है।
उन्होंने यह भी कहा कि समिति के सदस्यों पर जांच के दौरान किसी तरह का दबाव नहीं था।
12 खिलाड़ियों के हुई जांच
उन्होंने कहा कि हमने अपना काम कर दिया है और अब इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट को न्याय करना है।
अदालत ने एक सितंबर को बीसीसीआई अध्यक्ष के पद पर बहाली की श्रीनिवासन की दलील यह कहकर खारिज कर दी थी कि समिति से क्लीन चिट मिलने तक वह पद नहीं संभाल सकते। बेंच ने कहा था कि मामले की जांच चल रही है लिहाजा श्रीनिवासन बोर्ड अध्यक्ष के रूप में काम नहीं कर सकते।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए समिति को दो महीने के भीतर अपना काम पूरा करने का निर्देश दिया था और उसे श्रीनिवासन तथा अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ अंतरिम रिपोर्ट जमा करने की अनुमति भी दी थी।
इस मामले में श्रीनिवासन औ र12 प्रमुख खिलाड़ियों के खिलाफ जांच कर रही मुद्गल समिति ने 29 अगस्त को सीलबंद लिफाफे में अंतरिम रिपोर्ट जमा की थी।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 16 मई को जस्टिस मुदगल समिति को इस मामले में श्रीनिवासन और 12 खिलाड़ियों के खिलाफ जांच करके अगस्त के आखिर तक रिपोर्ट जमा करने के लिये कहा था। उसने अपनी समिति द्वारा मामले की जांच कराने के बीसीसीआई के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
मुदगल समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में श्रीनिवासन और 12 क्रिकेटरों के नाम लिये थे। मुदगल के अलावा समिति में अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एल नागेश्वर राव और अधिवक्ता निलय दत्ता भी हैं।