धोनी ने कहा, ऑस्ट्रेलिया ने नहीं गलत अंपायरिंग ने दी पर्थ में मात
भारत को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की सीरीज के पहले वनडे मैच में पांच विकेट से हार झेलनी पड़ी। मेजबान टीम की इस जीत में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज जॉर्ज बैली (112) और कंगारू कप्तान स्टीवन स्मिथ (149) की 242 रनों की साझेदारी अहम रही।
टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की किस्मत के बारे में ज्यादा कुछ कहने की जरुरत नहीं। उनके एक्सपेरिमेंट टीम को बड़े टूर्नामेंट जिता चुके हैं। वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में युवराज की जगह खुद बल्लेबाजी करना हो या इसस पहले पहले टी-20 वर्ल्ड कप 2007 के फाइनल में अनुभवी हरभजन की जगह जोगेंद्र शर्मा को आखिरी ओवर देना।
मैच में हार के बाद खुद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने माना कि उन्हें ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों ने नहीं डीआरएस ने हराया। उन्होंने बातों ही बातों में डीआरएस पर खुलकर कहा। हालांकि वह खुद डीआरएस के पक्षधर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर अंपायर सही निर्णय लेते तो मैच का रिजल्ट कुछ और हो सकता था।
पढ़ें, क्या हुआ जब कंगारू टीम थी 21 रन पर 2 विकेट
टीम इंडिया के विशाल 309 रनों के जवाब में जब ऑस्ट्रेलियाई टीम बल्लेबाजी करने उतरी थी तो डेब्यू मैच खेल रहे बरिंदर सरां ने दोनों ओपनरों डेविड वॉर्नर और एरोन फिंच को दहाई का आकंड़ा तक पार नहीं करने दिया और चलता किया।
बात 21 रन पर 2 विकेट की है। जब क्रीज पर कप्तान स्टीवन स्मिथ के साथ जॉर्ज बैली खेल रहे थे। जब बैली बल्लेबाजी के लिए मैदान पर आए तो उन्हें भारतीय पेसर बरिंदर ने पहली ही गेंद पर विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी के हाथों कैच कराकर पवेलियन का रास्ता दिखा दिया था।
लेकिन धोनी की जबरदस्त अपील के बाद भी अंपायर कैटलब्रॉ ने बैली को आउट करार नहीं दिया और बल्लेबाज के पक्ष में फैसला दिया। जिससे धोनी काफी निराश दिखे।
स्निकोमीटर में गेंद बैली के गलव्स को चूमती हुई विकेटकीपर के दस्तानों में पहुंची थी। धोनी ने बैली के आउट होने के सवाल पर कहा कि उन्हें डीआरएस पर अब भी पूरा भरोसा नहीं है। यह पूछने पर कि क्या 50-50 वाले फैसले को लेकर अंपायर भारत को सजा दे रहे हैं तो धोनी ने कहा, ‘मैं आपसे सहमत हो सकता हूं।’
धोनी ने कहा कि यदि तब तीसरा विकेट निकल गया होता तो मैच की स्थिति बदल सकती थी लेकिन इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि अंपायर अधिक से अधिक सही फैसले करें। धोनी ने कहा, ‘मैच का परिणाम बदल सकता था लेकिन इसके साथ ही हम चाहते हैं कि अंपायर अधिक से अधिक सही फैसले करें।
उन्होंने आगे कहा, "आपको देखना होगा कि कितने 50-50 के फैसले आपके पक्ष में नहीं गए। हमेशा इस पर गौर किया जाता है लेकिन मैं अब भी इसपर आश्वस्त नहीं हूं।" उन्होंने डीआरएस को निर्णय करने वाली प्रणाली की वकालत तो की लेकिन इसमें कुछ कमियां के बारे में कहा।
बैली ने कहा कि अपील पर डीआरएस का निर्णय रोचक होता
ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज जॉर्ज बैली ने कहा कि अगर निर्णय समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) लागू होती तो यह देखना रोचक होता कि उनके खिलाफ पहली गेंद पर की गई अपील पर क्या निर्णय होता।
बैली ने मैच में 112 रनों की पारी खेली और कप्तान स्टीव स्मिथ (149) के साथ तीसरे विकेट पर 242 रनों की साझेदारी की लेकिन बैली के खिलाफ बरिंदर सरां की पहली ही गेंद पर ऐसा लगा था कि गेंद बैली के ग्लव्स से लगकर विकेटकीपर धोनी के दस्तानों में गई है।
धोनी ने तो अपील की लेकिन सरां ने अपील भी नहीं की। डीआरएस लागू होता तो यह निर्णय भारत के लिए अहम हो सकता था। बीसीसीआई शुरू से ही डीआरएस को वर्तमान स्वरूप में अपनाने से इनकार करता रहा है।
बैली ने कहा कि मुझे लगा कि गेंद थाइपैड से लगी है, इस पर डीआरएस का फैसला दिलचस्प होता। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने कहा कि 310 के लक्ष्य को लेकर उनकी टीम कभी चिंतित नहीं थी।