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धोनी के संन्यास की अटकलों के बीच दब गईं कॉन्ट्रैक्ट की ये अहम बातें

Fri, 17 Jan 2020 10:36 AM IST
Vimal Kumar विमल कुमार
Updated Fri, 17 Jan 2020 10:36 AM IST
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MS Dhoni retirement News suppressed the important points of the BCCI contract
कॉन्ट्रैक्ट की अहम बातें - फोटो : सोशल मीडिया

गुरुवार दोपहर को जैसे ही बीसीसीआई ने नए सीजन के लिए सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट का एलान किया, पूरी मीडिया की नजरों में बस हर तरफ एमएस धोनी की ही खबर छाई रहीं। ऐसा गलत भी नहीं था क्योंकि धोनी का नदारद होना, एक बेहद अहम खिलाड़ी का नदारद होना था और चूंकि इसका मतलब ये भी था कि क्या अब माही के संन्यास का वक्त भी आ गया है।

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बहरहाल, कॉन्ट्रैक्ट में कुछ और अहम बदलाव हुए और कुछ नहीं भी हुए जो शायद उतनी सुर्खियां नहीं बटोर पाए। हार्दिक पांड्या का पिछले सीजन की तरह इस बार भी ग्रेड बी में रहना हैरान करने वाला फैसला रहा। पिछले दो साल में अगर भारतीय क्रिकेट में किसी एक युवा खिलाड़ी की हस्ती सबसे तेजी से बदली है तो वो पांड्या ही हैं। 
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विराट कोहली और रवि शास्त्री ने लगातार इस बार पर जोर दिया है कि पांड्या एक ऑलराउंडर होने के तौर पर इस मौजूदा भारतीय टीम के लिए कितनी बड़ी ताकत हैं। ये सही बात है कि फिटनेस की समस्या के चलते पांड्या ने पिछले 14 महीनों में एक भी टेस्ट नहीं खेला है।
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और शायद ये बात उनके खिलाफ गई हो, लेकिन वन-डे क्रिकेट और टी-20 में तो वो खेले और बेहतर खेले। जाहिर सी बात है कि पांड्या जिस तरीके से टीम इंडिया को संतुलन देते हैं उनका आकलन सिर्फ आंकड़ों के बूते नहीं हो सकता है। 

पांड्या को न्यूजीलैंड दौरे पर ले जाने के लिए टीम इंडिया बेकरार

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हार्दिक पांड्या - फोटो : social Media

बी ग्रेड में पांड्या के साथ ऋद्धिमान साहा साहा, उमेश यादव, युजवेंद्र चहल और मयंक अग्रवाल है। किसी भी चारों खिलाड़ी का सम्मान जरा भी कम किए बगैर ये कहना शायद अनुचित नहीं होगा कि पांड्या अपनी काबिलियत और उपयोगिता के लिहाज से इन सब पर भारी ही पड़े हैं। अगर साहा, यादव और मयंक सिर्फ टेस्ट तक सीमित हैं तो चहल सफेद गेंद वाली क्रिकेट ही खेलते हैं।

ऐसे में पांड्या जो तीनों फॉर्मेट खेलते हैं और अनके नहीं रहने पर टीम इंडिया कभी विजय शंकर तो कभी शिवम दुबे में उनका विकल्प ढूंढने के लिए विचलित होती दिखाई देती है। ये बात और भी रेखाकिंत करती है कि क्यों पांड्या को कम से कम ए ग्रेड में होना चाहिए था।

अगर फिटनेस से लगातार जूझने वाले भुवनेश्वर कुमार ए ग्रेड में रह सकतें हैं, टेस्ट से बाहर और टी-20 में जूझने वाले शिखर धवन ए ग्रेड में हो सकते हैं, अगर सिर्फ टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले ईशांत शर्मा, अश्विन, पुजारा और रहाणे ए ग्रेड में रह सकते हैं, तो पांड्या को भी ए में जगह शायद मिलनी चाहिए थी।

ये बात पांड्या जैसे खिलाड़ी को और चोट पहुंचा सकती है जब वो ये देखेंगे कि ऋषभ पंत इतनी आलोचना के बावजूद और यहां तक कि कुलदीप यादव भी ए ग्रेड का हिस्सा हैं। टीम इंडिया के कप्तान और कोच लगातार पांड्या को अहम मैच और अहम सीरीज में खिलाने को लेकर जोर देते रहते हैं।

पांड्या को न्यूजीलैंड दौरे पर ले जाने के लिए टीम इंडिया बेकरार है। सिर्फ फिट नहीं होने के चलते वो टी-20 टीम में नहीं है और इंडिया ए के साथ भी दौरे पर नहीं होंगे। लेकिन, उम्मीद की जा रही है कि वो किसी तरह से फिट हों और कम से कम टेस्ट सीरीज में शिरकत करें।

बीसीसीआई थोड़ा इंतजार नहीं कर सकती थी?

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बीसीसीआई, स्पोर्ट्स - फोटो : SELF

पंड्या के नहीं रहने के चलते मुंबई वन-डे के दौरान ऑस्ट्रेलिया ने दिखाया कि कैसे भारतीय टीम को अपना संतुलन बनाने में मुश्किल आ सकती है। अगर पांड्या फिट होते तो शार्दुल ठाकुर की जगह वो खेलते। इसमें शायद ही शक हो कि वो सिर्फ गेंद से ही ठाकुर पर भारी हैं।

अगर उनकी बल्लेबाजी की बात की जाए तो जडेजा और पंत से बड़े मैच-विनर हैं। इत्तेफाक ये है कि दोनों खिलाड़ी भी पांड्या से ऊपर वाले ग्रेड में हैं। पांड्या के जिगरी दोस्त केएल राहुल को भी पदोन्नति मिली है।

पिछले साल वो भी बी ग्रेड में थे, लेकिन इस बार वो ए ग्रेड में हैं। जबकि राहुल भी टेस्ट क्रिकेट से बाहर हैं। वो भी सिर्फ टी-20 और वन-डे में ही सक्रिय हैं। मयंक अग्रवाल ने भी काफी इंतजार के बाद टीम में जगह पाई है और उन्हें इस बात की खुशी होगी कि वो इतने कम समय में ही पांड्या के ग्रेड में शामिल हो गए।

इन खिलाड़ियों को पहली बार मिली जगह

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नवदीप सैनी - फोटो : पीटीआई

कुल 27 खिलाड़ियों को मिलने वाले कॉन्ट्रैक्ट में नवदीप सैनी और दीपक चाहर का होना सुखद है, तो वाशिंगटन सुंदर और श्रैयस अय्यर के पास ये मौका है कि वो इस साल और दमदार खेल दिखाकर अपनी ग्रेडिंग अगले साल और बेहतर करें।

एक बात और अहम है कि क्या सौरव गांगुली और बीसीसीआई को नए मुख्य चयनकर्ता का इंतजार नहीं करना चाहिए था। अगले कुछ ही हफ्तों में एमएस के प्रसाद की जगह कोई नया मुख्य चयनकर्ता आएगा तो ऐसे में क्या इतने बड़े फैसले के लिए बीसीसीआई थोड़ा इंतजार नहीं कर सकती थी? या फिर इसे सौरव गांगुली का और बोर्ड सचिव जय शाह का ही फैसला माना जाए जिसमें मुख्य चयनकर्ता की राय के बहुत ज्यादा मायने नहीं थे?

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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