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आखिर कौन हैं वह शख्स जिसकी शिकायत पर सचिन-सौरव समेत कपिल देव जैसे दिग्गजों को देना पड़ा इस्तीफा?

Thu, 03 Oct 2019 01:37 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: अंशुल तलमले Updated Thu, 03 Oct 2019 01:37 PM IST
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Sanjeev Gupta: Man who is behind conflict of interest crisis and implementations of Lodha Committee
सचिन-सौरव और लक्ष्मण - फोटो : social Media

जब से बीसीसीआई में सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद जस्टिस लोढ़ा कमेटी की सिफारिशें लागू हुई हैं, तभी से भारतीय क्रिकेट में उथल-पुथल मची हुई है। 'हितों का टकराव' और 'दोहरे लाभ का पद' कुछ ऐसी शब्दावली हैं, जो पिछले एक साल से लगातार सुनाई दे रहीं हैं। बोर्ड से जुड़े कई अधिकारियों और पूर्व खिलाड़ियों को अपना तक छोड़ना पड़ा। सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण समेत कई दिग्गज इसकी जद में आ चुके हैं। ताजा उदाहरण 1983 विश्व विजेता कप्तान कपिल देव का है, जिन्होंने 'हितों के टकराव' आरोपों के बाद ही 2 अक्टूबर को क्रिकेट सलाहकार समिति यानी CAC के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया। ऐसे में सभी के मन में यही सवाल आता है, कि आखिर वह शख्स हैं कौन, जो बोर्ड से इन धुरंधरों की शिकायतें कर रहा है या फिर इन लोगों पर नजर रख रहा है।

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इंदौर के रहने वाले हैं संजीव गुप्ता

मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के आजीवन सदस्य संजीव गुप्ता ही वह शख्स हैं, जो भारतीय क्रिकेट बोर्ड में क्रांति लाना चाहते हैं। गुप्ता को बचपन से क्रिकेट में दिलचस्पी थी। ऑफ स्पिन गेंदबाजी किया करते थे, एक बार यूनिवर्सिटी की टीम से भी खेलना का मौका मिला, लेकिन ज्यादा आगे तक नहीं जा पाए। बीसीसीआई के संविधानों की गहरी जानकारी रखने वाले गुप्ता मीडिया की चकाचौंध से दूर रहते हैं। अबतक वह सीओए को करीब 400 ईमेल भेज चुके हैं।

इंदौर के रहने वाले 45 वर्षीय संजीव गुप्ता करीब तीन साल से बीसीसीआई के प्रशासकों की समिति और आचार अधिकारी के काम का तनाव बढ़ा रखे हैं। मीडिया से बात करने में संकोच करने वाले संजीव गुप्ता कानून के अच्छे जानकार हैं। क्रिकेटर्स की हर शिकायत वह तथ्यों और नियमों के आधार पर ही करते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार गुप्ता लगातार पत्रकारों के संपर्क में रहते हैं, लेकिन उन्होंने इंटरव्यू देने से साफ मना कर दिया, यहां तक की अपनी फोटो भी साझा नहीं की।

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गुप्ता की माने तो उनकी किसी से कोई दुश्मनी है। शिकायत करने के पीछे उनका कोई निजी स्वार्थ भी नहीं है। वह सिर्फ लोढ़ा कमेटी के नियमों का 100 फीसदी अनुपालन करवाना चाहते हैं। खुद बीसीसीआई के अधिकारी उनके ज्ञान और संविधान की जानकारी से हतप्रभ हैं। गुप्ता से अगर एक खंड के बारे में पूछा जाए तो, वह पृष्ठ क्रमांक समेत सब कुछ बता देते हैं।

संजय सबसे पहले उस वक्त चर्चा में आए जब, जब बीसीसीआई के लोकपाल अधिकारी जस्टिस डीके जैन ने उनकी शिकायत के आधार पर सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण के खिलाफ सुनवाई की। गुप्ता ने आरोप लगाया था कि पूर्व क्रिकेटर ने दो पद संभाल हुए हैं। जो लोढ़ा कमिटी की 'एक व्यक्ति एक पद' नियम के खिलाफ है। हालांकि निर्णय आने से पहले ही सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट सलाहकार समिति से इस्तीफा दे दिया था। इन सबके बीच गुप्ता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा, कुछ दिनों पहले दिल्ली के एक वकील ने गुप्ता को  कानूनी नोटिस भेजा था, जिसकी उन्होंने वैसे ही जवाब भी दिया।

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