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क्या युवी, क्या भज्जी, लाला अमरनाथ ने 12 साल बाद की थी टीम इंडिया में वापसी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 11 Sep 2016 08:58 AM IST
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लाला अमरनाथ
- फोटो : Getty
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लाला अमरनाथ को भारतीय क्रिकेट टीम का पहला सुपरस्टार कहा जाए तो अतिशियोक्ति नहीं होगी। भारतीय क्रिकेट के पहले हीरो माने जाने वाले लाला अमरनाथ की आज 105वीं जयंती है। उनका जन्म 11 सितंबर, 1911 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था, लेकिन उनकी परवरिश लाहौर में हुई। उनका पूरा नाम नानिक अमरनाथ भारद्वाज है।
आजाद भारत के पहले क्रिकेट कप्तान लाला अमरनाथ का करियर जितना शानदार रहा, उतना ही विवादित भी रहा। आजादी से पहले इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया के साथ गए लाला को उनके ही कप्तान ने अनुशासनहीनता के कारण वापस स्वदेश भेज दिया था। फिर उन्हें टीम इंडिया में वापसी करने में 12 साल लग गए। इस महान क्रिकेटर के जन्मदिन के अवसर पर उनकी क्रिकेट करियर से जुड़ी कुछ बेहद दिलचस्प बातें। जरूर पढ़े....
लाला अमरनाथ टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले न सिर्फ भारत के बल्कि एशियाई क्रिकेट जगत के भी पहले बल्लेबाज हैं। उन्होंने यह शतक मुंबई के जिमखाना ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ जारी टेस्ट मैच के तीसरे दिन 17 दिसंबर 1933 को लगाया। उन्होंने दूसरी पारी में 118 रन बनाए। उनके नाम डेब्यू टेस्ट में सबसे पहला शतक लगाने का भारतीय कीर्तिमान भी है।
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लाला अमरनाथ का पहला टेस्ट शतक इस लिहाज से भी खास रहा क्योंकि यह उनका पहला टेस्ट मैच भी था। साथ ही दोनों पारियों में उन्होंने अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा स्कोर किए। हालांकि दूसरी पारी में उनका शतक भी टीम की हार नहीं टाल सका। भारत यह मैच 9 विकेट से हारा था। उन्होंने पहली पारी में भी अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा 38 रन बनाए थे।
दाएं हाथ के बल्लेबाज लाला अमरनाथ न सिर्फ बेहतरीन बल्लेबाज थे बल्कि वह गजब के तेज गेंदबाज भी रहे। उन्होंने 1946 में इंग्लैंड दौरे के दौरान एक टेस्ट मैच की दोनों पारियों में 5-5 विकेट झटकने का कारनामा किया था। साथ ही अपने करियर में 3 बार 4-4 विकेट भी निकाले।
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आजाद भारत के पहले क्रिकेट कप्तान लाला अमरनाथ का करियर जितना शानदार रहा, उतना ही विवादित भी रहा। आजादी से पहले इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया के साथ गए लाला को उनके ही कप्तान ने अनुशासनहीनता के कारण वापस स्वदेश भेज दिया था। फिर उन्हें टीम इंडिया में वापसी करने में 12 साल लग गए। इस महान क्रिकेटर के जन्मदिन के अवसर पर उनकी क्रिकेट करियर से जुड़ी कुछ बेहद दिलचस्प बातें। जरूर पढ़े....
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लाला अमरनाथ टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले न सिर्फ भारत के बल्कि एशियाई क्रिकेट जगत के भी पहले बल्लेबाज हैं। उन्होंने यह शतक मुंबई के जिमखाना ग्राउंड पर इंग्लैंड के खिलाफ जारी टेस्ट मैच के तीसरे दिन 17 दिसंबर 1933 को लगाया। उन्होंने दूसरी पारी में 118 रन बनाए। उनके नाम डेब्यू टेस्ट में सबसे पहला शतक लगाने का भारतीय कीर्तिमान भी है।
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लाला अमरनाथ का पहला टेस्ट शतक इस लिहाज से भी खास रहा क्योंकि यह उनका पहला टेस्ट मैच भी था। साथ ही दोनों पारियों में उन्होंने अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा स्कोर किए। हालांकि दूसरी पारी में उनका शतक भी टीम की हार नहीं टाल सका। भारत यह मैच 9 विकेट से हारा था। उन्होंने पहली पारी में भी अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा 38 रन बनाए थे।
दाएं हाथ के बल्लेबाज लाला अमरनाथ न सिर्फ बेहतरीन बल्लेबाज थे बल्कि वह गजब के तेज गेंदबाज भी रहे। उन्होंने 1946 में इंग्लैंड दौरे के दौरान एक टेस्ट मैच की दोनों पारियों में 5-5 विकेट झटकने का कारनामा किया था। साथ ही अपने करियर में 3 बार 4-4 विकेट भी निकाले।
तीसरे से चौथा टेस्ट खेलने में लाला को लगे 12 साल
लाला अमरनाथ
- फोटो : Getty
कहने को तो लाला अमरनाथ का टेस्ट करियर 19 साल तक रहा। लेकिन लगभग 2 दशक तक के अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में वह कुल 24 टेस्ट मैच ही खेल सके, जिसमें उन्होंने एक शतक के अलावा 4 अर्धशतक लगाए।
22 साल की उम्र में टेस्ट करियर की शुरुआत करने वाले लाला अमरनाथ ने 1933 में अपने 3 टेस्ट खेल लिए थे, लेकिन इसके बाद उन्हें अपना चौथा टेस्ट खेलने के लिए पूरे 12 साल का इंतजार करना पड़ा। 1933 में तीसरा टेस्ट खेलने के बाद अपना चौथा टेस्ट 1945-46 में खेला।
1936 में इंग्लैंड दौरे के दौरान टीम इंडिया के कप्तान महाराज कुमार ऑफ विजयपुरम ने लाला अमरनाथ को अनुशासनहीनता के कारण स्वदेश लौटा दिया था। लाला दौरे का एक भी टेस्ट मैच खेल नहीं सके थे। बाद में लाला और अन्य कई लोगों ने आरोप लगाया कि ऐसा राजनीति के कारण किया जा रहा है। महाराज को 1936 के दौरे के लिए टीम इंडिया का कप्तान बनाया गया था।
हुआ यूं कि टीम इंडिया के कप्तान महाराज कुमार ऑफ विजयपुरम ने लाला अमरनाथ को बल्लेबाजी के लिए निचले क्रम में आने को कहा और उनकी जगह किसी अन्य बल्लेबाज को ऊपरी क्रम में जाने की बात कही। इस पर लाला बेहद नाराज हो गए और कप्तान के फैसले का विरोध किया। साथ ही उन्होंने दौरे के मैनेजर को भी नहीं छोड़ा। इस पर अनुशासनहीनता के कारण उन्हें वापस स्वदेश भेज दिया गया। पूरे प्रकरण पर जांच समिति बैठी जिसमें अमरनाथ को निर्दोष ठहराया गया। लेकिन इस बीच 12 साल लग गए उन्हें टीम में वापसी करने पर।
उन्होंने 41 साल की उम्र में अपना अंतिम टेस्ट मैच दिसंबर, 1952 में पाकिस्तान के खिलाफ कोलकाता में खेला था। गेंदबाजी करते हुए लाला ने 45 विकेट भी झटके। उनकी बेस्ट गेंदबाजी 96 रन देकर 5 विकेट है।
22 साल की उम्र में टेस्ट करियर की शुरुआत करने वाले लाला अमरनाथ ने 1933 में अपने 3 टेस्ट खेल लिए थे, लेकिन इसके बाद उन्हें अपना चौथा टेस्ट खेलने के लिए पूरे 12 साल का इंतजार करना पड़ा। 1933 में तीसरा टेस्ट खेलने के बाद अपना चौथा टेस्ट 1945-46 में खेला।
1936 में इंग्लैंड दौरे के दौरान टीम इंडिया के कप्तान महाराज कुमार ऑफ विजयपुरम ने लाला अमरनाथ को अनुशासनहीनता के कारण स्वदेश लौटा दिया था। लाला दौरे का एक भी टेस्ट मैच खेल नहीं सके थे। बाद में लाला और अन्य कई लोगों ने आरोप लगाया कि ऐसा राजनीति के कारण किया जा रहा है। महाराज को 1936 के दौरे के लिए टीम इंडिया का कप्तान बनाया गया था।
हुआ यूं कि टीम इंडिया के कप्तान महाराज कुमार ऑफ विजयपुरम ने लाला अमरनाथ को बल्लेबाजी के लिए निचले क्रम में आने को कहा और उनकी जगह किसी अन्य बल्लेबाज को ऊपरी क्रम में जाने की बात कही। इस पर लाला बेहद नाराज हो गए और कप्तान के फैसले का विरोध किया। साथ ही उन्होंने दौरे के मैनेजर को भी नहीं छोड़ा। इस पर अनुशासनहीनता के कारण उन्हें वापस स्वदेश भेज दिया गया। पूरे प्रकरण पर जांच समिति बैठी जिसमें अमरनाथ को निर्दोष ठहराया गया। लेकिन इस बीच 12 साल लग गए उन्हें टीम में वापसी करने पर।
उन्होंने 41 साल की उम्र में अपना अंतिम टेस्ट मैच दिसंबर, 1952 में पाकिस्तान के खिलाफ कोलकाता में खेला था। गेंदबाजी करते हुए लाला ने 45 विकेट भी झटके। उनकी बेस्ट गेंदबाजी 96 रन देकर 5 विकेट है।
ब्रेडमैन को हिटविकेट करने वाले एकमात्र गेंदबाज हैं लाला
लाला अमरनाथ
- फोटो : Getty
लाला अमरनाथ दुनिया के एकमात्र ऐसे गेंदबाज हैं जिन्होंने क्रिकेट के महानतम बल्लेबाज ऑस्ट्रेलिया के डॉन ब्रेडमैन को हिटविकेट आउट करने का कारनामा किया है। ब्रेडमैन अपने बेमिसाल करियर में सिर्फ एक बार ही हिटविकेट हुए और वह भी लाला की गेंद पर।
साथ ही 1947 में देश के आजाद होने के बाद लाला भारतीय क्रिकेट टीम के पहले टेस्ट कप्तान बने और उनकी अगुवाई में टीम ने 1947-48 में ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था। जहां उन्होंने ब्रेडमैन को हिट विकेट किया।
इसके बाद उनकी कप्तानी में ही भारत ने पहली बार कोई टेस्ट सीरीज जीती थी। 1952-53 में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने पाक टीम भारत के दौरे पर आई। इस दौरे पर टीम इंडिया ने दिल्ली में खेले गए पहले टेस्ट मैच में पाक को एक पारी 70 रन से हरा दिया था, बाद में सीरीज भी 2-1 से जीत लिया। पाक की यह पहली टेस्ट सीरीज थी। वह 2 साल बाद 1954-55 में पाकिस्तान के दौरे पर गई टीम इंडिया के साथ गए थे।
टेस्ट क्रिकेट में भारत की ओर से पहला शतक लगाने वाले पूर्व कप्तान लाला अमरनाथ के तीनों बेटों में से 2 मोहिंदर अमरनाथ और सुरिंदर अमरनाथ को टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका मिला। जबकि तीसरे बेटे राजिंदर अमरनाथ ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला। इनमें मोहिंदर अमरनाथ आगे चलकर भारतीय टीम के कप्तान भी बने।
साथ ही 1947 में देश के आजाद होने के बाद लाला भारतीय क्रिकेट टीम के पहले टेस्ट कप्तान बने और उनकी अगुवाई में टीम ने 1947-48 में ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था। जहां उन्होंने ब्रेडमैन को हिट विकेट किया।
इसके बाद उनकी कप्तानी में ही भारत ने पहली बार कोई टेस्ट सीरीज जीती थी। 1952-53 में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेलने पाक टीम भारत के दौरे पर आई। इस दौरे पर टीम इंडिया ने दिल्ली में खेले गए पहले टेस्ट मैच में पाक को एक पारी 70 रन से हरा दिया था, बाद में सीरीज भी 2-1 से जीत लिया। पाक की यह पहली टेस्ट सीरीज थी। वह 2 साल बाद 1954-55 में पाकिस्तान के दौरे पर गई टीम इंडिया के साथ गए थे।
टेस्ट क्रिकेट में भारत की ओर से पहला शतक लगाने वाले पूर्व कप्तान लाला अमरनाथ के तीनों बेटों में से 2 मोहिंदर अमरनाथ और सुरिंदर अमरनाथ को टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका मिला। जबकि तीसरे बेटे राजिंदर अमरनाथ ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला। इनमें मोहिंदर अमरनाथ आगे चलकर भारतीय टीम के कप्तान भी बने।