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मैदान के बाहर भी अपने खेल को लेकर गंभीर हैं कोहली

Tue, 17 Jan 2017 05:11 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला,नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला,नई दिल्ली Updated Tue, 17 Jan 2017 05:11 PM IST
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kohli is fiercely focused not only on field but off it too

भारतीय क्रिकेट टीम के नए कैप्टन विराट कोहली अपने खेल को लेकर न केवल मैदान में बल्कि मैदान के बाहर भी केंद्रित हैं।

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विराट कोहली ने एक ब्रिटिश चैनल के लिए इंग्लैंड के पूर्व कैप्टन नासिर हुसैन को दिए इंटरव्यू में कहा। 'मेरे जीवन में मेरे करीबी बहुत कम लोग हैं। मुझे लगता है कि ऐसा होना भी किस्मत की बात है। अगर आपके पास बात करने के लिए ज्यादा लोग हों तो आप अपने लक्ष्य पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। जिससे टाइम मैनेज कर पाना मुश्किल हो जाता है।'

कोहली ने इंटरव्यू में अपनी क्रिकेट तकनीकी को लेकर भी बात की। 2014 में इंग्लैंड दौरे पर कोहली पांच मैचों में 50 रन जोड़ने में भी नाकामयाब रहे थें। जिसके बाद उन्होंने अपने खेल की तकनीक में बदलाव किए। जिससे कोहली का प्रदर्शन बेहतर हो सका। कोहली ने 2014 के अंत में अाॅस्ट्रेलिया दौरे पर चार टेस्ट मैचों में चार शतक लगाए थे। जिसके बाद से उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है।
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कोहली ने कहा कि, 2014 इंग्लैंड दौरे के दौरान मैं रन बनाने को लेकर दबाव में आ गया था। जिससे मेरे प्रदर्शन में कमी आई। मुझे लगता है इंग्लैंड के खिलाफ रन बनाने के लिए मैं बेताब था। जब आप वैसा नहीं कर पाते जैसा आप करना चाहतें हैं, तो आप खुद को कमजोर मानने लगते हैं।
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किसी खेल के लिए रणनीति बहुत जरूरी है, लेकिन अगर आपकी रणनीति बहुत अच्छी न हों और आप मानसिक रूप से तैयार हों तो आप अच्छा स्कोर कर सकतें हैं। मेरी दिक्कत यह थी कि मैं इनस्विंग गेंद का इंतजार कर रहा था और आउटस्विंग को काउंटर करने की स्थिती में नहीं था।

कोहली ने कहा कि, अभी यह बदलाव कर पाना आसान है, लेकिन शुरुआत में यह बदलाव कर पाना मेरे लिए मुश्किल था। मैंने दस दिनों तक रोजाना तीन घंटे प्रैक्टिस की। हफ्ते के अंत में मेरे हाथों में ऐंठन होने लगी थी। आप जानते हैं कि गोल्फ में किसी शॉट को दमदार बनाने के लिए 400-500 बार एक ही शॉट की प्रैक्टिस करनी पड़ती है। मैं किसी एक तरह के खेल का आदी नहीं होना चाहता था। जिसके लिए मैं किसी शॉर्ट गेंद या पैरों के पास गेंद का इंतजार करूं। 


कोहली ने बताया कि उस वक्त सचिन ने उनकी काफी मदद की। 'सचिन ने मुझे बताया की जैसे तुम स्पिनर को खेलना चाहते हो। मैं फास्ट बॉलर को खेलना चाहता था। एक अच्छे शॉट के लिए स्विंग या पेस की चिंता मत करो बस गेंद को समझो। सचिन की सलाह ने मेरी मदद की।' 

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