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Ranji Trophy: 91 साल के इतिहास में पहली बार चैंपियन बना जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक को पारी की बढ़त के आधार पर हराया
Sat, 28 Feb 2026 02:19 PM IST
Sovit Chaturvedi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, हुबली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, हुबली
Published by: Sovit Chaturvedi
Updated Sat, 28 Feb 2026 02:19 PM IST
सार
Ranji Final Karnataka vs Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर ने कर्नाटक के खिलाफ इतिहास रचते हुए पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया है। जम्मू-कश्मीर की टीम पहली बार फाइनल में पहुंची थी और उसने पहली पारी में बढ़त के आधार पर ट्रॉफी अपने नाम कर ली है।
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रणजी ट्रॉफी
- फोटो : IANS
विस्तार
जम्मू-कश्मीर ने इतिहास रचते हुए रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम कर लिया है। जम्मू-कश्मीर ने कर्नाटक के खिलाफ ये मुकाबला पहली पारी में बढ़त के आधार पर अपने नाम किया। जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 291 रन की बढ़त हासिल की थी। पांचवें दिन जम्मू-कश्मीर ने दूसरी पारी में चार विकेट पर 342 रन बनाए और उसकी कुल बढ़त 633 रनों की हो गई थी। जम्मू-कश्मीर के कप्तान पारस डोगरा ने पारी घोषित करने का फैसला किया। इसके बाद दोनों टीमों के कप्तान दिन का खेल समाप्त करने पर सहमत हुए और मैच ड्रॉ रहा। इस तरह जम्मू-कश्मीर ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली।
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इकबाल-साहिल के बीच बड़ी साझेदारी
जम्मू-कश्मीर के लिए इस मैच में आकिब नबी डार ने पहली पारी में पांच विकेट झटके, जबकि दूसरी पारी में सलामी बल्लेबाज कामरान इकबाल और साहिल लोटरा ने शानदार साझेदारी की। इन दोनों बल्लेबाजों ने पांचवें विकेट के लिए 197 रनों की अविजित साझेदारी की। इकबाल 311 गेंदों पर 16 चौकों और तीन छक्कों की मदद से 160 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि साहिल ने 226 गेंदों पर आठ चौकों और तीन छक्कों के सहारे नाबाद 101 रन बनाए।
जम्मू-कश्मीर के लिए इस मैच में आकिब नबी डार ने पहली पारी में पांच विकेट झटके, जबकि दूसरी पारी में सलामी बल्लेबाज कामरान इकबाल और साहिल लोटरा ने शानदार साझेदारी की। इन दोनों बल्लेबाजों ने पांचवें विकेट के लिए 197 रनों की अविजित साझेदारी की। इकबाल 311 गेंदों पर 16 चौकों और तीन छक्कों की मदद से 160 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि साहिल ने 226 गेंदों पर आठ चौकों और तीन छक्कों के सहारे नाबाद 101 रन बनाए।
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विकेट के लिए तरसे कर्नाटक के गेंदबाज
जम्मू-कश्मीर ने पांचवें दिन दूसरी पारी चार विकेट पर 186 रन से आगे बढ़ाई। पांचवें दिन कर्नाटक के गेंदबाज विकेट के लिए तरस गए। जम्मू-कश्मीर के लिए इकबाल और साहिल ने मोर्चा संभाला और कर्नाटक के गेंदबाजों को जमकर परेशान किया। पहला सत्र पूरी तरह इकबाल और साहिल के नाम रहा। इकबाल ने पहले शतक पूरा किया और फिर साहिल भी पीछे नहीं रहे। दोनों बल्लेबाजों ने लंच ब्रेक तक कर्नाटक को एक भी सफलता हासिल नहीं करने दी। स्थिति इतनी खराब रही कि कर्नाटक के गेंदबाज पांचवें दिन का खेल समाप्त होने तक इस साझेदारी को नहीं तोड़ सके और मैच अंत में ड्रॉ रहा। कर्नाटक की ओर से प्रसिद्ध कृष्णा को दो विकेट मिले, जबकि विजयकुमार विशाक और श्रेयस गोपाल को एक-एक सफलता मिली।
जम्मू-कश्मीर ने पांचवें दिन दूसरी पारी चार विकेट पर 186 रन से आगे बढ़ाई। पांचवें दिन कर्नाटक के गेंदबाज विकेट के लिए तरस गए। जम्मू-कश्मीर के लिए इकबाल और साहिल ने मोर्चा संभाला और कर्नाटक के गेंदबाजों को जमकर परेशान किया। पहला सत्र पूरी तरह इकबाल और साहिल के नाम रहा। इकबाल ने पहले शतक पूरा किया और फिर साहिल भी पीछे नहीं रहे। दोनों बल्लेबाजों ने लंच ब्रेक तक कर्नाटक को एक भी सफलता हासिल नहीं करने दी। स्थिति इतनी खराब रही कि कर्नाटक के गेंदबाज पांचवें दिन का खेल समाप्त होने तक इस साझेदारी को नहीं तोड़ सके और मैच अंत में ड्रॉ रहा। कर्नाटक की ओर से प्रसिद्ध कृष्णा को दो विकेट मिले, जबकि विजयकुमार विशाक और श्रेयस गोपाल को एक-एक सफलता मिली।
जम्मू-कश्मीर ने नहीं किया था फॉलोऑन
जम्मू-कश्मीर के पहली पारी के 584 रनों के जवाब में कर्नाटक की टीम 293 रन पर सिमट गई। जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 291 रन की बढ़त हासिल करने के बावजूद फॉलोऑन नहीं देने का फैसला किया था। अगर आज दिन के खेल की समाप्ति तक मैच का नतीजा नहीं निकल पाता है तो जम्मू-कश्मीर पहली पारी में बढ़त के आधार पर यह मुकाबला अपने नाम कर लेगा। इस तरह टीम पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीत सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पहली पारी के 584 रनों के जवाब में कर्नाटक की टीम 293 रन पर सिमट गई। जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 291 रन की बढ़त हासिल करने के बावजूद फॉलोऑन नहीं देने का फैसला किया था। अगर आज दिन के खेल की समाप्ति तक मैच का नतीजा नहीं निकल पाता है तो जम्मू-कश्मीर पहली पारी में बढ़त के आधार पर यह मुकाबला अपने नाम कर लेगा। इस तरह टीम पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीत सकती है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मौजूद
जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक के बीच रणजी ट्रॉफी के फाइनल मैच को देखने के लिए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी स्टेडियम में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अपने एक्स अकाउंट पर मैच की तस्वीरें साझा की थी।
जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक के बीच रणजी ट्रॉफी के फाइनल मैच को देखने के लिए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी स्टेडियम में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अपने एक्स अकाउंट पर मैच की तस्वीरें साझा की थी।
जम्मू-कश्मीर के लिए आसान नहीं रहा सफर
- जम्मू कश्मीर ने पहली बार 1959-60 के सत्र में रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लिया था और तब से लेकर अब तक उसे मजबूत दावेदार नहीं माना जाता था।
- जम्मू कश्मीर ने इस सत्र से पहले 334 रणजी मैच खेले थे, जिनमें से उसने केवल 45 जीते थे।
- उसे अपनी पहली जीत दर्ज करने में 44 साल लग गए, जो उसने 1982-83 में सेना के खिलाफ हासिल की थी।
- उसके लिए नॉकआउट में पहुंचना कभी आसान नहीं रहा लेकिन 2013-14 में उसे एक बड़ी सफलता मिली जब उसने नेट रन रेट के आधार पर गोवा को पीछे छोड़कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई।
- उसने 2015-16 में परवेज रसूल की कप्तानी में वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई को हराकर अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी।
- इस सत्र में कोच अजय शर्मा और कप्तान पारस डोगरा के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर ने अपने विश्वास को परिणामों में तब्दील कर दिया और वह खिताब जीतने में सफल रही।