जम्मू-कश्मीर: जेकेसीए ने परवेज रसूल पर लगाया पिच रोलर चुराने का आरोप, क्रिकेटर ने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया
जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएश ने क्रिकेटर परवेज रसूल पर चोरी का आरोप लगाया है। बोर्ड का कहना है कि परवेज ने पिच रोलर की चोरी की है और उन्हें मशीन लौटाने के लिए एक सप्ताह का वक्त दिया जाता है। अगर परवेज ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन ने क्रिकेटर परवेज रसूल पर बेहद गंभीर आरोप लगाया है। जेकेसीए ने उन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि परवेज रसूल ने पिच रोलर चुराया है। बोर्ड का कहना है कि परवेज पिच रोलर लौटाएं नहीं तो फिर कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें।
जेकेसीए ने लगाए चोरी के आरोप
बोर्ड की तरप से बयान में कहा गया है कि आपके पास जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन की संपत्ति है, विश्वास तोड़ने के बदले आपके खिलाफ कोई भी बड़ा कदम उठाने जिसमें पुलिस कार्रवाई भी शामिल हो सकती है, आप से कहा जाता है कि पिच रोलर एक सप्ताह में जेकेसीए को लौटा दें, इसके बावजूद अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो हम आपके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं।
परवेज ने किया खंडन
उधर परवेज रसूल ने जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा लगाए गए इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, क्या एक इंटरनेशल क्रिकेटर जिसने जम्मू-कश्मीर को अपना तन-मन दिया हो उससे इस तरह व्यवहार करने का यही तरीका है।
जेकेसीए सदस्य ने दी सफाई
वहीं जम्मू और कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के सदस्य अनिल गुप्ता ने इस मामले पर सफाई दी है। उनका कहा है कि इस मुद्दे को बेवजह तूल दिया जा रहा है, अनिल ने कहा, यह नोटिस सिर्फ परवेज रसूल को ही नहीं भेजा गया है, बल्कि इस नोटिस के तहत जेकेसीए की मशीन (रोलर) जिस किसी के पास हो उससे वापस करने को कहा गया है। बोर्ड के सदस्य ने आगे कहा, मुझे नहीं पता कि परवेज ने इस बात को अपने दिल पर क्यों ले लिया और वह ऐसा क्यों कह रहे हैं।
परवेज ने लगाई बीसीसीआई से गुहार
क्रिकेटर परवेज रसूल ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह से खारिज क दिया है। उन्होंने चोरी के लगे आरोप को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। रसूल के मुताबिक अब वह अपने भविष्य के बारे में सोचने को मजबूर हो गए हैं। रसूल ने कहा मैं चाहता हूं कि बीसीसीआई इस मामले में दखल दे, मुझे अपने भविष्य के बारे में सोचने के लिए मजबूर किया जा रहा है।