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क्या खत्म हो जाएगा वनडे?: क्रिकेट का नियम बनाने वाले MCC ने दिया यह सुझाव, 2027 विश्व कप के बाद लागू करने कहा
Wed, 12 Jul 2023 07:06 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 12 Jul 2023 07:06 PM IST
सार
वनडे लगभग दो दशकों से दबाव में है। इससे पहले भी कई बार वनडे क्रिकेट को खत्म करने की मांग उठ चुकी है। बेन स्टोक्स के वनडे से संन्यास लेने के बाद तो यह फॉर्मेट खासा चर्चा में रहा था।
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वनडे क्रिकेट का भविष्य
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने टेस्ट क्रिकेट और महिला क्रिकेट को बचाने के लिये अतिरिक्त धन की मांग पर जोर दिया है। इसके साथ ही 2027 विश्व कप के बाद वनडे क्रिकेट में कटौती का भी सुझाव दिया है। लॉर्ड्स में हाल ही में हुई बैठक में एमसीसी की 13 सदस्यीय विश्व क्रिकेट समिति ने हर विश्व कप से एक साल पहले के अलावा द्विपक्षीय वनडे सीरीज को खत्म करने का सुझाव दिया है। समिति ने व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए सुझाव दिया है ताकी खिलाड़ियों पर बोझ न हो। इससे अब वनडे क्रिकेट के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
एमसीसी ने अपनी वेबसाइट पर लिखा,''समिति ने आईसीसी विश्व कप के अलावा पुरूषों के वनडे क्रिकेट की भूमिका पर भी सवाल उठाए। इस दौरान सुझाव दिया गया कि 2027 पुरूष वनडे विश्व कप के बाद इस फॉर्मेट के मैचों की संख्या में कटौती की जाए। वनडे की संख्या में कटौती करने से इसकी गुणवत्ता बढ़ेगी। सिर्फ विश्व कप से एक साल पहले ही द्विपक्षीय वनडे खेले जाने चाहिए। इससे वैश्विक क्रिकेट कैलेंडर में भी राहत मिलेगी।''
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एमसीसी ने अपनी वेबसाइट पर लिखा,''समिति ने आईसीसी विश्व कप के अलावा पुरूषों के वनडे क्रिकेट की भूमिका पर भी सवाल उठाए। इस दौरान सुझाव दिया गया कि 2027 पुरूष वनडे विश्व कप के बाद इस फॉर्मेट के मैचों की संख्या में कटौती की जाए। वनडे की संख्या में कटौती करने से इसकी गुणवत्ता बढ़ेगी। सिर्फ विश्व कप से एक साल पहले ही द्विपक्षीय वनडे खेले जाने चाहिए। इससे वैश्विक क्रिकेट कैलेंडर में भी राहत मिलेगी।''
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एमसीसी समिति ने पांच दिवसीय क्रिकेट को अहम और जीवंत बनाए रखने के लिये अतिरिक्त धन देने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा, ''समिति लगातार सुनती आ रही है कि कई देशों में धन आभाव की वजह से वहां पुरूषों के टेस्ट क्रिकेट की मेजबानी संभव नहीं है । इस लिए टेस्ट क्रिकेट को अतिरिक्त कोष की जरूरत है।''
इसके साथ ही समिति ने महिला क्रिकेट को मजबूत बनाने के लिए भी अतिरिक्त कोष देने का सुझाव दिया। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक गेटिंग की अध्यक्षता वाली समिति में भारत से सौरव गांगुली और झूलन गोस्वामी हैं। उन्होंने 2027 के बाद पुरूष क्रिकेट के भावी दौरा कार्यक्रम में संतुलन बनाने की भी मांग की।
इसके साथ ही समिति ने महिला क्रिकेट को मजबूत बनाने के लिए भी अतिरिक्त कोष देने का सुझाव दिया। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक गेटिंग की अध्यक्षता वाली समिति में भारत से सौरव गांगुली और झूलन गोस्वामी हैं। उन्होंने 2027 के बाद पुरूष क्रिकेट के भावी दौरा कार्यक्रम में संतुलन बनाने की भी मांग की।
क्या खत्म होगा वनडे फॉर्मेट?
सच्चाई यह है कि वनडे लगभग दो दशकों से दबाव में है। इससे पहले भी कई बार वनडे क्रिकेट को खत्म करने की मांग उठ चुकी है। बेन स्टोक्स के वनडे से संन्यास लेने के बाद तो यह फॉर्मेट खासा चर्चा में रहा था। स्टोक्स ने वनडे फॉर्मेट से संन्यास लेते वक्त कहा था कि मौजूदा समय में जितने अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जा रहे हैं, उस स्थिति में उनके लिए तीनों फॉर्मेट खेलना मुश्किल है। इसलिए उन्होंने वनडे से संन्यास लेने का एलान किया। ऐसे में कई पूर्व क्रिकेटर्स की ओर से बयान आया कि वनडे क्रिकेट को समाप्त करना चाहिए या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) को कुछ ऐसा बदलाव लाना चाहिए जिससे यह फॉर्मेट फिर से जीवित हो उठे।
क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि टी-20 के रोमांच और टेस्ट क्रिकेट में हुए बदलाव (बैजबॉल इफेक्ट) के आगे वनडे फीका पड़ता दिख रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई ऐसा है? क्या वाकई वनडे क्रिकेट खत्म हो जाएगा? ऐसे में MCC ने यह सुझाव देकर वनडे को फिर से जीवंत करने का सुझाव दिया है। उनके सुझाव के मुताबिक, 2027 विश्व कप के बाद सिर्फ वनडे विश्व कप से एक साल पहले ही द्विपक्षीय वनडे खेला जाए। वनडे विश्व कप चार साल के गैप के बाद आता है। ऐसे में MCC ने दो साल सिर्फ टी20 और टेस्ट खेलने का सुझाव दिया है।
क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि टी-20 के रोमांच और टेस्ट क्रिकेट में हुए बदलाव (बैजबॉल इफेक्ट) के आगे वनडे फीका पड़ता दिख रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई ऐसा है? क्या वाकई वनडे क्रिकेट खत्म हो जाएगा? ऐसे में MCC ने यह सुझाव देकर वनडे को फिर से जीवंत करने का सुझाव दिया है। उनके सुझाव के मुताबिक, 2027 विश्व कप के बाद सिर्फ वनडे विश्व कप से एक साल पहले ही द्विपक्षीय वनडे खेला जाए। वनडे विश्व कप चार साल के गैप के बाद आता है। ऐसे में MCC ने दो साल सिर्फ टी20 और टेस्ट खेलने का सुझाव दिया है।
सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग
- फोटो : सोशल मीडिया
साल 2009 में सचिन तेंदुलकर ने महसूस किया था कि वनडे फॉर्मेट जिसने कई सालों से क्रिकेट की आमदनी और फैन्स की संख्या में वृद्धि कराई, वह अपनी महत्वता खोता जा रहा है। तब तेंदुलकर ने तर्क दिया था कि वनडे प्रेडिक्टेबल हो गया है। पावर-प्ले के पहले 10 ओवर और आखिरी 10 ओवरों में बड़ी हिटिंग ने इस फॉर्मेट को बनाए रहा है, लेकिन बीच के ओवरों में न ही फैन्स और न ही खिलाड़ी इसमें कुछ खास दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यह एक दिलचस्प तर्क था, क्योंकि यह बयान क्रिकेट जगत से ही आया था, वह भी उस क्रिकेटर से जिसने इस प्रारूप में काफी रन बनाए हैं और दुनियाभर में अपनी महानता साबित की है।
तेंदुलकर ने वनडे को बचाने के लिए क्या कहा था?
धोनी और सचिन तेंदुलकर
- फोटो : सोशल मीडिया
तब तेंदुलकर ने वनडे फॉर्मेट को बनाए रखने या यूं कहें जीवित रखने के लिए एक सुझाव भी दिया था। उन्होंने कहा था कि 50 ओवरों के एक साइड गेम को दोनों टीमों के लिए 25 ओवर की दो पारियों में विभाजित किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने फील्ड सेटिंग, बॉल चेंज को लेकर भी कई सुझाव दिए थे। इतना ही प्रसिद्ध खेल विश्लेषक अयाज मेमन ने एक बार इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और कमेंटेटर टोनी ग्रेग के एक बयान का जिक्र किया था।
टोनी ग्रेग ने भी दिया था सुझाव
अयाज ने बताया- टोनी ग्रेग ने भी 2012 में सचिन तेंदुलकर की तरह वनडे को चार पारियों में बांटे जाने की वकालत की थी। ग्रेग ने बताया था कि वनडे फॉर्मेट फीका पड़ता जा रहा है। 2011 वर्ल्ड कप भारत में खेला गया था और यह निश्चित तौर पर क्रिकेट के सबसे सफल टूर्नामेंट में से एक था, लेकिन इसके बावजूद टोनी को नहीं लगता था कि यह फॉर्मेट ज्यादा समय तक जीवित रह पाएगा।
हालांकि, इस मामले में टोनी ग्रेग गलत साबित हुए क्योंकि 2011 के बाद ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड में 2015 में खेले गए वनडे वर्ल्ड कप ने भी सफलता की ऊंचाइयों को छुआ था। इसके बाद 2019 में इंग्लैंड में खेला गया वनडे वर्ल्ड कप भी सुपर हिट रहा था। 2019 वर्ल्ड कप के फाइनल को कौन भुला सकता है।
इसके बाद भी इस फॉर्मेट पर दबाव लगातार बढ़ता रहा, लेकिन कोई समाधान किसी ने नहीं सोचा। न ही आईसीसी इस फॉर्मेट में कोई बदलाव को लेकर सामने आया है। इस बीच स्टोक्स के अचानक संन्यास लेने से क्रिकेट जगत में हड़कंप मच गया। क्या इससे बड़े खिलाड़ियों के बीच समय से पहले संन्यास की लहर दौड़ जाएगी? खैर, ये तो देखने वाली बात होगी।