भारत ने नागपुर में खेले गए एक रोमांचक मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को दूसरे वनडे में भी आठ रन से हरा दिया। इस जीत के साथ ही पांच मैच वाली वनडे सीरीज में भारत 2-0 से आगे हो गया है। अंतरराष्ट्रीय वन-डे मैच में भारत ने यह 500वां मैच जीता है। रोमांचक मुकाबले में इन पांच वजहों के चलते ही भारतीय टीम जीत हासिल करने में कामयाब हो पाई।
INDvAUS: टीम इंडिया की 500वीं जीत के ये रहे पांच बड़े कारण
विराट कोहली का शतक
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। रोहित शर्मा के आउट होने के बाद तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने पहुंचे कप्तान विराट कोहली ने एक छोर संभाला, लेकिन दूसरे छोर पर कोई भी बल्लेबाज खड़ा नहीं रह पाया। विजय शंकर ने जरूर कुछ अच्छे हाथ दिखाए। मगर 41 गेंदों में तेज तर्रार 46 रन की पारी खेलने के बाद वे बदकिस्मती में रन आउट हो गए। बावजूद इसके विराट कोहली ने हिम्मत नहीं हारी। विराट कोहली ने अपने करियर का 40वां शतक जमाते हुए 120 गेंदों में 10 चौकों की मदद से 116 रन बनाए।
रविंद्र जडेजा का थ्रो
मैच का टर्निंग प्वाइंट था पीटर हैंडस्कॉम्ब का विकेट, जिसे लिया रविंद्र जडेजा ने। उन्होंने हैंड्सकॉम्ब को रन आउट किया, जिसे देखकर विराट कोहली भी हैरान रह गए। पीटर हैंडस्कॉम्ब 48 रन पर खेल रहे थे और ऑस्ट्रेलिया के हाथ में मैच था। उसी वक्त जडेजा ने उनको शानदार रन आउट करते हुए चलता किया।
पारी का 38वां ओवर मोहम्मद शमी लेकर आए। उस वक्त दोनों ही कंगारू खिलाड़ी क्रीज पर जम चुके थे। भारतीय टीम को विकेट की तलाश थी। दूसरी गेंद पर हैंड्सकॉम्ब चौका मारकर 48 रन पर पहुंच चुके थे। तीसरी गेंद पर सिंगल चुराना चाहा, लेकिन बैकवर्ड पॉइंट पर मुस्तैद जड्डू ने मुस्तैदी का प्रदर्शन करते हुए ऐसा डायरेक्ट हिट मारा कि मैच भारत के पाले में आ गया।
बुमराह का आखिरी 2 ओवर
जसप्रीत बुमराह को अगर भारत की इस जीत का 'अनसंग हीरो' कहा जाए तो गलत नहीं होगा। भले ही चारों ओर आखिरी ओवर फेंकने विजय शंकर की चर्चा हो रही है। मगर भारतीय टीम की जीत के असल हीरो तो जसप्रीत बुमराह ही थे। जसप्रीत बुमराह ने मैच में 10 ओवर में महज 29 रन दिए।
आखिर 5 ओवर्स में जब ऑस्ट्रेलिया को महज 29 रन बनाने थे, तब विराट ने बुमराह को गेंद थमाई। हर कोई सोच रहा था कि ऑस्ट्रेलिया यह मैच आसानी से जीत लेगा। मगर 46वें ओवर की दूसरी गेंद पर कोल्टर नाइल और चौथी बॉल पर पैट कमिंस को आउट कर बुमराह ने कंगारुओं की कमर तोड़ दी। इतना ही नहीं 48वें ओवर में बल्लेबाजों को बांधते हुए, सिर्फ एक ही रन खर्च किया, जिससे पूरा दबाव ऑस्ट्रेलिया पर आ गया।
धोनी का अहम फैसला
बल्लेबाजी में भले ही महेंद्र सिंह धोनी का बल्ला नहीं चला हो। भले ही वे पहली ही गेंद में आउट हो गए हो। मगर इस तनाव भरे मैच में उनके फैसलों ने ही भारतीय टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाया।
खुद मैच के बाद विराट कोहली ने खुलासा किया कि वे 46वें ओवर में विजय शंकर को गेंद सौंपना चाहते थे लेकिन पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। विराट ने कहा कि धोनी ने उन्हें जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी के साथ गेंदबाजी जारी रखने की सलाह दी। उनका सोचना था कि अगर हम कुछ विकेट निकाल लेते है तो मैच में बने रहेंगे और ऐसा ही हुआ।