कभी दिहाड़ी मजदूर रहे मुनाफ पटेल ने विश्व कप में अंग्रेजों के मुंह से छीनी थी जीत
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साल था 2006, महीना मार्च का था, सर्दी धीरे-धीरे अपने लाव लश्कर को समेटकर लौटने की सड़क पर चल निकली थी। इसी मौसम में भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मैचों की द्विपक्षीय सीरीज हो रही थी। सीरीज का दूसरा मैच पंजाब के मोहाली के मैदान पर खेला गया। इस मैच में गुजरात के भरूच का एक ऐसा लड़का डेब्यू कर रहा जिसने इंडिया के लिए खेलना का सपना देखा था और उसे पूरा करने के लिए गरीबी से लड़ाई लड़ी थी। नौ मार्च को उस लड़के ने इंडिया की टेस्ट कैप को अपने सिर पर सजा लिया, उस घुंघराले बाल वाले लड़के नाम था मुनाफ मूसा पटेल जिसे देश ने मुनाफ पटेल के नाम से जाना।
मुनाफ बेहद ही गरीब परिवार में पैदा हुए, पिता खेतों में काम करते थे। खुद मुनाफ जब बड़े हुए तो वह मार्बल फैक्ट्री में टाइल्स की क्वालिटी चेक करके उन्हें पैक करने का काम किया करते थे। दिन के 35 रुपये हाथ में लेकर रोज शाम घर वापस पहुंचतेे, लेकिन क्रिकेट के लिए जुनून ने मुनाफ को टीम इंडिया में जगह दिला दी।
मुनाफ टीम में आते ही गेंदबाजी की जान बन गए। भारत के सबसे तेज गेंदबाजों में उनका नाम गिना जाने लगा, लेकिन धीरे धीरे मुनाफ की गति कम हुई, टीम से अंदर बाहर का सिलसिला शुरू हुआ। मुनाफ को 2011 के विश्व कप में जगह मिल गई। 2011 के विश्व कप में मुनाफ भारत के लिए तीसरे सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज थे।
आमतौर पर तेज गेंदबाजों का बॉलिंग एक्शन एकदम आक्रामक होता है, लेकिन मुनाफ उसके उलट थे। आराम से अपनी मस्ती में रनअप लेते हुए आते, विकेट पर आते ही हल्का सा एक पैर निकलते और बाएं हाथ का पंजा खोलते हुए गेंद फेंक देते, एक दम विकेट टू विकेट लाइन, इतनी सटीक कि बल्लेबाज को शॉट खेलने के लिए रूम तक नहीं मिलता।
अब जब रविवार से विश्व कप 2019 में इंग्लैंड से भिड़ंत होनी जा रही है, ऐसे में आपको भारत बनाम इंग्लैंड का एक ऐसा याद दिलाते हैं, जिसे विश्व कप इतिहास का सबसे रोमांचक मैच कहा जाए तो गलत नहीं होगा। आइए बताते हैं उस मैच के आखिरी ओवर की कहानी, जहां मुनाफ ने इंग्लैंड के मुंह से मैच छीन लिया था।
आखिरी ओवर का रोमांच
इंग्लैंड को जीतने के लिए 6 गेंदों पर 14 रन चाहिए थे, तो वहीं भारत को जीतने के लिए दो विकेट। आखिरी ओवर फेंकने का दारोमदार उस गेंदबाज को मिला, जो रन देने के मामले में कंजूस गेंदबाज के नाम से विख्यात था, नाम है मुनाफ पटेल। पटेल की पहली गेंद को स्वान ने दो रनों के लिए खेला।
इंग्लैंड को अब जीतने के लिए पांच गेंदों में 12 रन की दरकार थी। दूसरी गेंद पर स्वान ने सिंगल लेकर छोर बदल लिया। तीसरी गेंद पर शहजाद ने जोरदार बल्ला घुमाया और गेंद को छह रन के लिए सीमा पार कर गई। मैच का रुख कभी भारत तो कभी इंग्लैंड की तरफ घड़ी की पैंडुलम की तरह लटक रहा था।
अगली तीन गेंदों में अब इंग्लैंड को पांच रनों की जरूरत थी। चौथी गेंद शहजाद के पैड पर लगी और दोनों बल्लेबाजों ने दौड़कर एक रन चुरा लिया। स्टेडियम में बैठे दर्शकों की सांसें गेंदबाजी कर रहे मुनाफ पटेल की सांसों से अधिक तेज हो गई थीं।
मैच का रोमांच सातवें आसमान पर पहुंच चुका था। भारत को जीत के लिए दो गेंदों में दो विकेट, तो इंग्लैंड को जीत के लिए दो गेंदों में 4 रन की जरूरत थी। पांचवीं गेंद पर स्वान ने बड़ा शॉट खेलना चाहा, लेकिन गेंद उनके बल्ले के भीतरी किनारे को लेते हुए फील्डर के हाथों में गई, दोनों बल्लेबाजों ने दौड़कर दो रन पूरे कर लिए।
मैच की आखिरी गेंद पर इंग्लैंड को दो रन चाहिए थे। पटेल ने अंतिम गेंद फेंकी और स्वान ने जोरदार शॉट खेला, लेकिन गेंद सीधा फील्डर के हाथों में गई, कि इसी बीच दोनों ने दौड़कर एक रन पूरा कर लिया और विश्व कप के इतिहास में मैच को टाई करा लिया।
टीम इंडिया एक समय मैच में मजबूत थी लेकिन अंत में मैच के नतीजे ने जीत की मुस्कुराहट नहीं ला सकी। रोमांच की सारी हदों को पार करते हुए इंडिया और इंग्लैंड के बीच मैच टाई रहा। देश के लिए मुनाफ पटेल और धोनी के लिए मुन्ना ने अब संन्यास ले लिया है।