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पुणे पिच विवादः खतरे में क्यूरेटर दलजीत सिंह का पद, आईसीसी ने मांगा जवाब

Wed, 01 Mar 2017 12:02 PM IST
amarujala.com {written by: संदीप भट्ट}
amarujala.com {written by: संदीप भट्ट} Updated Wed, 01 Mar 2017 12:02 PM IST
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india vs australia daljit singh under scanner after poor rating of pune pitch
बीसीसीआई के मुख्य पिच क्यूरेटर दलजीत सिंह का पद खतरे में आ गया है। आईसीसी ने अपनी एक रिपोर्ट देते हुए पुणे में बनी पिच को खराब बताया था। इसी के साथ पिच क्यूरेटर दलजीत सिंह का पद समीक्षा के दायरे में आ गया है और उनके पद पर खतरा मंडरा रहा है।
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मालूम हो कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चार मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट पुणे में 23 फरवरी को खेला गया। मैच तीन दिन के अंदर खत्म हो गया था और भारत को इस मैच में 333 रन से हार का सामना करना पड़ा।
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आईसीसी मैच रेफरी क्रिस ब्रॉड ने अपनी रिपोर्ट में इस पिच को खराब करार दिया। पिच को खराब बताने के बाद इस पर अब और विवाद गहरा गया है। मैच शुरू होने से पहले पिच रिपोर्ट के समय पूर्व क्रिकेटर रवि शास्त्री और शेन वॉर्न ने भी इसकी आलोचना की थी। 
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बता दें कि बीते 14 माह के भीतर आईसीसी ने दो बार पिच को खराब स्तर का बताया। माना जा रहा है कि इसके बाद अब मुख्य पिच क्यूरेटर दलजीत सिंह पर गाज गिरना तय है। पुणे पिच मामले में बीसीसीआई को 14 दिनों के भीतर आईसीसी को जवाब देना है।

बीसीसीआई के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए गए बयान में कहा कि 'अगर टीम मैनेजमेंट से निर्देश मिले भी थे तब भी दलजीत उसे अनदेखा कर सकते थे। अगर क्यूरेटर झुकना नहीं चाहता है तो उस पर दबाव नहीं डाल सकता।

बीसीसीआई के अधिकारी ने कहा कि दलजीत का एक के बाद दूसरा डिजाइनर ट्रैक देने का इतिहास रहा है वहीं वे टीम की मांग पर झ़ुकते रहे हैं। कमिटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (सीओए) इस मामले की जांच कर सकती है।'

पहले भी खराब पिच बना चुके हैं दलजीत

india vs australia daljit singh under scanner after poor rating of pune pitch
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दलजीत सिंह 79 साल के होने के बाद भी मुख्य पिच क्यूरेटर के पद पर अभी भी बने हुए हैं। बता दें कि लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों में चयनकर्ताओं (60 वर्ष) और प्रशासनिक अधिकारियों (70 वर्ष) उम्र की कोई सीमा तय है। लेकिन पिच क्यूरेटर्स के लिए कोई उम्र की सीमा नहीं है।

मालूम हो कि नवंबर 2015 में भी आईसीसी द्वारा नागपुर की पिच को भी खराब स्तर का बताया गया। उस वक्त भी दलजीत सिंह पिच क्यूरेटर थे और पिच का पूरा जिम्मा उनके पास था। उस समय भी मैच तीन दिनों के भीतर खत्म हो गया था।
 
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