अंतिम टेस्ट में होगी रनों की भरमार, टर्निंग की जगह बल्लेबाजी के अनुकूल पिच बनाए जाने के संकेत
- विश्व चैंपियनशिप के लिए भारत को चाहिए सिर्फ ड्रॉ, जोखिम से बचेगा टीम प्रबंधन
- 04 : मार्च से अहमदाबाद के मैदान में ही खेला जाएगा इंग्लैंड के साथ सीरीज का अंतिम टेस्ट
- 2-1 : से बढ़त पर है टीम इंडिया और विश्व चैंपियनशिप फाइनल के लिए बस ड्रॉ की जरूरत
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इंग्लैंड के खिलाफ दिन-रात्रि टेस्ट के दो दिन के अंदर खत्म होने के बाद मोटेरा की पिच को भले ही आलोचनाओं का सामना करना पड़ा हो, लेकिन इसे खेल की संचालन संस्था अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से गंभीर सजा मिलने की संभावना नहीं है।
अंतिम टेस्ट की पिच के बल्लेबाजी के अनुकूल होने की संभावना है। भारत चार टेस्ट की सीरीज में 2-1 से आगे चल रहा है और जून (18-22) में लॉर्ड्स में होने वाले आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में क्वालिफाई करने के लिए उसे अंतिम टेस्ट को सिर्फ ड्रॉ कराना होगा। एक और स्पिन की अनुकूल पिच की संभावना कम है क्योंकि घरेलू टीम पिच को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। भारतीय टीम 3-1 के फैसले से खुश होगी लेकिन उसे नतीजा देने वाली टर्निंग पिच की जरूरत नहीं है। फिर टीम प्रबंधन यह भी नहीं चाहता कि ऐसी पिच बनाई जाए जो उन पर भारी पड़ जाए।
तीसरे टेस्ट में गेंद गुलाबी थी जो पिच पर पड़ने के बाद तेजी से निकल रही थी और बल्लेबाजों ने विकेट सीधी गेंदों पर भी गंवाए हैं। इंग्लैंड के कई पूर्व क्रिकेटर भी यह बात कह चुके हैं।
मामले की जानकारी रखने वाले भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘अच्छी पिच की उम्मीद है जो ठोस रहेगी और समान उछाल मिलेगा। यह बल्लेबाजी के अनुकूल होगी और यह पारंपरिक लाल गेंद का टेस्ट मैच होगा इसलिए यहां चार से आठ मार्च तक होने वाले मुकाबले में काफी बड़े स्कोर की उम्मीद की जा सकती है।’
नए स्थल पर एक और टर्निंग पिच सही नहीं
बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों के साथ टीम प्रबंधन भी समझता है कि धूल से भरी एक और पिच नए स्थल के लिए अच्छी नहीं होगी जिसके इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) और आईसीसी टी-20 विश्व कप के दौरान कई महत्वपूर्ण मैचों की मेजबानी करने की संभावना है।
अंतिम टेस्ट के बाद मैच रेफरी की रिपोर्ट
बीसीसीआई अधिकारी ने कहा, ‘अगर एक ही स्थल पर दो मैच होते हैं तो आप एक नतीजे को अलग नहीं कर सकते। अंतिम टेस्ट होने दीजिए और इसके बाद ही मैच रेफरी जवागल श्रीनाथ की रिपोर्ट के आधार पर आईसीसी अपनी कार्रवाई को लेकर फैसला करेगा। साथ ही अब तक इंग्लैंड की टीम ने भी कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है।’
अगर एक ही स्थल पर एक अच्छी और एक खराब पिच होती है तो आईसीसी के कार्रवाई करने की संभावना नहीं है। भारत सीरीज को 3-1 से अपने नाम करके खुश होगा लेकिन टीम को नतीजा देने वाली स्पिन की अनुकूल पिच की जरूरत नहीं है क्योंकि उसके लिए ड्रॉ ही काफी है। साथ ही भारतीय टीम प्रबंधन ऐसी पिच नहीं चाहता जिस पर बेहद महत्वपूर्ण मैच में खेलते हुए उसे नुकसान उठाना पड़े।
उन्होंने कहा, ‘गुलाबी गेंद का टेस्ट अच्छा रहा क्योंकि यह गेंद से अधिक जुड़ा हुआ मामला था। गेंद पिच पर गिरकर तेजी से आ रही थी जबकि पिच में कोई समस्या नहीं थी जैसा इंग्लैंड के कई पूर्व दिग्गज खिलाड़ी कह रहे हैं। वे सीधी गेंदों का सामना करने में नाकाम रहे। लेकिन इस तरह की पिचें अपने ऊपर भी भारी पड़ सकती हैं और बीसीसीआई को इसकी अच्छी तरह जानकारी है।’