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IND vs AUS: यशस्वी जायसवाल के साथ 'बेइमानी' करने वाले अंपायर शरफुद्दौला सैकत को जानें, बांग्लादेश से है नाता
Mon, 30 Dec 2024 05:04 PM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न
Published by: Mayank Tripathi
Updated Mon, 30 Dec 2024 05:04 PM IST
सार
तीसरे अंपायर ने नियम के खिलाफ जाकर यशस्वी को बिना किसी ठोस सबूत के आउट करार दिया। हम यहां उस अंपायर के विषय में चर्चा करेंगे, जिसने यह विवादित फैसला लिया। आइये जानते हैं...
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शरफुद्दौला सैकत-यशस्वी जायसवाल
- फोटो : ICC/BCCI
विस्तार
मेलबर्न टेस्ट में भारत को 184 रन से हार का सामना करना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरी पारी में भारतीय टीम की बल्लेबाजी खराब रही थी। भारत को 140 के स्कोर पर सातवां झटका यशस्वी जायसवाल के रूप में लगा था। वह 84 रन बनाकर आउट हुए थे। उनके साथ बेइमानी हुई थी। तीसरे अंपायर ने नियम के खिलाफ जाकर यशस्वी को बिना किसी ठोस सबूत के आउट करार दिया। हम यहां उस अंपायर के विषय में चर्चा करेंगे, जिसने यह विवादित फैसला लिया। आइये जानते हैं...
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कौन हैं यशस्वी को आउट देने वाले अंपायर?
यशस्वी को बेइमानी से आउट देने वाले तीसरे अंपायर का नाम शरफुद्दौला सैकत है। उनका जन्म 16 अक्तूबर 1976 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुआ था। वे एक पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर हैं जो मूल रूप से बाएं हाथ के लेग स्पिनर रहे। उन्होंने 2000 से 2001 के बीच ढाका मेट्रोपोलिस के लिए 10 मैच खेले। क्रिकेटर के तौर पर ज्यादा सफलता न मिलने के बाद शरफुद्दौला ने अंपायरिंग में अपना करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने फरवरी 2007 में बारिसल डिवीजन और सिलहट डिवीजन के बीच खेले गए अंपायरिंग की शुरुआत की थी। जनवरी 2010 में उन्हें बांग्लादेश बनाम श्रीलंका मैच में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंपायरिंग करने का मौका मिला था। इस साल की शुरुआत में शरफुद्दौला को आईसीसी अंपायरों के एलीट पैनल में शामिल किया गया था। इस लिस्ट में शामिल होने वाले वह पहले बांग्लादेशी बने।
यशस्वी को बेइमानी से आउट देने वाले तीसरे अंपायर का नाम शरफुद्दौला सैकत है। उनका जन्म 16 अक्तूबर 1976 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुआ था। वे एक पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर हैं जो मूल रूप से बाएं हाथ के लेग स्पिनर रहे। उन्होंने 2000 से 2001 के बीच ढाका मेट्रोपोलिस के लिए 10 मैच खेले। क्रिकेटर के तौर पर ज्यादा सफलता न मिलने के बाद शरफुद्दौला ने अंपायरिंग में अपना करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने फरवरी 2007 में बारिसल डिवीजन और सिलहट डिवीजन के बीच खेले गए अंपायरिंग की शुरुआत की थी। जनवरी 2010 में उन्हें बांग्लादेश बनाम श्रीलंका मैच में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंपायरिंग करने का मौका मिला था। इस साल की शुरुआत में शरफुद्दौला को आईसीसी अंपायरों के एलीट पैनल में शामिल किया गया था। इस लिस्ट में शामिल होने वाले वह पहले बांग्लादेशी बने।
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क्या था मामला?
कमिंस की लेग साइड पर शॉर्ट पिच गेंद को यशस्वी ने फाइन लेग पर खेलने की कोशिश की। वह चूके और गेंद विकेटकीपर कैरी के हाथों में गई। मैदानी अंपायर ने यशस्वी को आउट नहीं दिया जिसके बाद कमिंस ने डीआरएस लेने का फैसला किया। रिप्ले में स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि गेंद यशस्वी के बल्ले का किनारा लेकर गई है या नहीं। इसके बाद स्निको मीटर से जांचा गया, लेकिन स्निको मीटर में कोई हरकत नहीं दिखी। इसके बावजूद थर्ड अंपायर ने मैदानी अंपायर का फैसला पलट दिया और यशस्वी को आउट करार दिया। इससे वहां मौजूद सभी लोग चौंक गए और कमेंट्री बॉक्स में मौजूद दिग्गज भारतीय बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी सवाल खड़े किए। इस तरह भारत को 140 के स्कोर पर सातवां झटका लगा। यशस्वी 84 रन बनाकर आउट हुए।
कमिंस की लेग साइड पर शॉर्ट पिच गेंद को यशस्वी ने फाइन लेग पर खेलने की कोशिश की। वह चूके और गेंद विकेटकीपर कैरी के हाथों में गई। मैदानी अंपायर ने यशस्वी को आउट नहीं दिया जिसके बाद कमिंस ने डीआरएस लेने का फैसला किया। रिप्ले में स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि गेंद यशस्वी के बल्ले का किनारा लेकर गई है या नहीं। इसके बाद स्निको मीटर से जांचा गया, लेकिन स्निको मीटर में कोई हरकत नहीं दिखी। इसके बावजूद थर्ड अंपायर ने मैदानी अंपायर का फैसला पलट दिया और यशस्वी को आउट करार दिया। इससे वहां मौजूद सभी लोग चौंक गए और कमेंट्री बॉक्स में मौजूद दिग्गज भारतीय बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने भी सवाल खड़े किए। इस तरह भारत को 140 के स्कोर पर सातवां झटका लगा। यशस्वी 84 रन बनाकर आउट हुए।
क्या कहता है नियम?
नियम के अनुसार, ऐसे मामलों में थर्ड अंपायर स्निको मीटर को चेक करता है और उसमें हरकत होने पर बल्लेबाज को आउट दिया जाता है। लेकिन यशस्वी के मामले में स्निको मीटर को ही नजरअंदाज कर दिया गया। रिप्ले में जब कुछ स्पष्ट नहीं था तो यशस्वी पर फैसला स्निको मीटर की हरकत के आधार पर दिया जाना चाहिए था। यशस्वी जब शॉट खेल रहे थे, उस वक्त स्निको मीटर में कोई हरकत नहीं दिखी, जिसका स्पष्ट मतलब है कि गेंद यशस्वी के बल्ले का किनारा लेकर कैरी के हाथों में नहीं गई थी। इसके बावजूद थर्ड अंपायर बांग्लादेश के शरफुदौला ने यशस्वी को आउट करार दिया। यशस्वी भी इस फैसले से खुश नहीं थे और उन्होंने मैदानी अंपायर के साथ इसकी चर्चा की, लेकिन उनके पास पवेलियन लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
नियम के अनुसार, ऐसे मामलों में थर्ड अंपायर स्निको मीटर को चेक करता है और उसमें हरकत होने पर बल्लेबाज को आउट दिया जाता है। लेकिन यशस्वी के मामले में स्निको मीटर को ही नजरअंदाज कर दिया गया। रिप्ले में जब कुछ स्पष्ट नहीं था तो यशस्वी पर फैसला स्निको मीटर की हरकत के आधार पर दिया जाना चाहिए था। यशस्वी जब शॉट खेल रहे थे, उस वक्त स्निको मीटर में कोई हरकत नहीं दिखी, जिसका स्पष्ट मतलब है कि गेंद यशस्वी के बल्ले का किनारा लेकर कैरी के हाथों में नहीं गई थी। इसके बावजूद थर्ड अंपायर बांग्लादेश के शरफुदौला ने यशस्वी को आउट करार दिया। यशस्वी भी इस फैसले से खुश नहीं थे और उन्होंने मैदानी अंपायर के साथ इसकी चर्चा की, लेकिन उनके पास पवेलियन लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।